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चांदी आयात में 80% से ज्यादा की भारी गिरावट: लाइसेंसिंग नियमों और नए टैरिफ के कारण थमी शिपमेंट, जानें घरेलू बाजार पर असर

भारतीय बुलियन और कमोडिटी बाजार से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। देश में चांदी (Silver) के आयात में 80 प्रतिशत से भी ज्यादा की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। सरकार द्वारा आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ाने और महानिदेशालय विदेश व्यापार (DGFT) द्वारा चांदी को 'फ्री' श्रेणी से हटाकर 'प्रतिबंधित' (Restricted Category) में डालने के कारण विदेशों से आने वाली शिपमेंट्स बंदरगाहों पर थम गई हैं। इस अप्रत्याशित फैसले का सीधा असर देश के सर्राफा बाजार, ज्वेलर्स और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर पड़ रहा है। आइए एक बिजनेस रिपोर्टर के नजरिए से इस पूरे मामले और इसके आर्थिक कारणों को समझते हैं।

आखिर सरकार को क्यों उठाने पड़े इतने सख्त कदम?

दरअसल, बीते वित्त वर्ष (FY 2025-26) के दौरान भारत का चांदी आयात 150% बढ़कर रिकॉर्ड 12 अरब डॉलर (लगभग 1 लाख करोड़ रुपये) के पार पहुंच गया था। इससे देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर भारी दबाव पड़ रहा था।

साथ ही, यूएई (UAE) के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत मिलने वाले टैरिफ फायदे का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर चांदी भारत लाई जा रही थी। इस मनमाने आयात को रोकने और घरेलू बाजार को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत प्रभाव से इम्पोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया और बिना सरकारी लाइसेंस (Import License) के चांदी लाने पर रोक लगा दी।

शिपमेंट अटकीं, बाजार में चांदी की बढ़ी किल्लत और प्रीमियम

लाइसेंसिंग प्रक्रिया अनिवार्य होने के कारण यूएई, ब्रिटेन और चीन जैसे देशों से आने वाली चांदी की बड़ी-बड़ी खेप पोर्ट्स पर फंसी हुई हैं। DGFT से परमिशन मिलने में देरी होने से सप्लाई चैन बुरी तरह प्रभावित हुई है:

  • सप्लाई में भारी कमी: मई महीने में चांदी का आयात घटकर महज कुछ मिलियन डॉलर रह गया है, जो बीते सालों में सबसे निचला स्तर है।

  • लोकल मार्केट पर असर: देश में 80% से अधिक चांदी की खपत आयात पर निर्भर है। सप्लाई रुकने से घरेलू बाजार में चांदी पर प्रीमियम बढ़ गया है।

  • इंडस्ट्री की चिंता: सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक स्विच और ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए कच्चे माल की उपलब्धता में देरी हो रही है।

आगे क्या होगा? जानिए सर्राफा बाजार का रुख

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक DGFT द्वारा बैंकों और अधिकृत ट्रेडर्स को नए लाइसेंस जारी करने की रफ्तार तेज नहीं होती, तब तक आयात में यह सुस्ती बनी रहेगी। केवल 100% एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स (EOUs) और SEZ यूनिट्स को ही बिना लाइसेंस के सीमित शर्तों के साथ छूट मिली है। आने वाले त्योहारी सीजन से पहले अगर सप्लाई नॉर्मल नहीं होती है, तो भारतीय बाजार में चांदी की कीमतें और ज्यादा रिकॉर्ड ऊंचाई छू सकती हैं।

 

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