विदेश

कीव में तबाही की रात: रूस ने यूक्रेन पर किया भीषण हमला, घंटों गूंजते रहे सायरन और जोरदार धमाके

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब बेहद खतरनाक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। रूसी सेना ने यूक्रेन की राजधानी कीव सहित कई प्रमुख शहरों को निशाना बनाते हुए एक बड़ा और चौतरफा हवाई हमला बोल दिया है। इस अचानक हुए हमले से पूरी यूक्रेन की राजधानी दहल उठी। चश्मदीदों और स्थानीय मीडिया के मुताबिक, राजधानी कीव में कई घंटों तक लगातार हवाई हमले के सायरन (Air Raid Sirens) बजते रहे और एक के बाद एक कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं। इस ताजा हमले ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।

मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स से कीव को बनाया निशाना

सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, रूस ने इस हमले में अपनी आधुनिक क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और अत्यधिक खतरनाक सुसाइड ड्रोन्स (कमिकेज़ ड्रोन) के झुंड का इस्तेमाल किया है। यूक्रेनी एयर डिफेंस सिस्टम (वायु सेना) ने कई मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद कई रिहायशी इलाकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों (पावर ग्रिड और एनर्जी सप्लाई) को भारी नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। हमले के बाद कीव के कई हिस्सों में बिजली और पानी की सप्लाई ठप हो गई है।

बंकरों में दुबकने को मजबूर हुए लोग और बढ़ा मानवीय संकट

धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि स्थानीय प्रशासन को तुरंत नागरिकों को नजदीकी बंकरों और अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों में शरण लेने के लिए एडवायजरी जारी करनी पड़ी। डरे-सहमे लोग पूरी रात बंकरों में गुजारने को मजबूर रहे। इस बड़े हमले से प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू और एम्बुलेंस की टीमें मलबे को हटाने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटी हैं। युद्ध के इस नए चरण ने स्थानीय आबादी के सामने एक बार फिर गहरा मानवीय संकट खड़ा कर दिया है।

वैश्विक स्तर और क्षेत्रीय सुरक्षा पर हमले का बड़ा असर

यूक्रेन पर हुए इस हालिया बड़े हमले ने दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिमी देशों और नाटो (NATO) ने रूस के इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है और यूक्रेन को और अधिक एडवांस डिफेंस सिस्टम देने की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और लॉजिस्टिक्स चेन पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है, जिससे दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता का माहौल और गहरा हो गया है।

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