कश्मीरी पंडितों के लिए PM पैकेज के 6000 फ्लैट्स में से 5176 तैयार, 20 लोकेशन पर बने घर; चरणबद्ध तरीके से मिलेगा पजेशन

कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री विशेष रोजगार पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी विस्थापित (कश्मीरी पंडित) कर्मचारियों के सुरक्षित और स्थायी आवास की दिशा में बड़ी सफलता हासिल हुई है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा बुलाई गई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में आधिकारिक तौर पर जानकारी दी गई कि घाटी की 20 अलग-अलग लोकेशनों पर स्वीकृत कुल 6,000 ट्रांजिट फ्लैट्स में से 5,176 फ्लैट्स का निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है।
आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण विभाग (DMRR&R) और लोक निर्माण विभाग (PW-R&B) की संयुक्त समीक्षा बैठक में इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में संबंधित कार्यदायी एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि शेष बचे निर्माण कार्यों को तय समय-सीमा (Deadlines) के भीतर पूरा किया जाए और सरकारी नियमों के तहत पहले से हुए आवंटन के आधार पर कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से इन फ्लैट्स का पजेशन (हैंडओवर) सौंपना शुरू किया जाए।
20 लोकेशनों पर सुरक्षित ट्रांजिट आवास: बुनियादी सुविधाओं का काम अंतिम चरण में
कश्मीर घाटी के विभिन्न जिलों जैसे बडगाम, कुलगाम, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा, बारामूला, बांदीपोरा और श्रीनगर (जेवान) समेत 20 स्थानों पर इन बहुमंजिला ट्रांजिट फ्लैट्स का निर्माण कराया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि केवल फ्लैट्स का ढांचा ही तैयार नहीं हुआ है, बल्कि उससे जुड़े सहायक एवं बुनियादी नागरिक कार्य भी अधिकांश साइटों पर पूर्ण होने के करीब हैं:
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लिफ्ट और पावर बैकअप: बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट लगाने का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है।
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आंतरिक सड़कें और ड्रेनेज: परिसरों के भीतर पक्की सड़कों और आधुनिक जल निकासी (ड्रेनेज) नेटवर्क का निर्माण अंतिम चरण में है।
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कम्युनिटी हॉल: कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामाजिक व सांस्कृतिक आयोजनों के लिए समर्पित सामुदायिक भवनों का निर्माण किया गया है।
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सुरक्षा व्यवस्था: कर्मचारियों की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए इन सभी कॉलोनियों में चहारदीवारी और सुरक्षा चौकियों का पुख्ता प्रबंध किया जा रहा है।
जम्मू के माइग्रेंट कैंपों का भी होगा कायाकल्प: ₹82.45 करोड़ की योजना मंजूर
बैठक में केवल कश्मीर घाटी के ट्रांजिट फ्लैट्स ही नहीं, बल्कि जम्मू में स्थित कश्मीरी विस्थापितों के राहत शिविरों (Migrant Camps) के नवीनीकरण पर भी बड़ा फैसला लिया गया।
सरकार ने जम्मू के विभिन्न माइग्रेंट कैंपों में बने आवासीय ब्लॉक्स की व्यापक मरम्मत और कायाकल्प (Repair & Renovation) के लिए ₹82.45 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी दी है। अधिकारियों ने बताया कि इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और जमीनी स्तर पर मरम्मत कार्य शीघ्र शुरू होने जा रहा है। इसके तहत शिविरों में स्थित स्कूलों, स्वास्थ्य डिस्पेंसरियों, आंतरिक सड़कों और पार्कों के बुनियादी ढांचे को भी अपग्रेड किया जाएगा।
नए प्रोजेक्ट्स और सामाजिक सुविधाएं: ₹20 करोड़ के नए टेंडर जारी
विस्थापित समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए चालू वित्तीय वर्ष में जम्मू के पुरखू, नगरोटा, मूठी और जगती कैंपों में लगभग ₹20 करोड़ की लागत से नए बुनियादी प्रोजेक्ट्स शुरू किए जा रहे हैं, जिनके टेंडर की प्रक्रिया जारी है:
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जगती में कम्युनिटी हॉल: जगती टाउनशिप में ₹6.50 करोड़ की लागत से बना बहुउद्देशीय कम्युनिटी हॉल पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है।
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पुरखू में अतिरिक्त फ्लैट्स: पुरखू (जम्मू) में कश्मीरी प्रवासियों के लिए अतिरिक्त फ्लैट्स के निर्माण की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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पीओजेके (PoJK) भवन: सुकेतर में बन रहे 'पीओजेके भवन' के निर्माण कार्य की भी समीक्षा की गई और इसे इसी वित्तीय वर्ष में पूरा करने का सख्त निर्देश दिया गया।
अगले वित्तीय वर्ष के लिए विभाग ई-लर्निंग सेंटर, डिजिटल लाइब्रेरी, करियर काउंसलिंग सेंटर, स्किल डेवलपमेंट व वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर और सोलर पावर प्रोजेक्ट्स की डीपीआर तैयार कर रहा है।
घाटी में सुरक्षित वापसी और पुनर्वास की दिशा में मील का पत्थर
प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के तहत घाटी में लगभग 6,000 कश्मीरी पंडितों और अन्य विस्थापित युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई थीं। हालांकि, सुरक्षित सरकारी आवास की कमी के कारण अधिकांश कर्मचारी निजी किराये के मकानों में रहने को मजबूर थे, जिससे सुरक्षा को लेकर लगातार चिंताएं बनी रहती थीं।
अब 5,176 फ्लैट्स के तैयार हो जाने और जल्द पजेशन मिलने से इन कर्मचारियों को न केवल सुरक्षित आवासीय माहौल मिलेगा, बल्कि वे बिना किसी भय के घाटी में अपनी सरकारी सेवाएं दे सकेंगे। यह कदम कश्मीरी पंडितों के अपनी पैतृक भूमि पर सम्मानजनक और सुरक्षित पुनर्वास की दिशा में सबसे ठोस और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है।