एजुकेशन

कंप्यूटर साइंस का क्रेज खत्म? JEE एडवांस्ड 179 रैंक वाले टॉपर ने ठुकराया CSE, सिविल इंजीनियरिंग चुनकर सबको चौंकाया

आईआईटी (IIT) में एडमिशन के लिए चल रही जोसा (JoSAA) काउंसलिंग के दौरान इस साल एक बेहद हैरान करने वाला और बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। सालों से टॉप रैंकर्स की पहली और इकलौती पसंद रहने वाली कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (BTech CSE) को लेकर छात्रों का नजरिया बदलता दिख रहा है। देश के सबसे कठिन एग्जाम में से एक जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced) में ऑल इंडिया 179 रैंक हासिल करने वाले एक टॉप स्टूडेंट ने सबको चौंकाते हुए आईआईटी बॉम्बे या दिल्ली के कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के बजाय सिविल इंजीनियरिंग (Civil Engineering) को चुना है। इस बड़े फैसले के बाद अब शिक्षा जगत और इंजीनियरिंग के गलियारों में यह बहस तेज हो गई है कि क्या वाकई आईटी सेक्टर की चमक अब फीकी पड़ने लगी है।

आखिर क्यों बदला स्टूडेंट का मूड और सिविल की तरफ बढ़ा झुकाव

पिछले एक दशक से भारतीय छात्रों के बीच यह धारणा बन चुकी थी कि अच्छी सैलरी और सुरक्षित भविष्य के लिए सिर्फ कंप्यूटर साइंस ही एकमात्र रास्ता है। लेकिन इस साल जोसा काउंसलिंग के शुरुआती ट्रेंड्स कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर हो रही छंटनी (Layoffs) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व चैटजीपीटी जैसी आधुनिक तकनीकों के आने से कोडिंग और सॉफ्टवेयर जॉब्स को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। वहीं दूसरी तरफ, देश में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, बुलेट ट्रेन, एक्सप्रेसवे और स्मार्ट सिटी मिशन के कारण कोर सेक्टर, खासकर सिविल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में नौकरियों और सरकारी नौकरियों (PSU) के शानदार अवसर पैदा हो रहे हैं।

केवल पैकेज नहीं, अब करियर की स्टेबिलिटी और पैशन को प्राथमिकता

काउंसिलिंग में हिस्सा ले रहे करियर काउंसलर्स और आईआईटी प्रोफेसर्स का मानना है कि अब छात्र केवल शुरुआती पैकेज या भेड़चाल को देखकर अपनी ब्रांच नहीं चुन रहे हैं। जेईई के टॉपर्स अब लॉन्ग-टर्म करियर स्टेबिलिटी और अपने पर्सनल पैशन को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। 179 रैंक लाने वाले छात्र का यह फैसला इस बात का सबूत है कि आने वाले समय में देश के विकास में सिविल इंजीनियरों की भूमिका सबसे अहम होने वाली है। यूपीएससी (UPSC) और सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी सिविल इंजीनियरिंग हमेशा से एक बेहद मजबूत और पसंदीदा बैकग्राउंड रहा है, जिससे उन्हें आगे चलकर प्रशासनिक सेवाओं में बड़ी मदद मिलती है।

जोसा काउंसलिंग में इस साल दिख रहे हैं कई बड़े बदलाव

जोसा काउंसलिंग के विभिन्न राउंड्स की चॉइस फिलिंग को देखें तो इस बार आईआईटी और एनआईटी (NIT) में दाखिला लेने वाले छात्रों का रुझान कोर ब्रांचेज की तरफ पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर हुआ है। केवल आईआईटी बॉम्बे या आईआईटी दिल्ली ही नहीं, बल्कि आईआईटी मद्रास, खड़गपुर और कानपुर में भी सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की सीटों के लिए तगड़ा कॉम्पिटिशन देखने को मिल रहा है। अगर आप भी इस साल काउंसलिंग में शामिल हो रहे हैं, तो केवल कंप्यूटर साइंस के पीछे भागने के बजाय अपनी रुचि, भविष्य की संभावनाओं और कोर सेक्टर्स में आ रहे नए बदलावों को ध्यान में रखकर ही अपनी मनपसंद चॉइस लॉक करें।

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