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आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, पूछा- सरकारी अस्पताल में क्या खराबी

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को कानूनी मोर्चे पर एक बड़ा झटका लगा है। अपनी आंखों के इलाज के लिए विदेश (अमेरिका) जाने की अनुमति मांगने अदालत पहुंचे अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी का सामना करना पड़ा। अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए बेहद तल्ख लहजे में सवाल किया कि जब देश और राज्य में ही विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं, तो इलाज के बहाने बार-बार विदेश जाने की क्या आवश्यकता है? कोर्ट के इस कड़े रुख से टीएमसी खेमे में खलबली मच गई है।

सरकारी अस्पतालों पर भरोसा क्यों नहीं? कोर्ट ने याद दिलाई जिम्मेदारी

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने स्वास्थ्य ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार खुद अपनी चिकित्सा व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों के दावों के बड़े-बड़े विज्ञापन जारी करती है। ऐसे में राज्य के शीर्ष नेताओं और जनप्रतिनिधियों को मिसाल पेश करते हुए इलाज के लिए एसएसकेएम (SSKM) या देश के अन्य बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेजों का रुख करना चाहिए। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि अगर आम जनता इन सरकारी अस्पतालों में इलाज करवा सकती है, तो वीआईपी (VIP) नेताओं के लिए अलग मापदंड क्यों अपनाए जाने चाहिए?

केंद्रीय एजेंसियों की दलील: जांच प्रभावित होने की जताई आशंका

अदालत में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी जांच एजेंसियों के वकीलों ने भी अभिषेक बनर्जी के विदेश जाने का पुरजोर विरोध किया। केंद्रीय एजेंसियों ने अदालत के सामने दलील दी कि शिक्षक भर्ती घोटाले और कोयला तस्करी जैसे कई संवेदनशील मामलों में नेता से पूछताछ और जांच का दौर चल रहा है। ऐसे में उनके विदेश जाने से जांच की प्रक्रिया धीमी या प्रभावित हो सकती है। जांच एजेंसियों के इन तर्कों को कोर्ट ने बेहद गंभीरता से सुना और दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसने बनर्जी की विदेश यात्रा की योजनाओं पर पानी फेर दिया है।

बंगाल की सियासत गरमाई: विपक्ष ने साधा निशाना, टीएमसी बचाव में उतरी

हाईकोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी के बाद पश्चिम बंगाल में एक बार फिर से सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और वामपंथी दलों (CPIM) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार को घेरते हुए कहा कि यह इस बात का सबूत है कि टीएमसी नेताओं को खुद बंगाल के सरकारी अस्पतालों और उनके बनाए हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर 'स्वास्थ्य साथी' पर भरोसा नहीं है। वहीं दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी की आंखों की चोट बेहद गंभीर है, जिसके लिए पहले भी बाहर इलाज हुआ है और स्वास्थ्य के अधिकार को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।

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