एशिया की पहली मॉडर्न यूनिवर्सिटी जहाँ रवींद्रनाथ टैगोर से लेकर अमर्त्य सेन तक ने गढ़ा इतिहास

News India Live, Digital Desk : जब हम दुनिया की बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटीज की बात करते हैं, तो अक्सर कैम्ब्रिज, ऑक्सफ़ोर्ड या हार्वर्ड का नाम जुबान पर आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे भारत में एक ऐसा शिक्षा का मंदिर है, जिसने दुनिया को एक या दो नहीं, बल्कि चार नोबेल पुरस्कार विजेता (Nobel Prize Winners) दिए हैं? यह कोई और नहीं, बल्कि एशिया की पहली आधुनिक यूनिवर्सिटी कलकत्ता विश्वविद्यालय (University of Calcutta) है।आज हम आपको इसी ऐतिहासिक संस्थान के सुनहरे पन्नों की सैर पर ले चलते हैं।अंग्रेजों के जमाने की शुरुआत (1857)बात 1857 की है, जब भारत आज़ादी की पहली लड़ाई लड़ रहा था, ठीक उसी साल शिक्षा के क्षेत्र में भी एक क्रांति हो रही थी। कलकत्ता (अब कोलकाता) में इस यूनिवर्सिटी की नींव रखी गई। इसे एशिया की सबसे पहली “मॉडर्न यूनिवर्सिटी” माना जाता है क्योंकि यहाँ पश्चिमी तर्ज पर (Western style) शिक्षा और रिसर्च की शुरुआत हुई थी।लेकिन असली कहानी इसकी इमारत में नहीं, बल्कि यहाँ से निकले अनमोल रत्नों में छिपी है।वो 4 नाम जिन्होंने दुनिया बदल दीजरा सोचिए, एक ही संस्थान से जुड़े चार लोग दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान ‘नोबेल प्राइज’ हासिल करें, यह अपने आप में कितनी बड़ी बात है।रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore): गुरुदेव, जिन्हें साहित्य (Literature) के लिए नोबेल मिला। उनका नाता इस यूनिवर्सिटी से गहरा रहा है।सी.वी. रमन (C.V. Raman): फिजिक्स के जादूगर, जिन्होंने ‘रमन इफेक्ट’ खोजा। उन्होंने इसी यूनिवर्सिटी के साइंस कॉलेज में अपनी रिसर्च की थी।अमर्त्य सेन (Amartya Sen): दुनिया के बेहतरीन अर्थशास्त्रियों (Economists) में से एक। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन यहीं प्रेसीडेंसी कॉलेज (जो उस वक्त इसी यूनिवर्सिटी से जुड़ा था) से की थी।अभिजित बनर्जी (Abhijit Banerjee): हाल ही में 2019 में इकोनॉमिक्स का नोबेल जीतने वाले अभिजित जी ने भी अपना बेस इसी यूनिवर्सिटी में तैयार किया था।इतना ही नहीं, मलेरिया पर काम करने वाले रोनाल्ड रॉस को भी नोबेल मिला था और उन्होंने भी अपनी रिसर्च कलकत्ता में ही की थी।सिर्फ नोबेल ही नहीं, और भी हैं सितारेइस लिस्ट में और भी नाम जोड़ लीजिये। ‘वंदे मातरम’ लिखने वाले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय हों, या नेताजी सुभाष चंद्र बोस, या फिर देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ये सब इसी यूनिवर्सिटी की देंन हैं। स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्तित्व ने भी यहीं से पढ़ाई की थी।आज भी कायम है जलवाइतने साल बीत जाने के बाद भी, कलकत्ता यूनिवर्सिटी आज भी शिक्षा के मामले में देश में टॉप पर रहती है। इसकी लाल रंग की ऐतिहासिक इमारतें सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं हैं, बल्कि ज्ञान की वो मशाल हैं जिसने भारत को ‘विश्व गुरु’ बनने की राह दिखाई।अगली बार जब कोई पूछे कि भारत में टैलेंट कहाँ मिलता है, तो गर्व से इस यूनिवर्सिटी का नाम लीजियेगा!