क्रेड में मेटा का ₹8,550 करोड़ का महा-निवेश; कुणाल शाह ने छोड़ी कमान, बिना डेटा एक्सेस के जुकरबर्ग ने क्यों लगाया इतना बड़ा दांव?

भारतीय फिनटेक (Fintech) जगत से इस समय की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बिजनेस खबर सामने आ रही है। दुनिया की दिग्गज सोशल मीडिया कंपनी मेटा (Meta) भारतीय डिजिटल पेमेंट बाजार में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। मार्क जुकरबर्ग के नेतृत्व वाली यह पैरेंट कंपनी (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप) भारत के सबसे प्रतिष्ठित क्रेडिट कार्ड पेमेंट प्लेटफॉर्म 'क्रेड' (CRED) में ₹8,550 करोड़ (करीब 900 मिलियन डॉलर) का भारी-भरकम निवेश कर रही है। इस मेगा कॉर्पोरेट डील के तहत मेटा को क्रेड में पूरे 20 फीसदी की बड़ी हिस्सेदारी हासिल होगी।
लेकिन, इस अरबों रुपये के हाई-प्रोफाइल सौदे की सबसे हैरान और आकर्षित करने वाली बात यह है कि इतना भारी फंड लगाने के बावजूद मेटा को क्रेड के करोड़ों ग्राहकों का कोई भी निजी या वित्तीय डेटा हासिल नहीं होगा। क्रेड ने अपने ग्राहकों के भरोसे और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए डेटा एक्सेस पर पूरी तरह से ‘नो एंट्री’ का बोर्ड लगा दिया है। इसके साथ ही, कंपनी के भीतर लीडरशिप स्तर पर भी एक बड़ा युग परिवर्तन होने जा रहा है, जहां कंपनी के चर्चित फाउंडर कुणाल शाह अब दैनिक कामकाज से किनारा कर रहे हैं।
आखिर बिना डेटा मिले ही मेटा ने क्यों बहाया ₹8,550 करोड़ का कैश?
क्रेड के पास इस समय देश के करीब 1.7 करोड़ सबसे प्रीमियम और अमीर क्रेडिट कार्ड यूजर्स का मेंबरशिप बेस है। ये वे चुनिंदा लोग हैं जिनका सिबिल (CIBIL) स्कोर बेहतरीन है और जो इस प्लेटफॉर्म पर अपने क्रेडिट कार्ड बिल, बैंकिंग लेनदेन और पर्सनल खर्चों से जुड़ी बेहद संवेदनशील और गुप्त वित्तीय जानकारी साझा करते हैं। चूंकि मेटा मुख्य रूप से ऑनलाइन विज्ञापनों पर निर्भर रहने वाली कंपनी है, जिसकी नजर हमेशा यूजर डेटा और उनके बिहेवियर पर रहती है, ऐसे में क्रेड ने मेटा को इस डेटाबेस से दूर रखकर एक बहुत ही सधा हुआ और मास्टर स्ट्रोक कदम उठाया है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद प्रीमियम ग्राहकों का डेटा हैकर्स या किसी अन्य विज्ञापन कंपनी के हाथों में जाने से पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। साथ ही, क्रेड भारत के सख्त डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कड़े वित्तीय नियमों के दायरे में कानूनी रूप से पूरी तरह से सेफ रहेगी।
कुणाल शाह की विदाई; मितन संपत बने क्रेड के नए बॉस
इस मेगा इन्वेस्टमेंट के साथ ही क्रेड के भीतर एक नए प्रशासनिक अध्याय की शुरुआत हो रही है। कंपनी को जीरो से इस मुकाम तक पहुंचाने वाले मशहूर उद्यमी और फाउंडर कुणाल शाह करीब आठ साल तक कमान संभालने के बाद अब कंपनी के रोजमर्रा के ऑपरेशंस (Daily Operations) से खुद को पूरी तरह अलग कर रहे हैं।
अब उनकी जगह मितन संपत को कंपनी के अंतरिम सीईओ (Interim CEO) की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। मितन संपत क्रेड के लिए कोई नया चेहरा नहीं हैं, वे साल 2020 से ही क्रेड के भीतर मुख्य रणनीतिक और फाइनेंस (वित्तीय) विभाग का पूरा कामकाज संभाल रहे हैं। अब उनके कंधों पर कंपनी को लगातार मुनाफे में बनाए रखने और भविष्य में क्रेड को शेयर बाजार में धमाकेदार आईपीओ (IPO) तक ले जाने की भारी जिम्मेदारी होगी।
व्हाट्सएप के जरिए खुलेगा क्रेड की तरक्की का नया रास्ता
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर मेटा को डेटा ही नहीं मिलेगा, तो इस बड़ी पार्टनरशिप से क्रेड को क्या हासिल होने वाला है? दरअसल, क्रेड को इस डील के बदले मेटा के पास मौजूद 'व्हाट्सएप' (WhatsApp) के करोड़ों एक्टिव यूजर्स का सीधा और एक्सक्लूसिव सपोर्ट मिलने जा रहा है। भविष्य में ग्राहकों की निजता और प्राइवेसी को 100% सुरक्षित रखते हुए, व्हाट्सएप चैट के भीतर ही सीधे क्रेडिट कार्ड पेमेंट रिमाइंडर, वन-क्लिक बिल पेमेंट और कैशबैक जैसी एडवांस्ड वित्तीय सेवाएं शुरू की जा सकती हैं।
क्रेड के लिए यह समय आर्थिक और कमाई के मोर्चे पर भी काफी शानदार चल रहा है। फिलहाल कंपनी की सालाना कमाई (Annual Revenue) ₹3,200 करोड़ के पार पहुंच गई है और हाल ही में कंपनी ने अपने इतिहास की पहली प्रॉफिटेबल (मुनाफे वाली) तिमाही भी दर्ज की है। इस डील से मिलने वाले ₹8,550 करोड़ के ताज़ा फंड का इस्तेमाल क्रेड अपने पर्सनल लोन और मर्चेंट लोन कारोबार को देश के कोने-कोने में तेजी से बढ़ाने के लिए करेगी। कंपनी पहले से ही ₹24,000 करोड़ के विशाल एसेट को मैनेज (AUM) कर रही है, और अब उसकी नजर इंश्योरेंस (बीमा) तथा वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर में बड़ा मुकाम हासिल करने पर टिकी है।