World Autism Awareness Day: 1 साल से पहले ही बच्चों में दिखने लगते हैं ऑटिज्म के ये गंभीर लक्षण, माता-पिता भूलकर भी न करें नजरअंदाज
News India Live, Digital Desk: दुनिया भर में हर साल 2 अप्रैल को ‘वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे’ (World Autism Awareness Day) मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के प्रति लोगों में, खासकर माता-पिता में जागरूकता फैलाना है। आज के समय में दुनिया भर में लाखों बच्चे ऑटिज्म जैसी गंभीर स्थिति से जूझ रहे हैं। यह कोई आम बीमारी नहीं, बल्कि एक न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन है, जो बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास को बुरी तरह प्रभावित करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर माता-पिता शुरुआत में ही इसके लक्षणों को पहचान लें, तो सही समय पर इलाज और थेरेपी के जरिए बच्चे के विकास को सही दिशा दी जा सकती है।क्या है ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर? पीडियाट्रिक्स न्यूरोलॉजी और चाइल्ड डेवलपमेंट विशेषज्ञ डॉ. विजय शर्मा के अनुसार, ऑटिज्म एक ऐसी दिमागी स्थिति है जिसमें बच्चे का न्यूरोडेवलपमेंट (मस्तिष्क का विकास) प्रभावित होता है। इसकी वजह से बच्चे को सामाजिक व्यवहार करने, लोगों से बातचीत करने और नई चीजें सीखने की प्रक्रिया में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।1 साल की उम्र से पहले ही दिखने लगते हैं ये लक्षण अक्सर माता-पिता को लगता है कि ऑटिज्म के लक्षण बच्चा बड़ा होने पर ही पता चलते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। डॉ. शर्मा के मुताबिक, एक बच्चे में ऑटिज्म के शुरुआती संकेत 6 से 12 महीने की उम्र में ही नजर आने लगते हैं। ऐसे में माता-पिता को अपने बच्चे की हर छोटी हरकत पर बारीकी से ध्यान देना चाहिए।आंखों से संपर्क न बनाना (Eye Contact) अगर आपका बच्चा आपसे या किसी अन्य व्यक्ति से बात करते समय या खेलते समय आंखों में आंखें डालकर (आई कॉन्टैक्ट) संपर्क नहीं बना पाता है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। यह ऑटिज्म का सबसे शुरुआती और प्रमुख लक्षण हो सकता है।नाम पुकारने पर कोई रिएक्शन न देना आमतौर पर छोटे बच्चे अपना नाम सुनकर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। लेकिन अगर आप बार-बार अपने बच्चे का नाम पुकार रहे हैं और वह कोई भी रिएक्शन या जवाब नहीं दे रहा है, तो यह खतरे की घंटी है। इस स्थिति में आपको तुरंत किसी विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।दूसरों के हाव-भाव की नकल न करना छोटे बच्चे बहुत जल्दी दूसरों को देखकर उनके हाव-भाव (Facial Expressions) और हरकतों की नकल करने लगते हैं, जैसे हंसना या ताली बजाना। लेकिन ऑटिज्म से पीड़ित बच्चा ऐसा करने में असमर्थ महसूस करता है।बोलने या आवाज निकालने में देरी एक सामान्य बच्चा 6 महीने की उम्र तक बड़बड़ाने या कुछ आवाजें निकालने लगता है। लेकिन अगर आपका बच्चा आवाज निकालने में बहुत ज्यादा देरी कर रहा है या बिल्कुल शांत रहता है, तो यह ऑटिज्म का स्पष्ट संकेत हो सकता है।इन असामान्य हरकतों पर भी रखें कड़ी नजर विशेषज्ञों के अनुसार, ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे अक्सर एक ही तरह की हरकत को बार-बार दोहराते हैं। इसमें बेवजह अपने हाथ हिलाना, लगातार अपने शरीर को झुलाना या घंटों तक सिर्फ एक ही खिलौने के साथ एक ही तरीके से खेलना शामिल है।कब है डॉक्टर के पास जाने का सही समय? अगर माता-पिता को अपने बच्चे के व्यवहार या विकास में ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण या असामान्य बदलाव नजर आएं, तो उन्हें घबराने के बजाय तुरंत किसी चाइल्ड न्यूरोलॉजिस्ट या पीडियाट्रिशियन से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती पहचान और सही बिहेवियरल थेरेपी की मदद से बच्चे की स्थिति में काफी हद तक सुधार लाया जा सकता है।
