अरब सागर में बारूद की गंध अमेरिकी नौसेना ने ईरान के ‘कामिकाजे’ ड्रोन को मार गिराया, एयरक्राफ्ट कैरियर पर मंडरा रहा था खतरा

News India Live, Digital Desk: अरब सागर के अशांत पानी में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी नौसेना (US Navy) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ईरान के एक आत्मघाती ड्रोन को मार गिराया है। बताया जा रहा है कि यह ड्रोन अमेरिकी विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) यूएसएस अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) की ओर बेहद संदिग्ध तरीके से बढ़ रहा था। इस घटना ने मध्य पूर्व में जारी तनाव को एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है।दुश्मन का ड्रोन और पलक झपकते ही एक्शनअमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के सूत्रों के अनुसार, अरब सागर में गश्त कर रहे यूएसएस अब्राहम लिंकन के रडार पर एक अज्ञात उड़ने वाली वस्तु (UAV) दिखाई दी। जांच में पता चला कि यह ईरानी मूल का ड्रोन था जो सीधे अमेरिकी बेड़े की ओर आ रहा था। सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, अमेरिकी नौसेना के लड़ाकू विमानों ने तुरंत उड़ान भरी और खतरे को हवा में ही नेस्तनाबूद कर दिया।क्यों निशाने पर है ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’?यूएसएस अब्राहम लिंकन अमेरिका के सबसे शक्तिशाली विमानवाहक पोतों में से एक है। वर्तमान में यह इस क्षेत्र में इजरायल और हमास/हिजबुल्लाह के बीच चल रहे युद्ध के मद्देनजर अमेरिकी हितों की रक्षा और ईरान पर दबाव बनाने के लिए तैनात है। ईरान इस क्षेत्र में अमेरिकी मौजूदगी का लगातार विरोध करता रहा है, और इस ड्रोन हमले को एक ‘उकसावे वाली कार्रवाई’ के रूप में देखा जा रहा है।ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती ‘ड्रोन वॉर’हाल के महीनों में ईरान ने अपने ड्रोन तकनीक में भारी निवेश किया है। ‘कामिकाजे’ या आत्मघाती ड्रोन सस्ते होते हैं लेकिन बड़े जहाजों को भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान सीधे युद्ध के बजाय इन ड्रोनों के जरिए अमेरिका की धैर्य की परीक्षा ले रहा है। वहीं, अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह अपने सैन्य बेड़ों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा।क्या महायुद्ध की ओर बढ़ रही है दुनिया?इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अरब सागर एक प्रमुख व्यापारिक मार्ग है, और यहाँ बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। अगर इस तरह की झड़पें बढ़ती हैं, तो यह एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकती हैं, जिसमें कई देश शामिल हो सकते हैं।