अयोध्या को बदनाम मत करो, 500 साल इंतजार किया तो 15 दिन और कर लो’, राम मंदिर दान चोरी विवाद पर बड़ा बयान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े दान विवाद को लेकर विपक्ष और आलोचकों को आड़े हाथों लिया है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए पवित्र नगरी अयोध्या और प्रभु श्री राम के धाम को बदनाम करने की साजिश बंद होनी चाहिए। राम मंदिर के खातों और दान राशि को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चल रही तरह-तरह की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए सीएम योगी ने साफ किया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और जांच पूरी होने तक सभी को धैर्य रखना चाहिए।
राजनीतिक फायदे के लिए अयोध्या को निशाना बनाना गलत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सार्वजनिक मंच से संबोधित करते हुए कहा कि राम जन्मभूमि का मुद्दा करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। सदियों के संघर्ष और संतों के बलिदान के बाद आज अयोध्या अपने गौरव को वापस पा रही है। ऐसे में कुछ लोग सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए मंदिर के दान और व्यवस्थाओं पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो लोग 500 साल तक भगवान राम को टेंट में देखकर खुश होते थे, आज उन्हें भव्य मंदिर पच नहीं रहा है।
15 दिन और सब्र रखने की दी सलाह
राम मंदिर ट्रस्ट और दान राशि में विसंगतियों के आरोपों पर बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि किसी भी व्यवस्था में अगर कोई शिकायत आती है, तो उसकी पूरी निष्पक्षता से जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि जब सनातन समाज ने मंदिर के लिए 500 साल का लंबा इंतजार किया है, तो क्या वे जांच के सही नतीजों के लिए 15 दिन और इंतजार नहीं कर सकते? मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राम मंदिर के पाई-पाई का हिसाब सुरक्षित है और किसी को भी आस्था के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
पारदर्शी व्यवस्था और सरकार का रुख
उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अयोध्या के विकास और सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं। सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या आज केवल उत्तर प्रदेश या देश की नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक राजधानी के रूप में उभर रही है। यहां के स्थानीय विकास, बुनियादी ढांचे और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे में बिना किसी पुख्ता सबूत के केवल सुर्खियां बटोरने के लिए मंदिर को विवादों में घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।