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कर्नाटक में अब बोतल नहीं, नशे की मात्रा पर लगेगा टैक्स ड्राफ्ट जारी, सस्ती शराब हो सकती है महंगी

News India Live, Digital Desk: कर्नाटक सरकार अपनी दशकों पुरानी आबकारी नीति को बदलने जा रही है। नए प्रस्ताव के तहत अब शराब की बोतलों पर टैक्स उनके एमआरपी (MRP) स्लैब के बजाय उसमें मौजूद शुद्ध अल्कोहल (Pure Alcohol) की मात्रा के आधार पर वसूला जाएगा। यदि यह ड्राफ्ट फाइनल हो जाता है, तो कर्नाटक भारत का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा जो पश्चिमी देशों की तर्ज पर ‘अल्कोहल-इन-बेवरेज’ (AIB) टैक्सेशन मॉडल को अपनाएगा।1. क्या है नया ‘ABV’ टैक्स मॉडल?वर्तमान में कर्नाटक में 16 अलग-अलग प्राइस स्लैब हैं, जिनके आधार पर टैक्स तय होता है। नए ड्राफ्ट के अनुसार:शुद्ध अल्कोहल पर टैक्स: डिस्टिल्ड स्पिरिट्स (जैसे व्हिस्की, रम, वोदका) पर प्रति लीटर ‘शुद्ध अल्कोहल’ के लिए 1,000 रुपये की एक्साइज ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव है।स्लैब में कटौती: सरकार 16 प्राइस स्लैब को घटाकर केवल 8 स्लैब करने की योजना बना रही है, जिससे टैक्स ढांचा सरल हो जाएगा।मूल्य नियंत्रण: सरकार अब खुद कीमतें तय करने के बजाय निर्माताओं (Manufacturers) को बाजार के हिसाब से कीमतें तय करने की छूट (Deregulation) दे सकती है।2. आपकी जेब पर क्या होगा असर?विशेषज्ञों और ‘वाइन मर्चेंट्स एसोसिएशन’ के अनुसार, इस बदलाव से शराब की कीमतों में 10% से 20% तक की वृद्धि हो सकती है:सस्ती शराब पर मार: सबसे ज्यादा असर उन ब्रांड्स पर पड़ेगा जो सस्ते हैं लेकिन उनमें अल्कोहल की मात्रा अधिक है। उदाहरण के लिए, 180 ml (क्वाटर) की बोतल जो अभी 80-95 रुपये में मिलती है, उसकी कीमत बढ़कर 105-110 रुपये तक हो सकती है।बीयर और वाइन: कम अल्कोहल वाली बीयर और वाइन की कीमतों में स्थिरता रह सकती है या उनमें मामूली कमी भी देखी जा सकती है, क्योंकि यह मॉडल कम नशीले पेय पदार्थों को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।3. सरकार का लक्ष्य: 45,000 करोड़ का राजस्वमुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट 2026-27 के दौरान ही इन सुधारों के संकेत दिए थे।राजस्व लक्ष्य: सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आबकारी क्षेत्र से 45,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।पारदर्शिता: इस कदम से शराब की तस्करी और टैक्स चोरी पर लगाम लगने की उम्मीद है, क्योंकि हर लीटर अल्कोहल का डिजिटल हिसाब रखा जाएगा।4. कब से लागू होंगे नए नियम?सरकार ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर आम जनता और शराब उद्योग से जुड़े लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। उम्मीद की जा रही है कि सुझावों पर विचार करने के बाद इसे अगले कुछ महीनों में चरणबद्ध तरीके (Stages) से लागू किया जाएगा, ताकि बाजार में अचानक कोई बड़ा उतार-चढ़ाव न आए।

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