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अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट में बनाया सीक्रेट शिपिंग रूट, रोजाना निकल रहा लाखों बैरल तेल; ईरानी सेना को लगी भी नहीं भनक

मध्य पूर्व (Middle East) के बेहद संवेदनशील और सामरिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बहुत बड़ा और हैरान कर देने वाला भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। रक्षा गलियारों से मिल रही खुफिया जानकारियों के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना (US Navy) ने ईरान की नाक के नीचे से एक बेहद गुप्त और सुरक्षित सीक्रेट शिपिंग रूट का निर्माण कर लिया है। इस नए और वैकल्पिक मार्ग के जरिए दुनिया के सबसे व्यस्त तेल गलियारे से रोजाना लाखों बैरल कच्चे तेल और आवश्यक रसद के जहाजों को सुरक्षित रूप से निकाला जा रहा है, और सबसे बड़ी बात यह है कि इस बात की भनक ईरानी सेना या इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को लगी तक नहीं है। अमेरिकी नौसेना की इस सामरिक और तकनीकी चाल ने ईरान के तमाम दावों और पहरेदारी को पूरी तरह से धता बता दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व और तनाव

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया भर के कच्चे तेल के व्यापार की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि खाड़ी देशों से निकलने वाले ऑयल टैंकरों का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी तंग समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका और ईरान के बीच इस क्षेत्र में वर्चस्व को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है। ईरानी सेना अक्सर इस रास्ते को बंद करने या यहां से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को धमकाने की साजिशें रचती रहती है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाले इस मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए ईरान लगातार एंटी-शिप मिसाइलें और नौसैनिक अभ्यास करता रहा है। ऐसे में, अमेरिकी सेना द्वारा इस इलाके में एक ऐसा खुफिया और सुरक्षित रास्ता ढूंढ निकालना या तैयार करना, जहां ईरान की रडार और सर्विलांस प्रणालियां पूरी तरह से फेल हो चुकी हैं, अमेरिकी सैन्य क्षमता का एक अद्भुत और अकल्पनीय उदाहरण माना जा रहा है।

कैसे तैयार हुआ यह सीक्रेट रूट और क्या है इसकी खासियत?

अमेरिकी नौसेना के रणनीतिकारों और आधुनिक तकनीक से लैस युद्धपोतों ने मिलकर इस जटिल अभियान को अंजाम दिया है। इस सीक्रेट शिपिंग रूट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, स्टेल्थ टेक्नोलॉजी और सैटेलाइट नेविगेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ईरानी सेना की कोस्टल रडार प्रणालियां और ड्रोन पूरी तरह से 'अंधे' हो चुके हैं। वे यह भांप ही नहीं पा रहे हैं कि कब अमेरिकी सुरक्षा घेरे में तेल टैंकर चुपचाप इस क्षेत्र से पार निकल जाते हैं। इस गुप्त मार्ग के जरिए रोजाना लाखों बैरल तेल सुरक्षित रूप से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Global Energy Supply Chain) में किसी भी प्रकार का बड़ा व्यवधान आने से बच गया है। वाशिंगटन की इस मास्टरस्ट्रोक रणनीति से तेहरान के रणनीतिकार गहरे सदमे में हैं।

ईरानी सेना और नेतृत्व की खुली नाकामी और खीझ

जब से ईरान को इस बात का अहसास हुआ है कि उसकी नौसैनिक नाकेबंदी और धमकियों के बावजूद अमेरिकी जहाज उसकी नजरों से बचकर लगातार तेल और हथियार निकाल रहे हैं, तब से ईरानी सैन्य मुख्यालय में हड़कंप मच गया है। ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और रिवोल्यूशनरी गार्ड के लिए यह स्थिति बेहद शर्मनाक मानी जा रही है, क्योंकि वे अपनी सीमाओं के ठीक पास चल रही इस बड़ी अमेरिकी गतिविधि को रोकने में पूरी तरह असमर्थ साबित हुए हैं। ईरानी मीडिया और राजनीतिक हलकों में इसको लेकर काफी खलबली मची हुई है, और वे इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ एक बड़ा खतरा बता रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) की तरफ से इस सीक्रेट रूट के बारे में आधिकारिक तौर पर बहुत ज्यादा खुलासे नहीं किए गए हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह कदम खाड़ी देशों में अमेरिका के दबदबे को और अधिक मजबूत करेगा।

वैश्विक ऊर्जा बाजारों और भारत जैसे देशों पर इसका क्या असर होगा?

इस पूरे घटनाक्रम का सीधा और सकारात्मक असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर देखने को मिल रहा है। चूंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र है, इसलिए यहां किसी भी सैन्य टकराव या रुकावट से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। अमेरिका द्वारा इस सुरक्षित और गुप्त मार्ग को संचालित करने से तेल की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है, जिससे भारत सहित कई अन्य प्रमुख विकासशील देशों को बड़ी राहत मिली है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी क्षेत्र के आयात पर निर्भर हैं। बहरहाल, मध्य पूर्व के इस उबलते हुए समंदर में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा यह नया शीत युद्ध आने वाले दिनों में और अधिक रंग दिखा सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

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