उत्तर प्रदेश

कंसवंशी DNA वाले अहिरों कान खोलकर सुन लो’: ओपी राजभर के इस विवादित बयान से यूपी की राजनीति में मचा भूचाल

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर अक्सर सियासी माहौल को गर्माते रहते हैं, लेकिन सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर का एक ताजा बयान आग में घी का काम कर रहा है। अपने बेबाक और आक्रामक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी और यादव समाज को लेकर एक ऐसा विवादित और तीखा बयान दे दिया है, जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। राजभर के इस बयान के सामने आने के बाद से विपक्षी दलों खासतौर पर समाजवादी पार्टी के नेताओं में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है और सूबे का सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

क्या कहा ओपी राजभर ने और क्यों की सपा के 37 सांसदों की तुलना राक्षसों से?

एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओपी राजभर ने अपने भाषण के दौरान बेहद आक्रामक तेवर दिखाए और सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के सांसदों और उनके समर्थकों पर निशाना साधा। राजभर ने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि 'कंसवंशी DNA वाले अहिरों कान खोलकर सुन लो', और इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी के 37 लोकसभा सांसदों की तुलना पुराणों के राक्षसों से कर डाली। उनका यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में जंगल की आग की तरह फैल गया है। राजभर का आरोप था कि विपक्षी दल और उनके नेता समाज में सिर्फ जातिगत उन्माद फैलाने और अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का काम कर रहे हैं, जिसके जवाब में उन्होंने यह तीखी शब्दावली इस्तेमाल की।

चुनावी सरगर्मी के बीच ओपी राजभर के इस बयान के क्या होंगे सियासी मायने?

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की सुगबुगाहट के बीच नेताओं के ऐसे तीखे और बयानबाजी भरे दौर ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से उलझा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओपी राजभर का यह बयान भले ही उनके अपने वोटबैंक को साधने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो, लेकिन इससे राज्य में जातीय तनाव बढ़ने और विपक्षी दलों को सत्तारूढ़ गठबंधन पर हमलावर होने का पूरा मौका मिल गया है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इस बयान को सीधे तौर पर यादव समाज और पिछड़ों का अपमान करार देते हुए चुनाव आयोग और सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। देखना यह होगा कि इस बयान के बाद यूपी के चुनावी मैदान में आने वाले दिनों में और क्या-क्या सियासी रंग देखने को मिलते हैं।

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