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कोर्ट रूम में जज साहब के बैठते ही धड़कनें तेज, आंखों से छलके आंसू

बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड में अदालत द्वारा ऐतिहासिक फैसला सुनाए जाने के बाद मृतक सौरभ की मां रेणु देवी कोर्ट परिसर में ही भावुक होकर रो पड़ीं। जब विशेष अदालत ने सौरभ की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड (फांसी की सजा) मुकर्रर किया, तो पूरे कोर्ट रूम में सन्नाटा पसर गया।

फैसले के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सौरभ की मां ने कोर्ट रूम के उस तनावपूर्ण क्षण को याद करते हुए कहा, "जैसे ही जज साहब अपनी कुर्सी पर बैठे, तो कलेजा मुंह को आ गया था। दिल की धड़कनें इतनी तेज थीं कि समझ नहीं आ रहा था कि क्या होगा। लेकिन जैसे ही जज साहब ने दोनों के लिए फांसी की सजा का ऐलान किया, तो ऐसा लगा मानो मेरे बेकसूर बेटे की आत्मा को आज जाकर थोड़ी शांति मिली होगी। भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं।"

"मेरे बेटे को धोखे से मारा, अब दोनों को मिले अपने किए की सजा"

सौरभ की मां ने कहा कि जिस बेटे को उन्होंने उंगली पकड़कर बड़ा किया, उसे उसकी ही पत्नी ने अपने आशिक के साथ मिलकर बड़ी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। उन्होंने रुंधे गले से कहा:

  • न्यायपालिका पर भरोसा: उन्होंने अदालत और पुलिस प्रशासन का धन्यवाद करते हुए कहा कि कानून ने साबित कर दिया कि कोई कितना भी शातिर क्यों न हो, सच की ही जीत होती है।

  • फांसी से कम कुछ मंजूर नहीं था: मां ने कहा कि जिस क्रूरता के साथ सौरभ को मारा गया था, उसके लिए फांसी से कम कोई सजा हो ही नहीं सकती थी। अगर दोनों को उम्रकैद होती, तो शायद वे अंदर ही अंदर घुटती रहतीं, लेकिन फांसी की सजा सुनकर लगा कि इंसाफ जिंदा है।

मासूम नातिन को लेकर क्या बोलीं सौरभ की मां?

इस हत्याकांड के बाद सबसे दर्दनाक स्थिति सौरभ और मुस्कान की छोटी बच्ची (नातिन) के सामने आई, जिसके सिर से पिता का साया छिन गया और मां कातिल साबित होकर सलाखों के पीछे पहुंच गई।

नातिन के भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर सौरभ की मां बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने कहा:

  • "अब वही सौरभ की आखिरी निशानी है": मां ने कहा कि उस मासूम का इस पूरे गुनाह में कोई दोष नहीं है। वह अब उनके लिए उनके दिवंगत बेटे सौरभ का ही रूप है।

  • परवरिश की पूरी जिम्मेदारी: उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सांस चलेगी, वे अपनी नातिन को कलेजे से लगाकर रखेंगी और उसे मां और बाप दोनों का प्यार देंगी।

  • सच का सामना: उन्होंने कहा कि जब बच्ची बड़ी होगी, तो वह उसे जरूर बताएंगी कि उसके पिता कितने अच्छे इंसान थे और उसके साथ कितना बड़ा अन्याय हुआ था, लेकिन वे उस बच्ची के भविष्य पर इस काली छाया को नहीं पड़ने देंगी और उसे पढ़ा-लिखाकर एक अच्छा इंसान बनाएंगी।

क्या था पूरा मामला?

गौरतलब है कि यह मामला तब सुर्खियों में आया था जब सौरभ की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। पुलिस की गहन तफ्तीश, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और फॉरेंसिक साक्ष्यों से पर्दा उठा था कि सौरभ की पत्नी मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर अपने ही पति की हत्या की साजिश रची थी।

अदालत ने इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) मामला मानते हुए दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई और स्पष्ट संदेश दिया कि रिश्तों को कलंकित करने वाले ऐसे जघन्य अपराधों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

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