रहना, खाना और पढ़ाई सब कुछ बिल्कुल फ्री, फिर भी हर महीने कैडेट्स के बैंक खाते में आती है मोटी रकम

भारतीय सेना, नौसेना या वायुसेना में अफसर बनकर देश सेवा करने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित जरिया है। एनडीए की परीक्षा पास करना जितना गर्व की बात है, इसकी ट्रेनिंग लाइफ भी उतनी ही शानदार और अनुशासित होती है। अक्सर लोग जानते हैं कि एनडीए में कैडेट्स को विश्व स्तरीय ट्रेनिंग, रहना, खाना, मेडिकल और पढ़ाई सब कुछ सरकार की तरफ से बिल्कुल मुफ्त दिया जाता है। लेकिन बहुत कम लोगों को यह पता है कि इन तमाम मुफ्त सुविधाओं के बाद भी ट्रेनिंग के दौरान हर महीने कैडेट्स के बैंक अकाउंट में सरकार की तरफ से एक तय सैलरी या स्टाइपेंड भेजा जाता है।
ट्रेनिंग के दौरान कैडेट्स को हर महीने कितनी मिलती है रकम एनडीए की तीन साल की कड़ी ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद कैडेट्स को उनकी चुनी गई विंग (आर्मी, नेवी या एयरफोर्स) के अनुसार आगे की ट्रेनिंग के लिए संबंधित अकादमियों (IMA, INA या AFA) में भेजा जाता है। जब कैडेट्स अपनी सर्विस ट्रेनिंग के आखिरी साल या प्री-कमिशनिंग ट्रेनिंग के दौर में होते हैं, तो उन्हें सरकार की तरफ से एक फिक्स स्टाइपेंड दिया जाता है। रक्षा मंत्रालय के नियमों के मुताबिक, इस दौरान कैडेट्स को हर महीने 56,100 रुपये (लेवल 10 के शुरुआती वेतन के बराबर) का स्टाइपेंड मिलता है, जो कि किसी भी युवा के करियर की शुरुआत के लिए एक बेहद शानदार रकम है।
रहना-खाना सब मुफ्त तो फिर कैडेट्स कहां खर्च करते हैं यह पैसा एनडीए और अन्य सैन्य अकादमियों में कैडेट्स के रहने के लिए बेहतरीन हॉस्टल, पौष्टिक और संतुलित भोजन (मेस), वर्दी, किताबें और खेलकूद की सभी सुविधाएं पूरी तरह से निशुल्क होती हैं। ऐसे में कैडेट्स को मिलने वाला यह स्टाइपेंड उनके बैंक खातों में जमा होता रहता है। इस रकम का कुछ हिस्सा उनके पर्सनल खर्चों जैसे कि अपनी पसंद की एक्स्ट्रा किट्स, कैंटीन के कुछ सामान या छुट्टियों में घर आने-जाने के सफर के लिए इस्तेमाल होता है। बाकी की बड़ी राशि उनके बैंक अकाउंट में सुरक्षित रहती है, जिससे ट्रेनिंग खत्म होते ही उनके पास एक अच्छा-खासा बैंक बैलेंस तैयार हो जाता है।
कमिशन होने के बाद सैलरी और भत्तों में लग जाता है चार चांद जैसे ही कैडेट्स अपनी पूरी ट्रेनिंग खत्म करके भारतीय सशस्त्र बलों में 'लेफ्टिनेंट' या इसके समकक्ष रैंक पर कमिशन होते हैं, उनकी किस्मत पूरी तरह बदल जाती है। कमिशन होते ही उनकी नियमित सैलरी शुरू हो जाती है, जो कि 56,100 रुपये के मूल वेतन (बेसिक पे) के साथ शुरू होती है। इसके अलावा उन्हें महंगाई भत्ता (DA), किट मेंटेनेंस अलाउंस, हाई एल्टीट्यूड अलाउंस (यदि पोस्टिंग दुर्गम इलाकों में हो), ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मुफ्त मेडिकल जैसी दर्जनों सरकारी सुविधाएं और भत्ते मिलने लगते हैं। कुल मिलाकर एक सैन्य अधिकारी की शुरुआती इन-हैंड सैलरी ही बेहद आकर्षक और समाज में सर्वोच्च सम्मान दिलाने वाली होती है।