क्या आपको पता है भारत की सबसे पुरानी UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट कौन सी है? इतिहास की इन अनमोल धरोहरों के आगे इटली भी भरता है पानी!

पूरी दुनिया में 1200 से अधिक जगहों को यूनेस्को (UNESCO) ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया है। ये महज कुछ पत्थर या ईंटों की इमारतें नहीं हैं, बल्कि अपने भीतर हजारों साल पुरानी रहस्यमयी कहानियां और गौरवशाली सभ्यताएं समेटे हुए हैं। हेरिटेज साइट्स के मामले में इटली लगभग 58 धरोहरों के साथ दुनिया में सबसे आगे है, लेकिन हमारा भारत भी इस लिस्ट में किसी से कम नहीं है। अपनी बेमिसाल संस्कृति के दम पर भारत 44 विश्व धरोहरों के साथ दुनिया में छठे पायदान पर शान से खड़ा है। अब एक बेहद दिलचस्प सवाल यह उठता है कि भारत की इतनी सारी प्राचीन धरोहरों में से सबसे पुरानी वर्ल्ड हेरिटेज साइट आखिर है कौन सी? आइए, इतिहास के पन्नों में गोता लगाते हैं और जानते हैं भारत की सबसे पुरानी यूनेस्को साइट्स के बारे में।भीमबेटका की गुफाएं: 11 हजार साल पुराना इंसानी बसेराभारत की सबसे प्राचीन यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का ताज मध्य प्रदेश की ‘भीमबेटका की गुफाओं’ के सिर सजता है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से महज 45 किलोमीटर दूर स्थित यह जगह इतिहास का एक जीता-जागता अजूबा है। करीब 10 किलोमीटर के विशाल दायरे में फैली इन 750 से ज्यादा चट्टानी गुफाओं को हजारों साल पुराना माना जाता है। गुफा की दीवारों पर उकेरे गए चित्र इस बात की गवाही देते हैं कि यहां लगभग 11,000 साल पहले इंसानों का बसेरा हुआ करता था। इन दीवारों पर आदिमानव के रहन-सहन, शिकार करने के तरीके और उनके त्योहारों को अद्भुत चित्रकारी के जरिए दर्शाया गया है।धोलावीरा: 5 हजार साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता की नायाब निशानीगुजरात के कच्छ जिले में मौजूद धोलावीरा इतिहास प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। मासर और मानहर नदियों के पास बसा यह शहर लगभग 5,000 साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता) का एक बेहद अहम और विकसित केंद्र था। साल 2021 में यूनेस्को ने इस ऐतिहासिक शहर को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल किया। धोलावीरा अपने समय की बेहतरीन और एडवांस ‘टाउन प्लानिंग’ के साथ-साथ अपने शानदार वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है।सांची स्तूप: सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया बौद्ध धर्म का पवित्र केंद्रमध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक पहाड़ी पर शान से खड़ा ‘सांची स्तूप’ दुनिया के सबसे पुराने और प्रसिद्ध बौद्ध स्मारकों में से एक है। इतिहासकारों की मानें तो इसका निर्माण आज से करीब 2300 साल पहले, तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्य वंश के महान सम्राट अशोक ने करवाया था। भोपाल से लगभग 56 किलोमीटर दूर स्थित सांची स्तूप को भारत की सबसे पुरानी पत्थर की संरचनाओं में गिना जाता है। इसके ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने साल 1989 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया था।अजंता की गुफाएं: 2000 साल पुरानी अद्भुत चित्रकारी का बेजोड़ नमूनामहाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में वाघोरा नदी के मनोरम तट पर स्थित ‘अजंता की गुफाएं’ भारतीय कला का एक ऐसा अजूबा हैं जिसे देखकर दुनिया भर के लोग दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। लगभग 2000 साल पुरानी मानी जाने वाली ये बौद्ध गुफाएं अपनी मंत्रमुग्ध कर देने वाली सुंदर पेंटिंग्स और तराशी गई मूर्तियों के लिए विश्व विख्यात हैं। भारत की इस प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर को साल 1983 में ही यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल कर लिया था।महाबोधि मंदिर: ईंटों से बना प्राचीन मंदिर जहां बुद्ध को मिला था ज्ञानबिहार के गया जिले में स्थित महाबोधि मंदिर का इतिहास सीधा भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ा है। यह वही पवित्र और ऐतिहासिक स्थान है जहां आज से करीब 2500 साल पहले महात्मा बुद्ध को कठोर तपस्या के बाद ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। माना जाता है कि लगभग 300 ईसा पूर्व सम्राट अशोक ने यहां इस मंदिर का निर्माण करवाया था। ईंटों से बने दुनिया के सबसे प्राचीन बौद्ध मंदिरों में शुमार महाबोधि मंदिर आज भी बौद्ध धर्म का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल है। इसके इसी अद्भुत महत्व के चलते साल 2002 में इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था।