ईरान ने उड़ाया ट्रंप का मजाक, मुंगेरीलाल के हसीन सपने बताकर अमेरिका को दिया जवाब

News India Live, Digital Desk: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा ‘जुबानी जंग’ अब एक नए और तीखे मोड़ पर पहुँच गया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर किए गए दावों और समझौते की शर्तों पर तेहरान ने कड़ा पलटवार किया है। ईरान के सरकारी मीडिया और सैन्य प्रवक्ताओं ने ट्रंप के बयानों को ‘खयाली पुलाव’ करार देते हुए कहा है कि जो देश खुद रणनीतिक विफलता का सामना कर रहा है, वह विजेता की तरह शर्तें नहीं थोप सकता। ईरान ने दोटूक कहा, “मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखना बंद करें ट्रंप, हारे हुए लोग फैसले नहीं सुनाते।”ईरान का तंज: ‘खुद से ही बातचीत कर रहे हैं ट्रंप’ईरान के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोलफाघरी ने सरकारी टेलीविजन पर एक वीडियो जारी कर ट्रंप के ‘सफल वार्ता’ वाले दावों की धज्जियाँ उड़ा दीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “क्या अमेरिका में आंतरिक कलह इस हद तक बढ़ गई है कि वे अब खुद से ही बातचीत कर रहे हैं?” ईरान ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन जिस 15-सूत्रीय शांति योजना की बात कर रहा है, उसे तेहरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान का मानना है कि ट्रंप अपनी घरेलू राजनीति चमकाने के लिए अपनी हार को ‘समझौते’ का रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।’होरमुज’ और ‘फ्री ऑयल’ पर छिड़ा विवादविवाद की मुख्य जड़ ट्रंप का वह बयान है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि ईरान होरमुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) खोलने और अमेरिका को ‘फ्री ऑयल’ देने के करीब है। इस पर ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB ने एक मशहूर फारसी कहावत का इस्तेमाल करते हुए ट्रंप का मजाक उड़ाया— “ऊंट कपास के बीज के सपने देखता है; कभी उसे गटकता है, तो कभी एक-एक दाना चुनता है।” ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी घेराबंदी और प्रतिबंध नहीं हटाता, तब तक समुद्री रास्तों पर लगा गतिरोध खत्म नहीं होगा।ट्रंप का दावा: ‘ईरानी नौसेना अब इतिहास है’दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप अपने रुख पर अड़े हुए हैं। उन्होंने लास वेगास रवाना होने से पहले संवाददाताओं से कहा कि ईरानी नौसेना के 150 से अधिक जहाज समुद्र के तल में समा चुके हैं और ईरान के पास अब लड़ने की ताकत नहीं बची है। ट्रंप ने दावा किया कि बहुत जल्द अमेरिका की ‘पूर्ण विजय’ होगी और ईरान को उनकी शर्तों पर झुकना ही पड़ेगा। हालांकि, जमीनी हकीकत और ईरान की आक्रामकता ट्रंप के इन दावों पर सवालिया निशान लगा रही है।क्या फिर भड़केगी युद्ध की चिंगारी?2026 में शुरू हुआ यह संघर्ष अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन चुका है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई पिछली वार्ताएं विफल रहने के बाद, दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई और गहरी हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रंप प्रशासन ने अपनी शर्तें नरम नहीं कीं और ईरान ने अपना अड़ियल रुख नहीं छोड़ा, तो होरमुज की खाड़ी में जारी यह तनाव एक बड़े वैश्विक युद्ध में बदल सकता है। फिलहाल, दोनों पक्ष एक-दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।