केंद्रीय कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले मोदी कैबिनेट ने 2% DA बढ़ोतरी को दी मंजूरी, सैलरी और पेंशन में होगा तगड़ा इजाफा

News India Live, Digital Desk: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए शनिवार का दिन बड़ी सौगात लेकर आया। हफ्तों के लंबे इंतजार के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 2 प्रतिशत महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद अब केंद्रीय कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता 58 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गया है।जनवरी 2026 से लागू होगा फैसला, मिलेगा 3 महीने का एरियरसरकार ने स्पष्ट किया है कि डीए में की गई यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। चूंकि घोषणा अप्रैल के मध्य में हुई है, इसलिए कर्मचारियों और पेंशनर्स को जनवरी, फरवरी और मार्च महीने का एरियर (Arrear) भी दिया जाएगा। आमतौर पर होली के आसपास होने वाली यह घोषणा इस बार देरी से हुई, जिससे कर्मचारियों में चिंता बढ़ रही थी, लेकिन अब कैबिनेट के फैसले ने लाखों चेहरों पर मुस्कान ला दी है।1 करोड़ से अधिक लोगों को मिलेगा सीधा लाभइस फैसले का सीधा असर देश के 50.46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 68.27 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ेगा।खजाने पर बोझ: इस बढ़ोतरी से सरकारी खजाने पर सालाना लगभग 6,791.24 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।सैलरी में बढ़ोतरी: डीए की गणना बेसिक पे के आधार पर होती है, ऐसे में 2% की वृद्धि से हर स्तर के कर्मचारियों की मासिक टेक-होम सैलरी में सम्मानजनक बढ़ोतरी होगी।8वें वेतन आयोग की मांग के बीच राहतयह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने की मांग को लेकर दबाव बना रहे हैं। नेशनल काउंसिल-JCM ने सरकार को ज्ञापन सौंपकर न्यूनतम वेतन को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव भी दिया है। हालांकि, वर्तमान में दी गई 2% की राहत को महंगाई के खिलाफ एक तात्कालिक सुरक्षा कवच माना जा रहा है।देरी की वजह और कर्मचारियों का विरोधइस बार डीए की घोषणा में पिछले 10 वर्षों की तुलना में सबसे अधिक देरी हुई। इसके विरोध में 16 अप्रैल को देश भर के विभिन्न सरकारी विभागों (जैसे इनकम टैक्स और पोस्टल डिपार्टमेंट) के कर्मचारियों ने लंच ब्रेक के दौरान प्रदर्शन भी किया था। जानकारों का मानना है कि वित्तीय संतुलन और आगामी नीतिगत बदलावों की वजह से यह देरी हुई, लेकिन अब अधिसूचना जारी होने से सारा गतिरोध समाप्त हो गया है।