विदेश

क्वाड से अमेरिका की दूरी के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया ‘JAI’ का जोरदार ऐलान

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के भू-राजनीतिक समीकरणों में इस समय एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। वैश्विक मंचों पर जब यह चर्चाएं जोर पकड़ने लगीं कि अमेरिका की बदलती रणनीतिक प्राथमिकताओं और घरेलू राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण 'क्वाड' (Quad) गठबंधन के तेवर कुछ ठंडे पड़ रहे हैं और वाशिंगटन इससे थोड़ा किनारा कर रहा है, ठीक उसी वक्त भारत ने एक मास्टरस्ट्रोक चल दिया है। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM-Plus) के इतर एक नया कूटनीतिक दांव चलते हुए 'JAI' यानी जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत (Japan, Australia, India) के नए त्रिपक्षीय रणनीतिक गठबंधन का जोरदार ऐलान कर दिया है। इस कदम के जरिए भारत ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि एशिया प्रशांत और हिंद महासागर की सुरक्षा अब केवल किसी एक महाशक्ति के भरोसे नहीं छोड़ी जाएगी, बल्कि क्षेत्रीय देश मिलकर ड्रैगन यानी चीन की हर हरकत का माकूल जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

आसियान मंच से राजनाथ सिंह का बड़ा कूटनीतिक संदेश और 'JAI' का शंखनाद

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी हालिया विदेश यात्रा और उच्च-स्तरीय बैठकों के दौरान जापान और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा प्रमुखों के साथ मंच साझा करते हुए त्रिपक्षीय सहयोग को एक नई दिशा दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जापान और ऑस्ट्रेलिया के मंत्रियों के साथ हाथ में हाथ डाले अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में 'JAI' (जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत) का नारा बुलंद किया। भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक सामान्य कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत उठाया गया कदम है। जब वैश्विक स्तर पर यह कयास लगाए जा रहे थे कि अमेरिकी नेतृत्व में ढील आने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा ढांचा कमजोर हो सकता है, तब भारत ने आगे बढ़कर यह दिखा दिया कि क्षेत्रीय देश अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह सक्षम और एकजुट हैं।

ड्रैगन की बढ़ती आक्रामकता और फिलीपींस-जापान के पास चीन की हरकतों का जवाब

दक्षिण चीन सागर से लेकर पूर्वी चीन सागर तक चीन लगातार अपने पड़ोसियों—विशेषकर फिलीपींस, जापान और वियतनाम—पर धौंस जमाने और उनकी समुद्री सीमाओं का उल्लंघन करने की कोशिश करता रहा है। चीनी युद्धपोतों की पैंतरेबाज़ी और कृत्रिम द्वीपों पर सैन्यीकरण ने पूरे क्षेत्र की शांति को खतरे में डाल दिया है। ऐसे समय में जब ड्रैगन अपनी विस्तारवादी नीतियों के जरिए एशियाई देशों को डराने की जुगत में लगा है, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया का यह 'JAI' संयोजन बीजिंग के लिए एक बहुत बड़ा सिरदर्द बन गया है। इन तीनों देशों के बीच नौसैनिक अभ्यासों का दायरा लगातार बढ़ रहा है, और अब तो जापान द्वारा भारतीय परीक्षण रेंज में अपनी मिसाइलों और ड्रोन के प्रशिक्षण की तैयारियों पर भी बात चल रही है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत अपने मित्र देशों के साथ मिलकर रक्षा उत्पादन और सैन्य तैयारियों को एक नए स्तर पर ले जा रहा है।

क्वाड के विकल्प के रूप में क्यों अहम माना जा रहा है JAI का यह नया त्रिकोण

यह सवाल लगातार अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उठ रहा था कि यदि किसी वजह से अमेरिका का ध्यान पश्चिमी एशिया या यूरोपीय संघर्षों की वजह से इंडो-पैसिफिक से भटकता है, तो एशिया के लोकतांत्रिक देशों का क्या होगा। 'JAI' का यह मॉडल उसी का एक ठोस और व्यावहारिक जवाब है। भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया तीनों ही देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र के ऐसे प्रमुख स्तंभ हैं जिनकी अर्थव्यवस्थाएं और समुद्री मार्ग पूरी तरह से स्वतंत्र नेविगेशन और निर्बाध व्यापार पर निर्भर हैं। चीन की ओर से जब भी इस समुद्री व्यापार मार्ग (Sea Lanes of Communication) को बाधित करने का प्रयास किया जाता है, तो ये तीनों देश मिलकर एक मजबूत अवरोधक शक्ति के रूप में उभरते हैं। इस त्रिपक्षीय सहयोग के मजबूत होने से न केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज होगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर संयुक्त सैन्य मोर्चेबंदी भी आसानी से की जा सकेगी।

भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और क्षेत्रीय सहयोग का नया अध्याय

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दौरान भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के दूसरे चरण का जिक्र करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि अब भारत केवल हथियारों का आयातक नहीं रहा, बल्कि मित्र देशों के साथ मिलकर अत्याधुनिक रक्षा तकनीक साझा करने वाला एक प्रमुख देश बन चुका है। 'JAI' के जरिए भारत ने ग्लोबल साउथ और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों को यह भरोसा दिलाया है कि वह इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और कानून के शासन (Rule of Law) को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। चीन के लिए यह एक कड़ा संदेश है कि वह भारत की सीमाओं या उसके समुद्री प्रभाव क्षेत्र में मनमानी करने से पहले हजार बार सोचे, क्योंकि अब भारत अकेले नहीं बल्कि अपने भरोसेमंद और मजबूत सहयोगियों के साथ एक साझा सुरक्षा चक्र तैयार कर चुका है।

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