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उनकी आवाज हमेशा दिलों में जिंदा रहेगी!’ 90 के दशक के सुनहरे दौर को याद कर भावुक हुए अनु मलिक

भारतीय संगीत जगत यानी बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री के इतिहास में यदि नब्बे के दशक (90s Decade) को स्वर्ण युग कहा जाए, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इस दौर में संगीत प्रेमियों को एक से बढ़कर एक बेहतरीन मेलोडियस गाने और रूह को छू लेने वाली आवाजें मिलीं, जिन्होंने पीढ़ियों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी है। इसी सुनहरे दौर के दो सबसे बड़े और दिग्गज सितारे, प्रसिद्ध संगीतकार अनु मलिक (Anu Malik) और सुरों के बेताज बादशाह कुमार सानू (Kumar Sanu) एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। हाल ही में एक खास बातचीत के दौरान संगीतकार अनु मलिक नब्बे के दशक की अपनी सुनहरी यादों में खो गए और उन्होंने अपने जिगरी यार तथा लीजेंड्री सिंगर कुमार सानू की अद्वितीय गायकी की जमकर तारीफ की। अनु मलिक ने दिल से कसीदे पढ़ते हुए कहा कि कुमार सानू जैसी जादुई आवाज और सादगी सदियों में कभी-कभार ही पैदा होती है, और उनकी यह बेमिसाल आवाज इस देश के संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा-हमेशा के लिए जिंदा रहेगी। इस भावनात्मक और पुरानी यादों से भरे इंटरव्यू ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है और नब्बे के दशक के गानों के दीवाने फैंस इस जोड़ी को एक बार फिर याद करके बेहद भावुक हो रहे हैं।

90 के दशक का जादू: जब संगीत सीधे रूह को छू जाता था

नब्बे का वह दशक जब कैसेट्स का जमाना था, रेडियो पर फरमाइशों का दौर चलता था और घर-घर में प्यार, दर्द और जुदाई के तराने गूंजा करते थे, आज भी संगीत प्रेमियों के जेहन में तरोताजा है। उस दौर में अनु मलिक ने अपने संगीत निर्देशन से हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक चार्टबस्टर गानों की सौगात दी थी, और उन गानों को अपनी जादुई आवाज से अमर बनाने का काम किया था कुमार सानू ने। अनु मलिक ने याद करते हुए बताया कि वह दौर ऐसा था जब म्यूजिक कंपोजर और सिंगर की ट्यूनिंग इतनी मजबूत होती थी कि बिना किसी आधुनिक ऑटो-ट्यून या डिजिटल करेक्शन के गाने पहली ही टेक में रिकॉर्ड हो जाते थे और सीधे सुनने वालों के दिलों में उतर जाते थे। आज के आधुनिक और रीमिक्स के दौर में जहां संगीत बहुत जल्दी पुराना हो जाता है, वहीं 90 के दशक के उन क्लासिक गानों की चमक आज भी वैसी ही बरकरार है, और इसका पूरा श्रेय उस दौर के कलाकारों की बेजोड़ मेहनत और उनकी प्राकृतिक प्रतिभा को जाता है।

कुमार सानू की तारीफ में अनु मलिक ने पढ़े कसीदे, बताया बेजोड़ कलाकार

कुमार सानू की गायकी की प्रशंसा करते हुए अनु मलिक ने कहा कि उनके जैसी बहुमुखी प्रतिभा वाला गायक मिलना आज के समय में लगभग नामुमकिन सा हो गया है। रोमांटिक गानों की बात हो, दर्द भरे नगमों की बात हो या फिर थिरकाने वाले जोशीले गीतों की, कुमार सानू ने हर विधा में अपनी आवाज का ऐसा जादू चलाया कि सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाए। अनु मलिक ने अपने पुराने दिनों के संस्मरण साझा करते हुए बताया कि जब वे स्टूडियो में कोई नया गाना तैयार करके कुमार सानू को देते थे, तो वे उस कंपोजिशन को पल भर में समझ जाते थे और अपनी गायकी से उसमें ऐसी जान फूंक देते थे कि गाना एक ही बार में इतिहास रच देता था। अनु मलिक ने बड़े ही आदर भाव से कहा कि आज भले ही संगीत की तकनीक बहुत बदल गई हो, लेकिन कुमार सानू के गले की जो मिठास और गहराई है, उसकी बराबरी आज का कोई भी गायक नहीं कर सकता है, और वे भारतीय संगीत के एक ऐसे चमकते हुए सितारे हैं जो कभी फीके नहीं पड़ सकते।

अनु मलिक और कुमार सानू की जोड़ी ने रचे थे कई ऐतिहासिक इतिहास

संगीतकार अनु मलिक और गायक कुमार सानू की इस जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को अनगिनत ऐसे सुपरहिट गाने दिए हैं जो आज भी लोगों की जुबान पर रटे हुए हैं। 'बाजीगर' फिल्म के गाने हों, 'विरासत' के मेलोडियस ट्रैक्स हों या फिर 'फिल्मी दुनिया' के अन्य अनमोल नगमें, इस जोड़ी ने हर बार अपनी कला का लोहा मनवाया है। अनु मलिक ने उस वक्त को याद किया जब उनके द्वारा बनाए गए गानों को रिकॉर्ड करने के लिए स्टूडियो के बाहर फैंस की भीड़ लग जाया करती थी। उन्होंने कहा कि कुमार सानू के साथ काम करना उनके करियर का सबसे शानदार और यादगार अनुभव रहा है। दोनों की जुगलबंदी ने भारतीय संगीत उद्योग को ऐसा स्वर्णिम मुकाम दिया, जिसकी मिसाल आज भी नए दौर के कलाकार देते हैं। यह आपसी सम्मान और पेशेवर दोस्ती इस बात का सबूत है कि सच्ची कला और टैलेंट कभी उम्र या दौर के मोहताज नहीं होते हैं।

आधुनिक संगीत और रीमिक्स संस्कृति पर दिग्गजों की गहरी चिंता

बातचीत के दौरान दोनों दिग्गज कलाकारों ने आज के समय में बन रहे गानों और रीमिक्स कल्चर (Remix Culture) पर भी खुलकर अपनी राय रखी। उनका मानना था कि आज के गाने बहुत तेजी से बनते हैं और उतनी ही तेजी से लोगों के दिलों से उतर भी जाते हैं, क्योंकि उनमें वो गहराई और ठहराव गायब हो चुका है जो नब्बे के दशक के संगीत में हुआ करता था। गानों में शब्दों के चयन और धुनों की मिठास पर अब पहले जैसा ध्यान नहीं दिया जाता है। अनु मलिक ने नई पीढ़ी के संगीतकारों और गायकों को सलाह दी कि यदि वे लंबे समय तक टिकना चाहते हैं और लोगों के दिलों में जगह बनाना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ना होगा और संगीत की मूल आत्मा को समझना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीक सिर्फ एक साधन हो सकती है, लेकिन असली संगीत तो दिल से और साधना से ही निकल सकता है, जैसा कि उन्होंने और उनके समकालीन कलाकारों ने अपने दौर में करके दिखाया था।

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