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चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट! एक किलोग्राम चांदी लुढ़क कर 2.36 लाख रुपये पर आई, जानिए आपके शहर में क्या है ताजा भाव

भारतीय सर्राफा बाजार में एक बार फिर कीमती धातुओं की चाल में बदलाव देखने को मिला है। निवेश और आभूषणों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाने वाली चांदी के दाम में गुरुवार को कमजोरी दर्ज की गई है। कल शाम जहां बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी और चांदी बढ़त के साथ बंद हुई थी, वहीं आज इसमें मुनाफावसूली और वैश्विक कारकों के चलते नरमी आई है। यदि आप भी चांदी के गहने खरीदने का मन बना रहे हैं या इसमें निवेश करने की योजना पर काम कर रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आज देश के प्रमुख बाजारों में चांदी किस भाव पर बिक रही है।

प्रमुख शहरों में चांदी के ताजा दाम और गिरावट का हाल

गुरुवार को कारोबार के दौरान देश भर के सर्राफा बाजारों में चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बुलियन मार्केट में एक किलोग्राम चांदी का रेट घटकर 2,36,100 रुपये पर आ गया, जिसमें 1,918 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। इसके आधार पर 100 ग्राम चांदी का भाव 23,600 रुपये और 10 ग्राम चांदी का दाम 2,360 रुपये पर रहा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चांदी का भाव थोड़ा ऊपर यानी 2,38,300 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जहां कीमतों में 1,580 रुपये की नरमी आई। वहीं, बिहार की राजधानी पटना में चांदी का भाव 2,36,100 रुपये रहा और यहाँ सिल्वर में 1,909 रुपये की गिरावट आई। इसके अलावा राजस्थान के जयपुर में चांदी 1,865 रुपये सस्ती होकर 2,36,100 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती नजर आई, जबकि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक किलोग्राम चांदी का भाव 1,933 रुपये की गिरावट के साथ 2,36,362 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।

चांदी की कीमतों में अचानक क्यों आई गिरावट?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी के दामों में आई इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। पहला कारण वैश्विक मोर्चे पर तनाव में आई थोड़ी कमी है, जिसके कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की लिवाली थोड़ी धीमी कर देते हैं और इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है। दूसरा और सबसे बड़ा कारण ऊंचे स्तरों पर निवेशकों द्वारा की जाने वाली मुनाफावसूली है; जब कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो लोग मुनाफा कमाने के लिए बिकवाली शुरू कर देते हैं जिससे दाम नीचे आ जाते हैं। तीसरा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती, आयात शुल्क और औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर सेक्टर) से मिलने वाली मांग में उतार-चढ़ाव है, जो अंतरराष्ट्रीय संकेतों के जरिए भारतीय सर्राफा बाजार की दिशा तय करते हैं।

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