विदेश

क्या मालदीव होने वाला है दिवालिया? सिर्फ डेढ़ महीने का विदेशी मुद्रा भंडार बचा

मालदीव की आर्थिक स्थिति इस समय बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार गोता लगा रहा है और स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि वहां सिर्फ डेढ़ महीने का ही आयात कवर बचा हुआ है। इस वित्तीय संकट से उबरने के लिए मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू लगातार वैश्विक स्तर पर मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें हर तरफ से झटके मिल रहे हैं। हाल ही में भारत की ओर से भी आर्थिक मोर्चे पर कोई बड़ी राहत न मिलने से मालदीव की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।

आर्थिक बदहाली और तेजी से घटता विदेशी मुद्रा भंडार

मालदीव का विदेशी मुद्रा भंडार खतरनाक स्तर तक नीचे आ चुका है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और रेटिंग एजेंसियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो देश डिफॉल्ट की स्थिति में पहुंच सकता है। देश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन और विदेशी आय पर निर्भर है, लेकिन कर्ज के बढ़ते बोझ और विदेशी मुद्रा की कमी ने हालात को बदतर बना दिया है। श्रीलंका और पाकिस्तान की तरह मालदीव के भी आर्थिक संकट में फंसने की आशंकाओं ने नागरिकों और व्यापारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक मुश्किलें

संकट के इस दौर में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की नीतियां और रणनीतियां भी सवालों के घेरे में हैं। शुरुआत में भारत के साथ कूटनीतिक दूरियां बढ़ाने और चीन के करीब जाने की उनकी नीति ने देश की अर्थव्यवस्था को और ज्यादा जोखिम में डाल दिया। अब जब देश के पास बुनियादी जरूरतें और ईंधन आयात करने के लिए भी पैसे कम पड़ रहे हैं, तब मुइज्जू सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और पारंपरिक साझेदारों से मदद मांग रही है। हालांकि, कूटनीतिक तनाव के चलते अन्य देशों से भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है।

भारत का रुख और रणनीतिक कूटनीति के नए आयाम

एक समय पर मालदीव की हर आपदा में सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाने वाले भारत ने अब बेहद नपे-तुले और कड़े कदम उठाए हैं। कूटनीतिक दूरियों के बीच भारत ने मालदीव को बिना शर्त बड़े वित्तीय पैकेज देने से फिलहाल परहेज किया है। जानकारों का मानना है कि नई दिल्ली का यह रुख मालदीव के नेतृत्व को यह अहसास कराने के लिए है कि क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय सहयोग के लिए आपसी विश्वास कितना जरूरी है। भारत के इस कड़े रुख से मुइज्जू सरकार की परेशानियां और ज्यादा गहरी हो गई हैं।

मालदीव के वित्तीय संकट का भविष्य और वैश्विक प्रभाव

यदि आने वाले कुछ हफ्तों में मालदीव को कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय कर्ज या बेलआउट पैकेज नहीं मिलता है, तो देश के लिए दिवालिया होना टालना लगभग असंभव हो जाएगा। इसका सीधा असर वहां की जनता पर पड़ेगा, जहां खाने-पीने की चीजों और ईंधन के दाम आसमान छू सकते हैं। हिंद महासागर के इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप देश का यह संकट न केवल दक्षिण एशिया की राजनीति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि वैश्विक महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक खींचतान का नया केंद्र भी बनता जा रहा है।

Back to top button