विदेश

सुबह-सुबह आई सबसे बड़ी खुशखबरी, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध पूरी तरह खत्म: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज 4 दिन में खुलेगा

दुनियाभर के बाजारों, वैश्विक अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से भारत के लिए आज सुबह-सुबह एक बहुत बड़ी और राहत भरी वैश्विक खुशखबरी सामने आई है। इस साल फरवरी के महीने से अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व (Middle East) में जारी विनाशकारी युद्ध अब चार महीनों के लंबे और खूनी संघर्ष के बाद पूरी तरह से खत्म होने जा रहा है। दोनों महाशक्तियों के बीच युद्धविराम और पूर्ण शांति को लेकर एक ऐतिहासिक सहमति बन गई है, जिसके बाद आगामी शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड की धरती पर इस अंतिम वैश्विक शांति समझौते (Peace Deal) पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस महा-समझौते के साथ ही दुनिया का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) भी अगले चार दिनों के भीतर जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। लाइव हिन्दुस्तान के अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ निसर्ग दीक्षित की इस विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड ग्लोबल डिप्लोमेसी रिपोर्ट में जानिए इस ऐतिहासिक शांति समझौते के पीछे के मुख्य नायक और दुनिया पर इसके पड़ने वाले व्यापक असर की पूरी इनसाइड स्टोरी।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने किया शांति समझौते का आधिकारिक ऐलान, कतर-सऊदी का जताया आभार

इस ऐतिहासिक और दुनिया को बड़ी राहत देने वाले समझौते की आधिकारिक घोषणा मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की है। उन्होंने वैश्विक मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि बेहद गहन और कई दौर की गोपनीय कूटनीतिक बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच पूर्ण शांति बहाल करने पर सहमति बन गई है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने लेबनान सहित मध्य पूर्व के सभी युद्धग्रस्त मोर्चों पर अपनी तमाम सैन्य कार्रवाइयों और हवाई हमलों को तुरंत और हमेशा के लिए रोकने का एकतरफा ऐलान कर दिया है। पीएम शरीफ ने इस जटिल मध्यस्थता प्रयास में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने के लिए कतर के शीर्ष नेतृत्व का दिल से धन्यवाद किया। इसके साथ ही उन्होंने सऊदी अरब और तुर्की के शासकों का भी विशेष आभार व्यक्त किया, जिनके पर्दे के पीछे के कूटनीतिक दबाव ने इस नामुमकिन दिख रहे समझौते को सफल बनाने में बहुत बड़ी और ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, कहा- जो काम पूर्व राष्ट्रपति नहीं कर पाए वो मैंने कर दिखाया

दूसरी तरफ, वाशिंगटन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को अपनी एक बहुत बड़ी व्यक्तिगत और कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थायी शांति, स्थिरता और सुरक्षा का एक नया सवेरा लेकर आएगा। ट्रंप ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनसे पहले अमेरिका के कई राष्ट्रपतियों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय विवादों को लेकर शांति स्थापित करने की कोशिशें की थीं, लेकिन वे सभी बुरी तरह असफल रहे। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के नेताओं को इतिहास में पहली बार वाशिंगटन में एक ऐसा मजबूत राष्ट्रपति मिला है, जिसने उन्हें कागजों के बजाय जमीन पर वास्तविक शांति हासिल करने में मदद की है। ट्रंप ने साफ किया कि 19 जून को स्विट्जरलैंड में अंतिम हस्ताक्षर होते ही अंतरराष्ट्रीय नौसेना के सहयोग से होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगों को हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई चेन फिर से बहाल हो सकेगी।

तेहरान में हुई कतर के मध्यस्थों की हाई-प्रोफाइल बैठक, बंद बाजार और कच्चे तेल के संकट से मिलेगी बड़ी राहत

स्विट्जरलैंड में होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह की नींव रखने और तकनीकी शर्तों को अंतिम रूप देने के लिए कतर के विशेष दूतों और मध्यस्थों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल रविवार को ही ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचा था। तेहरान में ईरानी विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई इस मैराथन बैठक में समझौते के अंतिम ब्लूप्रिंट पर मुहर लगाई गई। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एपी (AP) से बातचीत में वरिष्ठ राजनयिकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दोनों देश एक ऐसे व्यापक समझौते पर पूरी तरह सहमत हो चुके हैं, जिससे न केवल हजारों बेकसूर लोगों की जान लेने वाले इस आधुनिक युद्ध को रोका जा सका है, बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से दुनियाभर के बाजारों में जो कच्चे तेल (Crude Oil) का भयंकर संकट पैदा हो गया था, वह भी अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

भारत के लिए क्यों बेहद संजीवनी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना, पेट्रोल-डीजल के दामों में आ सकती है बड़ी गिरावट

भारतीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस युद्ध का खत्म होना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का दोबारा खुलना किसी बहुत बड़े वरदान से कम नहीं है। भारत अपनी जरूरत का करीब 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल मध्य पूर्व के देशों से इसी समुद्री मार्ग के जरिए आयात करता है। फरवरी से इस रूट के बंद होने के कारण भारतीय तेल कंपनियों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा था, जिससे देश में मालभाड़ा और महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा था। अब जब अगले चार दिनों में यह स्ट्रेट पूरी तरह सुरक्षित और साफ कर दिया जाएगा, तो भारत को खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बेहद आसान और सस्ती हो जाएगी। आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि इस वैश्विक शांति समझौते के लागू होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 15 से 20 डॉलर प्रति बैरल तक नीचे गिर सकती हैं, जिससे आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में आम जनता को एक बहुत बड़ी राहत मिलना लगभग तय माना जा रहा है।

 

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