अब ‘किताबी कीड़ा’ बनने से काम नहीं चलेगा: CBSE ने बदला पढ़ाई का तरीका, क्लास 6 से 8 तक के बच्चे सीखेंगे असली जिंदगी के हुनर

मम्मी-पापा के लिए खुशखबरी:अक्सर माता-पिता की शिकायत रहती है कि “बच्चे के नंबर तो पूरे आ रहे हैं,लेकिन उसे दुनियादारी या घर का कोई काम नहीं आता।” अगर आप भी यही सोचते हैं,तो सीबीएसई (CBSE)ने आपकी सुन ली है। भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है।अब आपके बच्चे सिर्फ रट्टा मारकर पास नहीं होंगे,बल्कि स्कूल में उन्हें पेंचकस चलाना,पौधों की देखभाल करना और गैजेट्स को समझना सिखाया जाएगा। बोर्ड ने क्लास6से8वीं तक के लिएकौशल शिक्षा (Skill Education)को अनिवार्य कर दिया है। यह अब कोई “एक्स्ट्रा सब्जेक्ट” नहीं,बल्कि मेन पढ़ाई का हिस्सा होगा।क्या है’स्किल बोध’? (NCERTकी नई तैयारी)नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020)के तहत, NCERTने किताबों की एक नई सीरीज़ तैयार की है,जिसका नाम है’स्किल बोध’ (Skill Bodh)।मकसद:बच्चों को किताबों की दुनिया से निकालकर हकीकत से रूबरू कराना।बदलाव:अब तक क्राफ्ट या स्पोर्ट्स को साइड में रखा जाता था,लेकिन अब हर हफ्ते लगातार दो पीरियड सिर्फ स्किल्स सीखने के लिए होंगे। स्कूल का टाइम-टेबल बदलने वाला है।बच्चे आखिर सीखेंगे क्या? (Curriculum)ये बदलाव सिर्फ़ कागज़ पर नहीं,जमीन पर दिखेंगे। बच्चों को तीन तरह के’असली काम’सिखाए जाएंगे:जीवों के साथ जुड़ाव:इसमें पेड़-पौधों को लगाना,जानवरों की देखभाल और खेती-बाड़ी की बुनियादी बातें शामिल हैं।मशीनें और मटीरियल:घर के छोटे-मोटे यांत्रिक काम (Repairing),औज़ारों का इस्तेमाल और चीजें कैसे बनती हैं,यह सिखाया जाएगा।मानव सेवा:दूसरों की मदद करना,फर्स्ट एड (First Aid)और सामाजिक जिम्मेदारी।प्रोजेक्ट का’कोटा’:अगले3सालों में (कक्षा6, 7और8मिलाकर),हर छात्र को कुल9प्रोजेक्टपूरे करने होंगे। इसके लिए स्कूलों में लगभग270घंटे की प्रैक्टिकल क्लास होगी। मतलब अब बस्ता हल्का और हुनर भारी होगा।पेपर पेन वाली परीक्षा का जमाना गया!सबसे मजे की बात यह है कि इसका रिजल्ट “परीक्षा हॉल” में बैठकर तय नहीं होगा।लिखित परीक्षा (Written Test):सिर्फ10%अंक। (जी हाँ,आपने सही पढ़ा!)बाकी90%कैसे मिलेंगे?30%एक्टिविटी बुक के लिए।30%वाइवा (Viva)या प्रेजेंटेशन के लिए।20%टीचर ऑब्जर्वेशन के लिए (बच्चा क्लास में कितना सीख रहा है)।10%पोर्टफोलियो (फाइल) के लिए।स्कूल में लगेगा’कौशल मेला’पढ़ाई को उत्सव बनाने के लिए साल के अंत में स्कूलों में एक’कौशल मेला’लगाया जाएगा। यहाँ बच्चे अपने बनाए प्रोजेक्ट,मॉडल और अनुभव को अपने माता-पिता के सामने प्रदर्शित करेंगे। सोचिये,आपका बच्चा जब आपको यह समझाएगा कि उसने एक मशीन कैसे ठीक की या पौधा कैसे उगाया,तो वह पल कितना गर्व भरा होगा।सीबीएसई का साफ़ कहना है कि अब हुनरमंद बनना’विकल्प’नहीं,बल्कि’ज़रूरत’है।