उत्तर प्रदेश

Swami Avimukteshwaranand: ‘मेरा उन छात्रों से कोई नाता नहीं…’, यौन शोषण के संगीन आरोपों पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बेबाक पलटवार

प्रयागराज। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने ऊपर लगे यौन शोषण (Sexual Harassment) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के गंभीर आरोपों पर सोमवार को पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठा करार दिया है। शंकराचार्य ने साफ कहा है कि जिन लड़कों ने उन पर ये संगीन आरोप लगाए हैं, वे कभी उनके आश्रम, कैंप या गुरुकुल में आए ही नहीं। हाल ही में प्रयागराज के झूंसी थाने में कोर्ट के आदेश पर उनके और उनके शिष्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसके बाद से संत समाज और आम जनता के बीच हड़कंप मचा हुआ है।’वे लड़के हरदोई के छात्र हैं, मेरा उनसे कोई संबंध नहीं’शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी बेगुनाही का तर्क देते हुए कहा कि इस मामले में जो मार्कशीट (Marksheet) जमा की गई है, उसी से पूरी सच्चाई सामने आ जाती है। दस्तावेजों के अनुसार, आरोप लगाने वाले लड़के हरदोई के एक स्कूल के नियमित छात्र हैं। उन्होंने कड़ा सवाल उठाते हुए कहा, “जब वे लड़के कभी मेरे आश्रम या गुरुकुल में पढ़ने आए ही नहीं और मेरा उनसे दूर-दूर तक कोई जुड़ाव नहीं है, तो उनके साथ गलत काम होने का सवाल ही कहां पैदा होता है?” उन्होंने बार-बार दोहराया कि उन्हें और पीठ को बदनाम करने के लिए ये बेबुनियाद आरोप गढ़े गए हैं।कोर्ट के आदेश पर आधी रात को दर्ज हुई थी FIRआपको बता दें कि यह पूरा मामला एक विशेष अदालत के आदेश के बाद गर्माया है। कोर्ट से सख्त निर्देश मिलने के बाद शनिवार रात करीब 11:30 बजे झूंसी थाने में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके मुख्य शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और कुछ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत औपचारिक रूप से एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से अदालती आदेशों के अनुपालन में की गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि ये कथित घटनाएं 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच की हैं, जिनमें नाबालिगों के साथ यौन अपराध का जिक्र किया गया है।’जनता, अंतरात्मा और भगवान की अदालत से मिल चुकी है क्लीन चिट’पुलिस की जांच और संभावित कार्रवाई के सवाल पर शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि वे कानून का पूरा सम्मान करते हैं और पुलिस जांच में बिना किसी विरोध के हर संभव सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस की हर कार्रवाई पर जनता की सीधी नजर है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने एक बेहद दार्शनिक बात कही। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके लिए दुनिया में सिर्फ तीन तरह की ‘अदालतें’ मायने रखती हैं। पहली ‘निचली अदालत’ जो कि जनता है और वह सब सच देख रही है। दूसरी ‘बीच की अदालत’ जो इंसान की अपनी अंतरात्मा होती है और तीसरी ‘सबसे बड़ी अदालत’ स्वयं भगवान की है। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि उन्हें इन तीनों अदालतों से पहले ही ‘क्लीन चिट’ मिल चुकी है।

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