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उत्तर से दक्षिण तक फिर सक्रिय हुआ मानसून, दिल्ली-बिहार समेत कई राज्यों में भारी बारिश का IMD अलर्ट

देशभर में मानसूनी हवाओं ने एक बार फिर अपनी रफ्तार पकड़ ली है और उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र (Cyclonic Circulation) और मानसून ट्रफ के अनुकूल दिशा में स्थानांतरित होने के चलते देश के एक बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू हो गया है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर दक्षिण के तटीय राज्यों तक अगले कुछ दिनों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वायुमंडल में नमी का स्तर बढ़ने और कम दबाव के क्षेत्र के सक्रिय होने से राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल समेत कई राज्यों में झमाझम बारिश के साथ 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने का खतरा बना हुआ है। आपदा प्रबंधन विभागों को निचले इलाकों में जलभराव और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन को लेकर अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली-एनसीआर में बादलों की आवाजाही: तापमान में गिरावट और जलभराव की चेतावनी

राजधानी दिल्ली और इससे जुड़े एनसीआर के शहरों (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद) में आसमान में घने बादलों ने डेरा डाल लिया है। मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए रुक-रुक कर मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है।

बारिश की फुहारों से पिछले कुछ दिनों से जारी उमस भरी गर्मी से लोगों को बड़ी राहत मिली है और दिन के अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि, सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में भारी बारिश के कारण प्रमुख चौराहों और अंडरपास में पानी भरने से सड़कों पर ट्रैफिक की गति धीमी होने की संभावना है।

बिहार और उत्तर प्रदेश: गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश और वज्रपात का बड़ा जोखिम

पूर्वी भारत में मानसून का सबसे अधिक असर बिहार और उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। मौसम केंद्र पटना के मुताबिक, राज्य के ऊपर बने चक्रवाती दबाव के कारण पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, दरभंगा, समस्तीपुर, मोतिहारी और सीवान समेत करीब 20 से अधिक जिलों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में आकाशीय बिजली (ठनका) गिरने का अत्यधिक खतरा है। आपदा प्रबंधन विभाग ने किसानों और आम नागरिकों से अपील की है कि बादलों की तेज गर्जना के दौरान खेतों में जाने या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।

वहीं उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, तराई और बुंदेलखंड के हिस्सों में बादलों की सक्रियता बढ़ने वाली है। लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, मेरठ और बरेली में गरज के साथ बारिश की संभावना है। नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।

पहाड़ों पर लैंडस्लाइड का संकट: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों को हिदायत

पहाड़ी राज्यों में मानसून की सक्रियता एक बार फिर चिंता का सबब बन गई है। उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जिलों में तेज बारिश के साथ भूस्खलन (Landslides) का खतरा बढ़ गया है। पहाड़ों से मलबा गिरने के कारण कई संपर्क मार्ग और राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हो सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश के शिमला, कुल्लू, मनाली, मंडी और कांगड़ा में भी मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। स्थानीय प्रशासन ने नदी-नालों के किनारे जाने पर रोक लगा दी है और पर्यटकों को चेतावनी दी है कि वे मौसम के ताजा अपडेट लेने के बाद ही पहाड़ी रास्तों पर सफर करें।

मध्य और दक्षिण भारत का हाल: महाराष्ट्र, गुजरात और केरल में झमाझम बारिश

मध्य और पश्चिमी भारत में भी मानसूनी सिस्टम पूरी ताकत दिखा रहा है। मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के साथ-साथ राजस्थान के पूर्वी जिलों (जयपुर, कोटा, भरतपुर) में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

दक्षिण भारत के राज्यों में तटीय कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में मानसूनी हवाओं के प्रभाव से भारी वर्षा दर्ज की जा रही है। मछुआरों को समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों और तेज हवाओं के कारण गहरे पानी में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।

खराब मौसम के दौरान बचाव के जरूरी सुरक्षा नियम

  • आंधी, तूफान या बिजली कड़कने के समय तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित शेल्टर में शरण लें।

  • खुले मैदान, अकेले खड़े ऊंचे पेड़, धातु के खंभों और पानी के स्रोतों से हमेशा उचित दूरी बनाए रखें।

  • बारिश के दौरान भारी जलभराव वाले रास्तों और तेज बहाव वाले पुलों को पार करने की कोशिश न करें।

  • घर के इलेक्ट्रॉनिक और बिजली से चलने वाले उपकरणों के प्लग बिजली बोर्ड से अलग कर दें।

  • किसी भी आपात स्थिति के लिए स्थानीय मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर नजर रखें।

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