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केदारनाथ में 5 महीने में 50 टन कचरा! पिछले साल से 2.5 गुना ज्यादा प्लास्टिक और कूड़े का अंबार, चौंकाने वाले आंकड़ों से हड़कंप

हिमालय की सुरम्य वादियों और मंदाकिनी नदी के उद्गम के पास स्थित 11वें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम में आस्था के सैलाब के बीच एक बेहद भयावह और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। चारधाम यात्रा के शुरुआती 5 महीनों के भीतर ही केदारनाथ धाम, पैदल यात्रा मार्ग और आधार शिविरों से 50 टन से अधिक ठोस कचरा (सॉलिड वेस्ट) एकत्र किया गया है। आधिकारिक निगरानी और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के आंकड़ों के अनुसार, इस साल एकत्र हुआ कचरा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 2.5 गुना अधिक है। समुद्र तल से 3,584 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर बसे इस बेहद संवेदनशील इकोलॉजिकल जोन में प्लास्टिक, पैकेज्ड फूड रैपर्स और टिन के डिब्बों का यह बढ़ता अंबार ग्लेशियरों, स्थानीय जैव विविधता और हिमालयी पर्यावरण के लिए गंभीर खतरे की घंटी बजा रहा है।

केदारनाथ में कचरे का बढ़ता पहाड़: आंकड़ों ने बढ़ाई पर्यावरणविदों की चिंता

केदारनाथ पैदल मार्ग (गौरीकुंड, जंगलचट्टी, भीमबली, लिनचोली से लेकर केदारनाथ बेस कैंप तक) पर लगभग 16 से 19 किलोमीटर के दायरे में सफाई एजेंसियों और जिला पंचायत द्वारा चलाए गए अभियानों में यह 50 टन कचरा निकला है।

आंकड़ों की तुलना करें तो पिछले साल इसी अवधि में लगभग 20 टन कचरा दर्ज किया गया था। इस बार रिकॉर्ड तीर्थयात्रियों की आमद, सिंगल-यूज प्लास्टिक की चोरी-छिपे बिक्री और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की अंधाधुंध खपत के चलते यह आंकड़ा अप्रत्याशित रूप से ढाई गुना बढ़कर 50 टन के पार पहुंच गया। इनमें 70 फीसदी से अधिक हिस्सा सिंगल-यूज प्लास्टिक की खाली बोतलें, चिप्स-बिस्कुट के मल्टी-लेयर रैपर्स, थर्मोकोल कप-प्लेट, रेनकोट और टिन के कंटेनर हैं, जो प्राकृतिक रूप से सैकड़ों सालों तक नष्ट नहीं होते।

कचरे के इस भारी उछाल के पीछे के 3 सबसे बड़े कारण

  • तीर्थयात्रियों की रिकॉर्ड आमद और ओवर-टूरिज्म: यात्रा के कपाट खुलते ही प्रतिदिन 20 हजार से अधिक श्रद्धालु धाम पहुंच रहे हैं। भारी भीड़ के चलते बुनियादी वेस्ट-मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी दबाव पड़ा है।

  • पैदल मार्ग पर अवैध दुकानें और ढाबे: गौरीकुंड से केदारनाथ के बीच सैकड़ों अस्थायी खोखे और स्टॉल बिना उचित डस्टबिन और डिस्पोजल व्यवस्था के पैकेज्ड फूड बेचते हैं। कई बार बचा हुआ कूड़ा सीधे गहरी खाइयों और नालों में बहा दिया जाता है।

  • प्लास्टिक पैकेजिंग पर सख्त रोक का अभाव: चेकपोस्ट पर चेकिंग के बावजूद प्लास्टिक की बोतलों और पन्नियों का यात्रा मार्ग पर बेरोकटोक पहुंचना प्रशासनिक निगरानी की खामियों को उजागर करता है।

हिमालयी ग्लेशियरों और मंदाकिनी नदी के लिए कितना बड़ा खतरा?

पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तापमान कम होने के कारण बायो-डिग्रेडेबल कचरा भी आसानी से नहीं सड़ता, जबकि प्लास्टिक पूरी तरह अमर रहता है। केदारनाथ में जमा हो रहा यह प्लास्टिक कचरा धीरे-धीरे माइक्रोप्लास्टिक में टूटकर आसपास के ग्लेशियरों और बर्फ की परतों में समा रहा है।

काले और रंगीन प्लास्टिक के टुकड़ों के कारण बर्फ की धूप परावर्तित (Reflect) करने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे ग्लेशियर सामान्य से अधिक तेजी से पिघलने लगते हैं। इसके अलावा, बारिश और बर्फबारी के दौरान नालियों और प्राकृतिक जलस्रोतों में फंसा कचरा मंदाकिनी नदी में बहकर नीचे के मैदानी इलाकों में पानी को प्रदूषित कर रहा है, जो स्थानीय पारिस्थितिकी और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए विनाशकारी है।

प्रशासन के प्रयास: डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम (Q-Recycle) कितना कारगर?

रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन और स्थानीय नगर निकायों ने कचरा प्रबंधन के लिए क्यूआर कोड आधारित 'डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम' (DDRS) लागू किया था, जिसके तहत पानी की बोतल पर 10 रुपये अतिरिक्त लिए जाते हैं और खाली बोतल वापस करने पर पैसे लौटाए जाते हैं। इसके बावजूद हजारों तीर्थयात्री 10 रुपये वापस लेने के बजाय बोतल को पहाड़ियों से नीचे फेंक देते हैं।

कचरे को कॉम्पैक्ट करने के लिए केदारनाथ और सोनप्रयाग में बेलिंग मशीनें (Baling Machines) लगाई गई हैं, जहां कचरे के बंडल बनाकर उन्हें रीसाइक्लिंग के लिए हरिद्वार और ऋषिकेश के रिसाइक्लर्स तक ट्रकों और खच्चरों के जरिए नीचे भेजा जा रहा है। हालांकि, जिस गति से कचरा रोज पैदा हो रहा है, उसकी तुलना में रिसाइकल ट्रांसपोर्ट की गति काफी धीमी पड़ रही है।

केदारनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए जरूरी अपील

पवित्र धाम की दिव्यता और प्रकृति की शुद्धता को बचाना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर श्रद्धालु का नैतिक कर्तव्य भी है:

  • अपनी पानी की बोतल साथ रखें: सिंगल-यूज प्लास्टिक की बोतलें बार-बार खरीदने के बजाय स्टील या कॉपर की रिफिलेबल बोतल साथ लाएं और रास्तों में लगे आरओ वाटर पॉइंट्स से पानी भरें।

  • कचरा अपने बैग में रखें: रास्ते में खाए गए स्नैक्स या दवाओं के खाली रैपर्स को रास्ते पर या खड्डों में फेंकने के बजाय अपने बैकपैक में रखें और बेस कैंप पर लगे कूड़ेदानों में ही डालें।

  • स्थानीय और प्राकृतिक खान-पान अपनाएं: पैकेज्ड जंक फूड के बजाय स्थानीय गर्म ताजा भोजन और पारंपरिक पेय पदार्थों को प्राथमिकता दें।

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