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क्या गांठ न होना ब्रेस्ट कैंसर की गारंटी है? कैंसर विशेषज्ञों ने किया बड़ा खुलासा

महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे स्वास्थ्य खतरों में ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) आज के समय में सबसे गंभीर और चिंता का विषय बन चुका है। आमतौर पर जब भी महिलाओं के बीच स्तन कैंसर की बात आती है, तो सबसे पहला ख्याल यही आता है कि छाती या उसके आसपास कोई गांठ (Lump) महसूस होगी तभी यह बीमारी हो सकती है। यही वजह है कि अधिकांश महिलाएं केवल हाथ से छूकर गांठ तलाशने को ही एकमात्र जांच मान बैठती हैं और यदि कोई गांठ महसूस नहीं होती, तो वे खुद को पूरी तरह सुरक्षित मान लेती हैं। देश-विदेश के जाने-माने ऑन्कोलॉजिस्ट और कैंसर विशेषज्ञों ने इस आम धारणा को एक बहुत बड़ा और खतरनाक मिथक करार दिया है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि स्तन में गांठ का न होना इस बात की बिल्कुल भी गारंटी नहीं है कि महिला ब्रेस्ट कैंसर से पूरी तरह सुरक्षित है। कई बार कैंसर बिना किसी शुरुआती गांठ के भी शरीर में चुपचाप पनपने लगता है और इसके लक्षण बेहद अलग रूप में सामने आते हैं। इन शुरुआती संकेतों की जानकारी न होने के कारण अक्सर महिलाएं इसे सामान्य समझकर टाल देती हैं, जो बाद में चलकर जानलेवा साबित हो सकता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि बिना गांठ वाले ब्रेस्ट कैंसर के वे कौन-से छिपे हुए लक्षण हैं जिन्हें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

गांठ न होने पर भी कैसे शरीर में विकसित हो सकता है खतरनाक ब्रेस्ट कैंसर?

चिकित्सकीय विज्ञान के अनुसार, सभी प्रकार के स्तन कैंसर ट्यूमर या गांठ के रूप में शुरू नहीं होते। कुछ खास और आक्रामक प्रकार के ब्रेस्ट कैंसर, जैसे कि इन्फ्लेमेटरी ब्रेस्ट कैंसर (Inflammatory Breast Cancer – IBC) या डक्टल कार्सिनोमा इन सीटू (DCIS) के शुरुआती चरणों में स्तन के अंदर कोई ठोस गांठ महसूस ही नहीं होती। इसके बजाय, ये कैंसर कोशिकाओं के रूप में दूध की नलिकाओं (Milk Ducts) या त्वचा की कोशिकाओं के भीतर फैलते हैं। चूंकि इसमें पारंपरिक तरीके से कोई कड़क गांठ हाथ में नहीं आती, इसलिए महिलाएं और कई बार शुरुआती डॉक्टर भी इसे गलत समझ बैठते हैं। यही कारण है कि इसे समय पर पकड़ना थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है, और जब तक इसके लक्षण साफ तौर पर दिखाई देते हैं, तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। इसीलिए मेडिकल एक्सपर्ट्स बार-बार यह चेतावनी देते हैं कि सिर्फ गांठ की तलाश करना ही कैंसर से बचाव का इकलौता पैमाना नहीं हो सकता।

वे छुपे हुए लक्षण जिन्हें गांठ न होने पर भी महिलाएं कर देती हैं नजरअंदाज

यदि आपके स्तन में कोई गांठ नहीं है, फिर भी आपको अपने शारीरिक बदलावों को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। कैंसर विशेषज्ञों के मुताबिक, बिना गांठ वाले ब्रेस्ट कैंसर के कुछ अन्य शुरुआती और बेहद महत्वपूर्ण लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • त्वचा के टेक्सचर में बदलाव: स्तन की त्वचा यदि अचानक संतरे के छिलके जैसी (Orange Peel Texture) खुरदरी या मोटी दिखने लगे, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।

  • निप्पल का अंदर धंसना: यदि किसी महिला का निप्पल अचानक अंदर की तरफ मुड़ने लगे या उसकी दिशा बदल जाए, तो इसे सामान्य न समझें।

  • त्वचा पर लालिमा या सूजन: बिना किसी चोट या संक्रमण के यदि स्तन की त्वचा लाल पड़ने लगे, उसमें सूजन आ जाए या छूने पर अत्यधिक गर्मी महसूस हो।

  • निप्पल से असामान्य स्राव: यदि स्तनपान कराने के समय के अलावा निप्पल से खून, पीला या भूरे रंग का पानी जैसा तरल पदार्थ अपने आप निकलने लगे।

  • स्तन के आकार या रंग में असमान बदलाव: दोनों स्तनों के आकार में अचानक बहुत बड़ा अंतर आ जाना या त्वचा का रंग बदलने लगना।

समय पर जांच, मैमोग्राफी और सतर्कता से ही संभव है इस बीमारी से बचाव

चूंकि शुरुआती अवस्था में बिना गांठ वाले ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को पहचानना कठिन होता है, इसलिए नियमित स्क्रीनिंग और मेडिकल चेकअप का महत्व बहुत बढ़ जाता है। 40 वर्ष की आयु के बाद हर महिला को अपने डॉक्टर की सलाह से समय-समय पर मैमोग्राफी (Mammography) और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच जरूर करवानी चाहिए। इसके अलावा, घर पर खुद से किए जाने वाले सेल्फ-एग्जामिनेशन के दौरान केवल गांठ ही नहीं, बल्कि त्वचा के बदलावों और निप्पल की स्थिति पर भी पैनी नजर रखनी चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इनमें से कोई भी संदिग्ध लक्षण दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे, तो बिना किसी झिझक के तुरंत किसी अच्छे स्त्री रोग विशेषज्ञ या ऑन्कोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती दौर में पकड़े जाने पर ब्रेस्ट कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव है और मरीज की जान बचाई जा सकती है।

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