ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर आज सुप्रीम फैसला! इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने जा रही है सबसे बड़ी सुनवाई

उत्तर प्रदेश की ग्रामीण राजनीति और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर इस वक्त की एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। यूपी पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम प्रधानों के कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में प्रशासकों (Administrators) की नियुक्ति किए जाने के फैसले को लेकर एक बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। इस सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज देश की सबसे बड़ी अदालतों में से एक, इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई पर न केवल सरकार बल्कि राज्य के लाखों वर्तमान और पूर्व ग्राम प्रधानों की पैनी नजरें टिकी हुई हैं।
आखिर क्यों सरकार के इस फैसले के खिलाफ लामबंद हुए यूपी के ग्राम प्रधान पूरे मामले की जड़ में उत्तर प्रदेश सरकार का वह आदेश है, जिसके तहत पंचायत चुनाव में हो रही देरी को देखते हुए गांवों का पूरा कार्यभार और वित्तीय अधिकार सरकारी अधिकारियों यानी प्रशासकों को सौंपने की बात कही गई थी। इस फैसले के आते ही पूरे सूबे के ग्राम प्रधानों और उनके संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि लोकतंत्र की सबसे छोटी और मजबूत कड़ी ग्राम पंचायतें होती हैं, और चुनी हुई सरकार की जगह नौकरशाहों को गांवों की कमान सौंपना पूरी तरह से लोकतांत्रिक मूल्यों और पंचायती राज अधिनियम के खिलाफ है। इसी दलील के साथ प्रधानों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ के सामने आज सरकार को देना होगा अपना कड़ा जवाब रिपोर्टर को मिली इनसाइड जानकारी के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ आज इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई करेगी। कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के वकील जहां सरकार के इस कदम को असंवैधानिक साबित करने की कोशिश करेंगे, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश शासन की ओर से सरकारी वकील इस फैसले के पीछे प्रशासनिक मजबूरियों और चुनावों में हो रही देरी का हवाला देकर इसका बचाव करेंगे। कानूनी जानकारों का मानना है कि आज की सुनवाई के दौरान अदालत कोई बड़ा और अंतरिम आदेश जारी कर सकती है, जो यूपी की ग्रामीण सरकार के भविष्य की दिशा तय करेगा।
जानिए आज होने वाले अदालती फैसले का क्या पड़ेगा जमीनी असर अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट आज ग्राम प्रधानों के पक्ष में कोई फैसला सुनाता है या प्रशासकों की नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगाता है, तो यह यूपी सरकार के लिए एक बड़ा कानूनी झटका साबित हो सकता है। ऐसे में चुनाव होने तक पुराने प्रधानों को ही कार्यवाहक के रूप में काम करने का मौका मिल सकता है, जिससे गांवों के विकास कार्यों की रफ्तार नहीं रुकेगी। इसके विपरीत, यदि अदालत सरकार के फैसले को सही ठहराती है, तो उत्तर प्रदेश के सभी गांवों में पूरी तरह से प्रशासनिक राज लागू हो जाएगा। इस बड़े अदालती फैसले का सीधा असर आगामी पंचायत चुनावों की तारीखों और उत्तर प्रदेश की जमीनी सियासत पर पड़ना तय माना जा रहा है।