आशा भोंसले ने खोला लता दीदी संग रिश्तों का राज, बताया क्यों शुरू हुई थी होड़, सुरों की मलिका का बड़ा खुलासा

News India Live, Digital Desk: भारतीय संगीत जगत में जब भी सुरों की बात होती है, तो मंगेशकर बहनों— लता मangeshkar और आशा भोंसले का नाम सबसे ऊपर आता है। दशकों तक अपनी आवाज से दुनिया को मंत्रमुग्ध करने वाली इन दोनों बहनों के बीच के रिश्तों को लेकर अक्सर तरह-तरह की चर्चाएं होती रही हैं। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता था कि क्या दो दिग्गज गायिकाओं के बीच कोई मनमुटाव था? अब खुद आशा भोंसले ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए लता दीदी के साथ अपने ‘स्वस्थ कॉम्पिटिशन’ (Healthy Competition) को लेकर ऐसी बात कही है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।जब एक ही मंच पर टकराते थे दो सुरआशा भोंसले ने एक पुराने इंटरव्यू का जिक्र करते हुए स्वीकार किया कि उनके और लता दीदी के बीच प्रतिस्पर्धा तो थी, लेकिन वह कड़वाहट वाली नहीं बल्कि एक-दूसरे से बेहतर करने की प्रेरणा वाली थी। उन्होंने बताया कि संगीत की दुनिया में पैर जमाने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी, क्योंकि लता दीदी पहले से ही एक स्थापित नाम थीं। आशा ताई के मुताबिक, “जब आपके सामने लता मंगेशकर जैसी महान गायिका खड़ी हो, तो आपको खुद को साबित करने के लिए अपनी सीमाओं से आगे जाना ही पड़ता है।” यह होड़ ही थी जिसने भारतीय सिनेमा को एक से बढ़कर एक सदाबहार गीत दिए।लता दीदी का अनुशासन और आशा की वर्सटाइल आवाजसंगीत गलियारों में चर्चा रहती थी कि लता जी को जहां गंभीर और शास्त्रीय आधार वाले गीतों के लिए पसंद किया जाता था, वहीं आशा भोंसले ने अपनी पहचान ‘कैबरे’ और ‘चुलबुले’ गानों से बनाई। आशा जी ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर अपनी गायकी का अंदाज अलग रखा ताकि उनकी तुलना दीदी से न की जाए। उन्होंने कहा कि लता दीदी उनकी गुरु की तरह थीं और उनसे मुकाबला करना सूरज को दीया दिखाने जैसा था। हालांकि, फिल्म निर्माताओं और संगीत निर्देशकों के बीच दोनों में से किसे चुना जाए, इसे लेकर जो खींचतान होती थी, उसने अनजाने में ही एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को जन्म दे दिया था।रिश्तों की डोर और वो आखिरी वक्ततमाम अफवाहों को खारिज करते हुए आशा भोंसले ने भावुक होकर बताया कि पर्दे के पीछे वे सिर्फ दो बहनें थीं। भले ही काम के मोर्चे पर लोग उन्हें प्रतिद्वंद्वी मानते थे, लेकिन घर में लता दीदी हमेशा बड़ी बहन का फर्ज निभाती थीं। आशा जी ने साफ किया कि उनके बीच कभी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं रही, बल्कि वे दोनों एक-दूसरे की सफलता का जश्न मनाती थीं। आज लता दीदी के जाने के बाद आशा ताई अक्सर उन्हें याद कर भावुक हो जाती हैं और कहती हैं कि वह प्रतिस्पर्धा ही थी जिसने उन्हें एक बेहतर कलाकार बनाया।