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इस्लामाबाद में महासंवाद ट्रंप की चेतावनी के बीच अमेरिका-ईरान में शांति वार्ता शुरू, क्या थम जाएगा युद्ध का खतरा?

News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण तनाव के बीच दुनिया के लिए एक बड़ी उम्मीद की किरण नजर आई है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज भारत के पड़ोसी मुल्क की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी शांति वार्ता शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई ‘युद्ध विराम’ की डेडलाइन और भारी सैन्य जमावड़े के बीच हो रही यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य महीनों से चल रहे संघर्ष को रोककर एक स्थायी शांति समझौते की जमीन तैयार करना है।ट्रंप की ‘शांति’ और ‘शक्ति’ वाली कूटनीतिराष्ट्रपति ट्रंप ने इस वार्ता के लिए अपने भरोसेमंद सिपहसालारों की एक हाई-प्रोफाइल टीम इस्लामाबाद भेजी है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जिनके साथ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनर भी शामिल हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर स्पष्ट संदेश दिया है कि ईरान के पास अब समझौते के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है। हालांकि, बातचीत की टेबल पर बैठने के बावजूद अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी कम नहीं की है, जो ट्रंप की ‘शांति के लिए शक्ति’ (Peace through Strength) वाली नीति को दर्शाता है।इस्लामाबाद बना ‘शांति का केंद्र’, पाकिस्तान की भूमिकाइस वार्ता के आयोजन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच 10 और 15 सूत्रीय एजेंडे पर चर्चा हो रही है। ईरान ने अपनी शर्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण और अमेरिकी सेना की क्षेत्रीय वापसी की मांग रखी है, जबकि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल परीक्षणों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग पर अड़ा है। इस्लामाबाद के होटल सेरेना के आसपास सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।होर्मुज संकट और तेल की कीमतों पर टिकी दुनिया की नजरइस वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को फिर से सुचारू रूप से खोलना है। युद्ध की स्थिति के कारण पिछले कई हफ्तों से सैकड़ों तेल टैंकर समुद्र में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है। यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है और दुनिया को महंगाई से बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, इजरायल ने भी चेतावनी दी है कि वह इस शांति वार्ता पर कड़ी नजर रखे हुए है और अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।

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