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‘इमरान खान अब नहीं रहे’ पत्रकार के दावे से पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल, अदियाला जेल की खबरों ने बढ़ाई हलचल

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की सेहत और उनकी मौजूदा स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक बार फिर सनसनी फैल गई है। रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद 73 वर्षीय इमरान खान के निधन से जुड़ी कुछ असत्यापित खबरों और सोशल मीडिया की तेज अफवाहों ने पाकिस्तान की सियासत में भूचाल ला दिया है। परिवार, पार्टी नेताओं और विदेशी मीडिया में चल रही इन चर्चाओं के बीच देश के भीतर तनाव का माहौल गहराता जा रहा है।

पाकिस्तानी पत्रकार के दावे से मची खलबली

इन तमाम अफवाहों और अटकलों को तूल तब मिला जब अमेरिका में रह रहे एक जाने-माने पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय (GHQ) के तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के हवाले से यह आशंका जताई कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अब इस दुनिया में नहीं हैं। पत्रकार ने दावा किया कि शायद यही वजह है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर इस बात को पूरे देश से छिपा रहे हैं। हालांकि, पत्रकार ने खुद इस बात को स्वीकार किया था कि यह पूरी जानकारी असत्यापित है और किसी भी आधिकारिक सूत्र ने इसे अपनी आंखों से नहीं देखा है, बल्कि यह सिर्फ सुनी-सुनाई बातों पर आधारित आशंका है।

पीटीआई नेताओं और परिवार का गंभीर आरोप

इन तमाम सनसनीखेज दावों के सामने आने के बाद पीटीआई पार्टी के नेताओं और इमरान खान की बहनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका मुख्य आरोप है कि पिछले कई दिनों से उन्हें अदियाला जेल में पूर्व पीएम से मिलने नहीं दिया जा रहा है। पार्टी ने पुरजोर मांग की है कि इमरान खान का तुरंत स्वतंत्र डॉक्टरों से मेडिकल चेकअप कराया जाए तथा उनके परिवार और वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति दी जाए। आपको बता दें कि इससे पहले नवंबर 2025 में भी इस तरह की अफवाहें उड़ी थीं, जिसके बाद दिसंबर 2025 में उनकी बहन उजमा खानम ने जेल में मिलकर उनकी सलामती की पुष्टि की थी, लेकिन उन्हें लगातार एकांत कारावास में रखे जाने की बात सामने आती रही है।

27 सितंबर को 'इस्लामाबाद लॉन्ग मार्च' का ऐलान और अमेरिकी दबाव

इमरान खान की सेहत को लेकर मचे इस घमासान के बीच पीटीआई ने शाहबाज शरीफ सरकार और सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरने की बड़ी तैयारी कर ली है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री और पार्टी नेता सोहेल अफरीदी ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि देश का युवा वर्ग बेहद आक्रोशित है और आगामी 27 सितंबर 2026 को इस्लामाबाद की तरफ एक बड़ा 'लॉन्ग मार्च' निकाला जाएगा जिसमें 20 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरेंगे।

दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी कांग्रेस के 13 द्विदलीय सांसदों ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को एक पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे इस्लामाबाद सरकार के साथ बातचीत में इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की जेल की अमानवीय स्थितियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाएं। पत्र में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत की उन चेतावनियों का भी हवाला दिया गया है जिनमें इमरान के लंबे एकांत कारावास और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

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