गर्लफ्रेंड पर उड़ा दिए ₹3.5 करोड़! ब्रेकअप के बाद पाई-पाई वसूलने कोर्ट पहुंचा भारतीय मूल का CEO, जज ने लगाई ऐसी क्लास कि सिर पकड़ लेंगे आप

प्यार में तोहफे देना और एक-दूसरे पर दिल खोलकर खर्च करना आम बात है, लेकिन जब मोहब्बत की जगह नफरत ले ले और ब्रेकअप हो जाए, तो क्या उन तोहफों की वसूली कोर्ट के जरिए की जा सकती है? ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला और अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां एक बहुराष्ट्रीय टेक कंपनी के भारतीय मूल के सीईओ (CEO) ने अपनी पूर्व प्रेमिका से ब्रेकअप के बाद रिश्ते के दौरान खर्च किए गए करीब 3.5 करोड़ रुपये ($420,000 से अधिक) वापस पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा दिया। हालांकि, अदालत ने पैसे वापस दिलाने के बजाय प्रेमी उद्योगपति की ऐसी खिंचाई की और ऐसी चुटीली टिप्पणी की, जो अब सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में तेजी से वायरल हो रही है।
लग्जरी कार, डिजाइनर बैग और बिजनेस क्लास ट्रिप्स: 3.5 करोड़ का लंबा-चौड़ा बिल
अदालत में दाखिल किए गए मुकदमे के अनुसार, दोनों का प्रेम संबंध करीब दो साल तक चला। इस दौरान सीईओ महोदय ने अपनी पार्टनर को खुश रखने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया। जब दोनों के बीच अनबन हुई और रिश्ता टूट गया, तो सीईओ ने बाकायदा एक्सेल शीट बनाकर खर्च का एक-एक बिल कोर्ट में पेश कर दिया।
सीईओ द्वारा वसूली के लिए मांगी गई मुख्य संपत्तियों में शामिल थीं:
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मर्सिडीज और पोर्श जैसी लग्जरी कारें: प्रेमिका को गिफ्ट की गई महंगी गाड़ियां।
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हर्मेस और चैनल के डिजाइनर हैंडबैग्स: लाखों रुपये मूल्य के लग्जरी हैंडबैग और कपड़े।
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विदेशी छुट्टियां: यूरोप और मालदीव की फाइव-स्टार वेकेशंस, प्राइवेट याट पार्टीज और बिजनेस क्लास फ्लाइट्स के टिकट।
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क्रेडिट कार्ड बिल और कैश ट्रांसफर: प्रेमिका के निजी खर्चों के लिए दिए गए डायरेक्ट फंड्स।
सीईओ की दलील थी कि ये सारे पैसे 'विवाह की शर्त' पर खर्च किए गए थे और एक प्रकार का 'सशर्त निवेश' (Conditional Gift) थे। उनका आरोप था कि महिला ने शादी का झूठा वादा करके उनसे ये सारे वित्तीय लाभ हासिल किए और बाद में धोखा देकर ब्रेकअप कर लिया।
'प्यार कोई वेंचर कैपिटल फंडिंग नहीं है': जज की मजेदार और दो टूक टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान जज ने जब खर्चों की सूची और सीईओ की दलीलों को देखा, तो उन्होंने वादी (CEO) को आड़े हाथों लिया। जज ने सख्त लहजे में लेकिन बेहद हास्यपूर्ण अंदाज में कहा:
"अदालतें टूटे दिलों के ऑडिट या रोमांस के पोस्ट-मॉर्टम के लिए नहीं बनी हैं। जब आप किसी रिश्ते में होते हैं, तो तोहफे स्वेच्छा से, बिना किसी लिखित अनुबंध के दिए जाते हैं। प्यार कोई कॉर्पोरेट कॉन्ट्रैक्ट या वेंचर कैपिटल फंडिंग नहीं है कि जब स्टार्टअप (रिश्ता) फेल हो जाए, तो आप अपना रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) मांगने कोर्ट चले आएं!"
जज ने आगे स्पष्ट किया कि यदि कोई वयस्क व्यक्ति अपनी मर्जी से किसी साथी पर पैसे खर्च करता है और उस समय कोई लोन एग्रीमेंट या स्पष्ट कानूनी शर्त तय नहीं थी, तो कानून उसे 'अनकंडीशनल गिफ्ट' (Unconditional Gift) यानी बिना शर्त दिया गया उपहार मानता है। ब्रेकअप हो जाने मात्र से कोई तोहफा 'कर्ज' में तब्दील नहीं हो जाता।
अदालत ने ठोका भारी हर्जाना, खारिज की याचिका
अदालत ने केवल सीईओ की याचिका को खारिज ही नहीं किया, बल्कि न्यायिक समय की बर्बादी और अदालत को निजी बदले की भावना का अखाड़ा बनाने के लिए फटकार भी लगाई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि:
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महिला को उपहार में मिली कोई भी चीज लौटाने की जरूरत नहीं है।
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सीईओ को अपनी पूर्व गर्लफ्रेंड का पूरा कानूनी खर्च (Legal Fees) चुकाना होगा।
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वादी पर अदालत का समय जाया करने के लिए जुर्माना भी लगाया गया।
सोशल मीडिया पर चर्चा: प्यार में 'टर्म्स एंड कंडीशंस' नहीं चलतीं
यह अनोखा फैसला सामने आते ही इंटरनेट पर मीम्स और प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कई लोग इसे मॉडर्न डेटिंग और कॉर्पोरेट सोच के टकराव का उदाहरण बता रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि किसी भी व्यक्तिगत रिश्ते में दिए गए महंगे उपहार कानूनी रूप से उपहार ही माने जाते हैं, जब तक कि धोखाधड़ी या जबरन वसूली के पुख्ता आपराधिक सबूत मौजूद न हों। प्यार में दिल टूटने की भरपाई सिविल कोर्ट से नहीं हो सकती।