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क्या रोजाना लहसुन खाने से सचमुच घट जाता है कैंसर का खतरा?

विशेष स्वास्थ्य व मेडिकल रिपोर्टर, नई दिल्ली: भारतीय रसोइयों में तड़के का स्वाद बढ़ाने से लेकर प्राचीन औषधीय नुस्खों तक इस्तेमाल होने वाला लहसुन (Garlic) केवल एक साधारण मसाला नहीं है, बल्कि इसे सदियों से एक शक्तिशाली प्राकृतिक सुपरफूड माना जाता रहा है। हाल के वर्षों में दुनिया भर के कैंसर अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिकों और ऑन्कोलॉजिस्टों ने इस बात पर गहन अध्ययन किया है कि क्या दैनिक आहार में लहसुन का नियमित सेवन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के जोखिम को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) की रिपोर्ट्स के अनुसार, लहसुन में पाए जाने वाले जैविक रूप से सक्रिय तत्व शरीर की कोशिकाओं की रक्षा करने और ट्यूमर की कोशिकाओं को पनपने से रोकने में बेहद असरदार हैं।

लहसुन में पाए जाने वाले मुख्य रासायनिक तत्व और सल्फर यौगिक इसे औषधीय रूप से असाधारण बनाते हैं। जब कच्चे लहसुन को काटा, कूटा या चबाया जाता है, तो इसमें मौजूद 'एलिन' (Alliin) नामक एमीनो एसिड 'एलिनेज' (Alliinase) नामक एंजाइम के संपर्क में आता है। इन दोनों की प्रतिक्रिया से 'एलिसिन' (Allicin) नामक एक अत्यंत शक्तिशाली एंटी-कैंसर और एंटी-बैक्टीरियल यौगिक का निर्माण होता है। एलिसिन शरीर में बनने वाले हानिकारक मुक्त कणों (Free Radicals) को बेअसर करता है जो कोशिकाओं के डीएनए (DNA) को क्षतिग्रस्त करके उन्हें कैंसर में परिवर्तित कर सकते हैं। इसके अलावा, लहसुन में सेलेनियम, आर्जिनिन, सल्फर और फ्लेवोनोइड्स जैसे कई अन्य बायोएक्टिव घटक भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, लहसुन विशेष रूप से पाचन तंत्र (Digestive System) से जुड़े कैंसर के खतरे को कम करने में सबसे ज्यादा सहायक पाया गया है। कई अंतरराष्ट्रीय महामारी विज्ञान अध्ययनों में देखा गया है कि जो लोग अपने आहार में नियमित रूप से कच्चे या सही तरीके से तैयार किए गए लहसुन को शामिल करते हैं, उनमें पेट के कैंसर (Stomach/Gastric Cancer) और बड़ी आंत के कैंसर (Colorectal Cancer) का जोखिम 30 से 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है। इसके अलावा, लहसुन पेट में पाए जाने वाले 'हेलिकोबैक्टर पायलोरी' (H. pylori) नामक जीवाणु की वृद्धि को प्रभावी ढंग से रोकता है, जो पेट में अल्सर और आगे चलकर गैस्ट्रिक कैंसर का मुख्य कारण माना जाता है।

क्या कहता है नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट और WHO? जानिए लहसुन खाने का सही तरीका और '10 मिनट का नियम'

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) वयस्कों के सामान्य स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा के लिए प्रतिदिन लहसुन की 1 से 2 कली (लगभग 2 से 5 ग्राम) खाने की सिफारिश करता है। अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) ने भी लहसुन को उन प्रमुख चुनिंदा वनस्पतियों की सूची में शीर्ष पर रखा है जिनमें कैंसर-रोधी गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। हालांकि, कैंसर विशेषज्ञों का यह भी स्पष्ट मानना है कि लहसुन को पकाने का तरीका इसके औषधीय गुणों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

ज्यादातर लोग लहसुन को तेल में बहुत तेज आंच पर भूनते हैं या अत्यधिक पका देते हैं, जिससे इसमें मौजूद एलिनेज एंजाइम नष्ट हो जाता है और एलिसिन नहीं बन पाता। आहार विशेषज्ञों और ऑन्कोलॉजिस्टों के अनुसार, लहसुन का पूरा फायदा उठाने के लिए '10 मिनट के नियम' (10-Minute Rule) का पालन करना बेहद जरूरी है। इस नियम के अनुसार, लहसुन की कली को छीलकर काटने या कूटने के बाद कम से कम 10 से 15 मिनट के लिए प्लेट में खुला छोड़ देना चाहिए। इस समय के दौरान एलिसिन यौगिक पूरी तरह से निर्मित हो जाता है, जिसके बाद यदि इसे हल्का पकाया भी जाए, तो इसके कैंसर-रोधी गुण काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं।

कच्चा लहसुन खाना स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक फायदेमंद माना जाता है। सुबह खाली पेट कच्चे लहसुन की एक कली को हल्का सा कूटकर, थोड़े से पानी या शहद के साथ निगलने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) मजबूत होती है और यह कोशिकाओं के असामान्य विभाजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।

कैंसर विशेषज्ञों ने इस बात पर भी विशेष जोर दिया है कि लहसुन कैंसर की रोकथाम (Prevention) में मदद कर सकता है, लेकिन यह कैंसर का इलाज (Cure) बिल्कुल नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को कैंसर का निदान हो चुका है, तो लहसुन किसी मेडिकल थेरेपी (जैसे कीमोथेरेपी, रेडिएशन या सर्जरी) का विकल्प नहीं हो सकता। यह केवल एक सहायक और निवारक आहार उपाय है।

अत्यधिक मात्रा में लहसुन का सेवन करने से कुछ सावधानियां बरतनी भी जरूरी हैं। जो मरीज पहले से खून पतला करने वाली दवाएं (Blood Thinners) ले रहे हैं या जिनकी हाल ही में कोई सर्जरी होने वाली है, उन्हें अत्यधिक कच्चा लहसुन खाने से बचना चाहिए क्योंकि यह रक्तस्राव के खतरे को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, गंभीर एसिडिटी, अल्सर या जीईआरडी (GERD) से पीड़ित लोगों को खाली पेट कच्चा लहसुन खाने से पेट में जलन हो सकती है।

निष्कर्ष के तौर पर, आधुनिक वैज्ञानिक शोध और पारंपरिक चिकित्सा दोनों इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि लहसुन को अपनी दैनिक संतुलित डाइट का हिस्सा बनाने से कैंसर, विशेषकर पाचन तंत्र के कैंसर का खतरा निश्चित रूप से कम होता है। एक स्वस्थ जीवनशैली, पौष्टिक खान-पान, नियमित व्यायाम और तंबाकू व शराब से दूरी के साथ लहसुन का सही तरीके से सेवन आपको गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने में एक मजबूत ढाल का काम कर सकता है।

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