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ईरान-इजरायल युद्ध के बीच कैसे सुरक्षित भारत पहुँचा ऑयल टैंकर? सिग्नल बंद कर अदृश्य हुआ जहाज

News India Live, Digital Desk : पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच समुद्री व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ एक रणक्षेत्र में तब्दील हो चुका है। हाल ही में एक भारतीय तेल टैंकर ने अपनी लोकेशन और पहचान छुपाकर इस इलाके को सुरक्षित पार किया। इस सफल ऑपरेशन ने समुद्री सुरक्षा में ‘डार्क मोड’ (Dark Mode) के महत्व को फिर से चर्चा में ला दिया है।क्या होता है AIS (Automatic Identification System)? समुद्र में चलने वाले हर बड़े जहाज के लिए AIS एक अनिवार्य डिजिटल सिस्टम है।काम कैसे करता है: यह सिस्टम जहाज की पहचान, स्थिति, गति और दिशा के बारे में जानकारी रेडियो सिग्नल (VHF) और सैटेलाइट के जरिए दूसरे जहाजों और तटीय अधिकारियों को भेजता रहता है।जरूरत क्यों: इसका मुख्य उद्देश्य जहाजों के बीच टक्कर (Collision) को रोकना और समुद्री यातायात को सुव्यवस्थित करना है।भारतीय टैंकर ने सिग्नल क्यों बंद किया? तनावपूर्ण क्षेत्रों में, दुश्मन सेनाएं या विद्रोही समूह AIS डेटा का उपयोग करके जहाजों को ट्रैक करते हैं और उन पर मिसाइल या ड्रोन हमले करते हैं।पहचान छुपाना: भारतीय टैंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करते ही अपना AIS ट्रांसपोंडर बंद कर दिया। इससे वह रडार और सैटेलाइट ट्रैकिंग साइट्स (जैसे MarineTraffic) के लिए ‘अदृश्य’ हो गया।खतरे से बचाव: सिग्नल बंद होने के कारण हमलावर यह पता नहीं लगा सके कि जहाज किस देश का है और कहाँ जा रहा है।सुरक्षित मार्ग: टैंकर ने “रेडियो साइलेंस” बनाए रखते हुए मुंबई तक का सफर पूरा किया और भारतीय समुद्री सीमा में पहुँचने के बाद ही सिग्नल दोबारा चालू किया।समुद्री कानून और जोखिम: हालाँकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुसार AIS बंद करना अवैध माना जा सकता है, लेकिन ‘सुरक्षा और जीवन की रक्षा’ (Safety of Life at Sea – SOLAS) के नियमों के तहत, यदि कप्तान को लगे कि सिग्नल चालू रखने से जहाज को खतरा है, तो वह इसे बंद कर सकता है।

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