क्या PF की तरह आसान हो गया है NPS से पैसा निकालना? रिटायरमेंट से पहले 25% विड्रॉल का पूरा गणित, नए नियम और एक्सपर्ट्स की राय

रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए देश के सबसे लोकप्रिय निवेश विकल्पों में शामिल नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को लेकर अक्सर यह धारणा रही है कि यह एक बेहद सख्त और लॉक-इन आधारित योजना है, जहां से रिटायरमेंट से पहले पैसा निकालना लगभग नामुमकिन होता है। हालांकि, पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा आंशिक निकासी के नियमों को सरल और डिजिटल बनाए जाने के बाद कई सब्सक्राइबर्स के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब एनपीएस भी ईपीएफ (PF) की तरह लिक्विड और आसान हो गया है?
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही निकासी की प्रक्रिया आसान हुई हो, लेकिन एनपीएस की 25% विड्रॉल व्यवस्था पीएफ से बिल्कुल अलग और सख्त शर्तों से बंधी है। ऐसे में रिटायरमेंट से पहले एनपीएस से निकासी करना कितना समझदारी भरा कदम है और इसका पूरा गणित क्या है, इसे गहराई से समझना हर सब्सक्राइबर के लिए जरूरी है।
25% विड्रॉल का वास्तविक गणित: कुल फंड नहीं, केवल 'स्वयं का अंशदान'
अधिकांश एनपीएस खाताधारकों के बीच सबसे बड़ा भ्रम 25% की गणना को लेकर होता है। कई लोग यह मान बैठते हैं कि उनके प्रान (PRAN) खाते में दिख रहे कुल बैलेंस का 25 प्रतिशत निकाला जा सकता है, जबकि नियम पूरी तरह अलग हैं।
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केवल खुद के मूल योगदान पर गणना: 25 प्रतिशत निकासी की सीमा आपके द्वारा खुद जमा किए गए मूल पैसे (Self-Contribution) पर लागू होती है। इसमें न तो नियोक्ता (Employer) का अंशदान शामिल होता है और न ही पिछले वर्षों में अर्जित हुआ ब्याज/रिटर्न (Returns/Gains)।
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उदाहरण से समझें गणित: मान लीजिए आपके एनपीएस टियर-1 खाते में कुल कॉर्पस ₹20 लाख है। इसमें आपका खुद का योगदान ₹6 लाख है, नियोक्ता का योगदान ₹4 लाख है और शेष ₹10 लाख निवेश पर मिला रिटर्न है।
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पात्र निकासी राशि: आपको कुल ₹20 लाख का 25% (₹5 लाख) नहीं मिलेगा, बल्कि आपके स्वयं के ₹6 लाख के अंशदान का 25% यानी अधिकतम ₹1.50 लाख ही विड्रॉल के लिए उपलब्ध होगा।
एनपीएस से आंशिक निकासी के 4 सबसे कड़े नियम और शर्तें
PFRDA के मास्टर सर्कुलर के अनुसार, एनपीएस टियर-1 खाते से आंशिक निकासी केवल विशेष परिस्थितियों में ही की जा सकती है:
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न्यूनतम 3 वर्ष का लॉक-इन: खाता खुलने की तिथि से कम से कम 3 वर्ष (36 महीने) तक सक्रिय अंशदान पूरा होना अनिवार्य है।
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पूरे सेवाकाल में अधिकतम 3 बार अनुमति: एक सब्सक्राइबर अपने पूरे एनपीएस कार्यकाल (60 वर्ष की आयु तक) के दौरान अधिकतम 3 बार ही आंशिक निकासी कर सकता है।
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दो निकासी के बीच अंतराल: पिछली निकासी और नई निकासी के बीच अंशदान का नया संचय होना जरूरी है।
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100% टैक्स फ्री विड्रॉल: आयकर अधिनियम की धारा 10(12B) के तहत एनपीएस से की गई 25% तक की वैध आंशिक निकासी पूरी तरह से कर-मुक्त (Tax-Free) होती है।
किन विशेष कारणों के लिए ही मिल सकता है विड्रॉल?
एनपीएस फंड को बेवजह खर्च होने से बचाने के लिए नियामक ने निकासी के सीमित और अनिवार्य उद्देश्य तय किए हैं:
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बच्चों की उच्च शिक्षा: कानूनी रूप से गोद लिए गए या जैविक बच्चों की हायर एजुकेशन (डिग्री/डिप्लोमा) के खर्च के लिए।
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बच्चों का विवाह: बेटे या बेटी के विवाह से जुड़े खर्चों को पूरा करने हेतु।
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आवासीय मकान या फ्लैट की खरीद/निर्माण: अपने नाम पर या जीवनसाथी के साथ संयुक्त नाम पर पहला घर खरीदने के लिए (यदि पहले से कोई पुश्तैनी घर के अलावा स्वतंत्र मकान नहीं है)।
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गंभीर और जानलेवा बीमारियां: कैंसर, किडनी फेलियर, हार्ट सर्जरी, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, स्ट्रोक और कोविड-19 जैसी अधिसूचित गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए (स्वयं, पति/पत्नी, बच्चों या आश्रित माता-पिता हेतु)।
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स्किल डेवलपमेंट और री-स्किलिंग: करियर अपग्रेडेशन के लिए मान्यता प्राप्त संस्थानों से पेशेवर कोर्स की फीस भरने के लिए।
PF बनाम NPS: क्या दोनों की निकासी एक जैसी है?
भले ही दोनों सेवानिवृत्ति योजनाएं हैं, लेकिन निकासी के मामले में पीएफ कहीं अधिक लचीला है:
| पैमाना | ईपीएफ (EPF / PF) | एनपीएस (NPS Tier-1) |
| निकासी आधार | कर्मचारी + कंपनी अंशदान + ब्याज | केवल स्वयं का मूल अंशदान (Self-Contribution) |
| निकासी सीमा | विभिन्न कारणों पर 50% से 90% तक | स्वयं के अंशदान का अधिकतम 25% |
| अवधि सीमा | जरूरत के आधार पर कई बार संभव | पूरे कार्यकाल में अधिकतम 3 बार |
| बेरोजगारी निकासी | नौकरी छूटने पर 1-2 महीने बाद 75-100% | केवल समयपूर्व एग्जिट नियम (80% एन्युइटी अनिवार्य) |
रिटायरमेंट से पहले NPS से निकासी: एक्सपर्ट्स की चेतावनी
वित्तीय योजनाकारों (Financial Planners) का स्पष्ट मानना है कि एनपीएस एक लंबी अवधि का कंपाउंडिंग वेल्थ इंजन है। इक्विटी और डेट के संयोजन से बना यह फंड 60 की उम्र के बाद आपकी पेंशन और एकमुश्त फंड का मुख्य आधार होता है।
यदि आप 30 या 40 की उम्र में एनपीएस से ₹2-3 लाख निकालते हैं, तो आप केवल मूलधन नहीं गंवाते, बल्कि अगले 15-20 वर्षों में उस पैसे पर मिलने वाले 10 से 12 प्रतिशत चक्रवृद्धि रिटर्न (Compounding Growth) का भी बड़ा नुकसान उठाते हैं, जिससे रिटायरमेंट पर मिलने वाला अंतिम कॉर्पस कई लाख रुपये तक घट सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि जब तक मेडिकल इमरजेंसी जैसी कोई अपरिहार्य स्थिति न आए, तब तक एनपीएस फंड को बिल्कुल न छुएं और बच्चों की शादी या शिक्षा के लिए अलग से म्यूचुअल फंड एसआईपी (SIP) या आपातकालीन फंड का सहारा लें।