क्या शेयर बाजार निवेशकों को मिलेगी राहत? LTCG टैक्स हटाने पर आया सरकार का बड़ा बयान, संसद में साफ हुई स्थिति

अगर आप भारतीय शेयर बाजार में निवेश करते हैं और आगामी बजट या सरकारी घोषणाओं में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स से राहत या इसे पूरी तरह खत्म किए जाने की उम्मीद लगाए बैठे थे, तो आपके लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने संसद में आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल शेयर बाजार के इक्विटी निवेश पर लागू LTCG टैक्स को हटाने का कोई भी प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है। वित्त मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दिए गए इस लिखित जवाब के बाद उन सभी अटकलों पर विराम लग गया है, जिनमें टैक्स छूट की उम्मीद जताई जा रही थी।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में किया स्पष्ट: अभी टैक्स हटाने का कोई विचार नहीं
लोकसभा में पूछे गए सवाल का लिखित जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि वर्तमान में इक्विटी निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को समाप्त करने की कोई योजना नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार हर साल आम बजट की तैयारी के दौरान और आवश्यकतानुसार टैक्स कानूनों की समीक्षा करती रहती है। इसका मतलब यह है कि भविष्य की आर्थिक स्थितियों के आधार पर बदलाव की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है, लेकिन मौजूदा स्थिति में निवेशकों को LTCG टैक्स से कोई सीधी राहत नहीं मिलने वाली है।
LTCG टैक्स से सरकार की बंपर कमाई: 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटाया राजस्व
정부 (सरकार) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान इक्विटी निवेश से प्राप्त होने वाले LTCG टैक्स के जरिए कुल 2.01 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व हासिल हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि टैक्स कलेक्शन में सालाना आधार पर करीब 79 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एसेसमेंट ईयर (AY) 2025-26 में सरकार ने LTCG के रूप में 1.29 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो कि AY 2024-25 में 72,249 करोड़ रुपये थे। इतने बड़े राजस्व योगदान के कारण सरकार फिलहाल इस टैक्स को हटाने के पक्ष में नहीं है।
रिटेल और FPI दोनों के लिए 12.5% टैक्स दर समान: टैक्स नियमों में कोई भेदभाव नहीं
सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि लिस्टेड इक्विटी शेयरों पर लागू 12.5 प्रतिशत की LTCG टैक्स दर घरेलू रिटेल निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) दोनों के लिए एक समान है। सरकार का कहना है कि कर प्रणाली में दोनों तरह के निवेशकों के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं रखा गया है, ताकि बाजार में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।
विदेशी निवेशकों के लिए G-Secs नियमों में बड़ा बदलाव: 1 अप्रैल 2026 से लागू हुई नई छूट
भले ही इक्विटी पर LTCG टैक्स में कोई बदलाव न हुआ हो, लेकिन सरकार ने विदेशी निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी बॉन्ड (G-Secs) से जुड़े नियमों में राहत दी है। 1 अप्रैल 2026 से लागू नए प्रावधानों के अनुसार, भारत के सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों को ब्याज आय और कैपिटल गेन दोनों पर आयकर से पूरी छूट दी गई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय टैक्स सिस्टम को वैश्विक मानकों के अनुकूल बनाना और दुनिया भर के पेंशन फंड व सॉवरेन वेल्थ फंड को भारतीय बाजार की ओर आकर्षित करना है।