अमेरिका-ईरान जंग ने तोड़ी इकोनॉमी की कमर: 25 अरब डॉलर स्वाहा, क्या ट्रंप को ले डूबेगी महंगाई?

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब न सिर्फ गोलियों और बारूद तक सीमित है, बल्कि इसका सबसे गहरा घाव अमेरिका की अपनी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। पेंटागन के एक ताजा खुलासे ने वॉशिंगटन की सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक अमेरिका के 25 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) खाक हो चुके हैं। यह रकम इतनी बड़ी है कि इसमें नासा (NASA) का साल भर का बजट समा जाए।मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप की बढ़ी टेंशननवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले यह खबर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए किसी झटके से कम नहीं है। विपक्षी डेमोक्रेट्स ने इस आंकड़े को हथियार बना लिया है। उनका सीधा आरोप है कि ट्रंप सरकार जनता का पैसा एक ऐसी जंग में झोंक रही है, जिसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा। जनमत सर्वेक्षणों (Polls) में भी ट्रंप की लोकप्रियता गिरकर 34% पर आ गई है, जो रिपब्लिकन पार्टी के लिए खतरे की घंटी है।आखिर कहां खर्च हो रहा है इतना पैसा?पेंटागन की अधिकारी जूल्स हर्स्ट के अनुसार, इस भारी-भरकम राशि का एक बड़ा हिस्सा गोला-बारूद और हथियारों की सप्लाई पर खर्च हुआ है। इसके अलावा:मिडिल ईस्ट में भारी तैनाती: अमेरिका ने हजारों अतिरिक्त सैनिक और तीन बड़े विमान वाहक पोत (Aircraft Carriers) इस क्षेत्र में तैनात किए हैं।तेल की कीमतों में आग: युद्ध के कारण तेल और गैस की सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिससे अमेरिका में गैसोलीन की कीमतें पिछले चार सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।महंगाई का डबल अटैक: ईंधन के साथ-साथ खाद और खेती से जुड़े सामान महंगे होने से आम अमेरिकी नागरिकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।क्या बोले रक्षा सचिव पीट हेगसेथ?जहां एक तरफ बजट को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस खर्च का बचाव किया है। उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए कहा, “ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकने के लिए आप कितनी भी कीमत चुकाने को तैयार क्यों नहीं हैं?” उन्होंने इस युद्ध को जरूरी बताया और विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया।युद्ध के अब तक के हालात28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग ने अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की जान ले ली है और सैकड़ों घायल हुए हैं। हालांकि फिलहाल सीजफायर की स्थिति है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर तबाही जारी है। अब सबकी नजरें नवंबर के चुनावों पर हैं—क्या अमेरिकी जनता इस ‘महंगे युद्ध’ के लिए ट्रंप को माफ करेगी या सत्ता की चाबी डेमोक्रेट्स के हाथ में सौंप देगी?