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चिलचिलाती गर्मी में पेट की सेहत और शरीर को तुरंत ठंडक देने के लिए दोनों में से किसका पलड़ा है भारी, डॉक्टर से जानिए सही जवाब

उत्तर भारत समेत देश के कई राज्यों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी और लू का कहर लगातार जारी है। इस तपते मौसम में शरीर को अंदर से ठंडा रखने और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से बचने के लिए लोग तरह-तरह के देसी ड्रिंक्स और समर पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं। जब बात शरीर को हाइड्रेट रखने और पेट को तुरंत आराम पहुंचाने की आती है, तो हमारे सामने दो सबसे लोकप्रिय और पारंपरिक विकल्प होते हैं— पहला पंजाब की शान कही जाने वाली गाढ़ी मलाईदार 'लस्सी' और दूसरा तटीय इलाकों का प्राकृतिक अमृत यानी 'निवारणकारी नारियल पानी'। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेट की सेहत, वजन घटाने और तुरंत एनर्जी पाने के लिहाज से इन दोनों में से किसका पलड़ा ज्यादा भारी है? आइए हेल्थ एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों के नजरिए से जानते हैं इन दोनों समर ड्रिंक्स की पूरी सच्चाई।

पेट के लिए प्रोबायोटिक्स का खजाना है लस्सी, जानिए पाचन तंत्र के लिए इसके फायदे

दही से बनने वाली पारंपरिक लस्सी गर्मियों में हमारे पाचन तंत्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक, लस्सी में प्रचुर मात्रा में 'गुड बैक्टीरिया' यानी प्रोबायोटिक्स पाए जाते हैं, जो आंतों की सेहत (Gut Health) को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। गर्मी के मौसम में होने वाली एसिडिटी, पेट में जलन, गैस और बदहजमी की समस्या को दूर करने में लस्सी बेहद कारगर है। इसके अलावा, इसमें मौजूद कैल्शियम और प्रोटीन शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और दोपहर के समय इसे पीने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। हालांकि, वजन घटाने की चाहत रखने वालों को बिना मलाई और कम चीनी वाली लस्सी या छाछ का चुनाव करना चाहिए।

इलेक्ट्रोलाइट्स का पावरहाउस है नारियल पानी, डिहाइड्रेशन का है काल

दूसरी तरफ, डाब या नारियल पानी (Coconut Water) एक पूरी तरह से प्राकृतिक और कैलोरी में बेहद कम रहने वाला सुपरड्रिंक है। तेज धूप और लू के थपेड़ों के कारण जब शरीर से पसीने के रूप में जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं, तो नारियल पानी शरीर को तुरंत रिचार्ज करता है। इसमें पोटैशियम, सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं। यह न सिर्फ ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मददगार है, बल्कि किडनी को डिटॉक्स करने और यूरिन इन्फेक्शन के खतरे को कम करने में भी लाजवाब है। जिन लोगों को अपनी कैलोरी काउंट और ब्लड शुगर लेवल की चिंता रहती है, उनके लिए नारियल पानी एक बेहतरीन और बिना किसी मिलावट वाला सबसे सुरक्षित विकल्प है।

दिल्ली-यूपी के मैदानी इलाकों से लेकर मुंबई तक स्थानीय बाजारों में बढ़ी डिमांड

भौगोलिक और लोकल मार्केट्स (Geographical and Local Markets) की बात करें तो दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार और मुंबई जैसे क्षेत्रों में इन दोनों ड्रिंक्स की मांग आसमान छू रही है। स्थानीय स्तर पर डॉक्टर धूप में निकलने वाले कामकाजी लोगों, खिलाड़ियों और बुजुर्गों को कैफीन युक्त चाय-कॉफी या हानिकारक कोल्ड ड्रिंक्स को छोड़कर इन पारंपरिक पेय पदार्थों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जहां दोपहर के भोजन के साथ ठंडी मीठी लस्सी या नमकीन छाछ को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं दक्षिण और तटीय भारत में सुबह के वक्त ताजा नारियल पानी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।

लस्सी बनाम नारियल पानी: जानिए आपके स्वास्थ्य के लिए कब और किसका चुनाव है बेस्ट

अब सवाल उठता है कि आपको कब लस्सी पीनी चाहिए और कब नारियल पानी का रुख करना चाहिए। न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार, यदि आप वर्कआउट करके लौटे हैं, वजन कम करना चाहते हैं या आपको तुरंत हाइड्रेशन और ताजगी की जरूरत है, तो नारियल पानी सबसे उत्तम है क्योंकि यह हल्का और सुपाच्य होता है। वहीं दूसरी ओर, यदि आप दोपहर के भारी खाने के बाद पेट को शांत रखना चाहते हैं, आंतों की कमजोरी से परेशान हैं या शरीर का वजन और एनर्जी बढ़ाना चाहते हैं, तो गाढ़ी लस्सी या मट्ठे का सेवन आपके लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगा। ध्यान रहे कि अस्थमा या सर्दी-खांसी की समस्या से पीड़ित लोगों को रात के समय लस्सी पीने से बचना चाहिए।

जेनेरेटिव एआई और आधुनिक हेल्थ सर्च पर क्यों टॉप ट्रेंड बना है यह मुकाबला

आज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और डिजिटल मीडिया सर्च के युग में देश भर के हेल्थ कॉन्शियस यूजर्स गर्मी के बेस्ट देसी ड्रिंक्स, लस्सी के फायदे और नारियल पानी पीने का सही समय इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रहे हैं। एआई सर्च इंजनों पर लोग यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि गर्मियों में अपने बच्चों और परिवार को हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए कौन सा ड्रिंक ज्यादा सुरक्षित है। स्वास्थ्य विश्लेषकों का मानना है कि पैकेटबंद शुगर सिरप और कोल्ड ड्रिंक्स के मुकाबले इन प्राकृतिक और देसी विकल्पों की तरफ डिजिटल जागरूकता का बढ़ना भारतीय लाइफस्टाइल के लिए एक बेहद सुखद संकेत है।

 

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