चीन-अमेरिका की दादागिरी होगी खत्म! सेमीकंडक्टर संकट को जड़ से मिटाने के लिए भारत का महाप्लान

ग्लोबल टेक इंडस्ट्री और ऑटोमोबाइल सेक्टर को हिलाकर रख देने वाले सेमीकंडक्टर (चिप) संकट को मात देने के लिए भारत ने अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठा लिया है। स्मार्टफोन, लैपटॉप से लेकर कारों और रक्षा उपकरणों तक में इस्तेमाल होने वाली इस जादुई चिप के लिए अब तक भारत को पूरी तरह से ताइवान, चीन और अमेरिका जैसे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब यह वैश्विक निर्भरता हमेशा के लिए खत्म होने जा रही है। भारत सरकार के महत्वाकांक्षी 'सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) के तहत एक ऐसी बड़ी और सकारात्मक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के टेक दिग्गजों का ध्यान भारत की ओर खींच लिया है। ताजा अनुमानों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2035 (FY2035) तक भारत अपनी कुल सेमीकंडक्टर जरूरतों का 50 फीसदी से अधिक हिस्सा खुद घरेलू स्तर पर तैयार करने लगेगा।
इसी साल से शुरू होने जा रहा है स्वदेशी चिप का कमर्शियल प्रोडक्शन इस पूरे मिशन की सबसे बड़ी और रोमांचक बात यह है कि इसके लिए देश को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। भारत की सरजमीं पर सेमीकंडक्टर का कमर्शियल प्रोडक्शन इसी साल से शुरू होने जा रहा है। गुजरात के धोलेरा और असम के मोरीगांव जैसे हाई-टेक सेंटर्स में लगाए जा रहे विशालकाय सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स (Fabs) का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की पीएसएमसी (PSMC) जैसी दिग्गज कंपनियों के कन्सोर्टियम के जरिए देश की पहली 'मेड इन इंडिया' चिप बहुत जल्द बनकर मार्केट में आने के लिए तैयार है। इस शुरुआत के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की एलीट लिस्ट में शामिल हो जाएगा, जिनके पास अपनी खुद की चिप बनाने की तकनीक है।
FY2035 तक आधा बाजार होगा भारत के कब्जे में, आत्मनिर्भरता की ओर कदम अधिकारियों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों की मानें तो वित्त वर्ष 2035 तक भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का एक ग्लोबल हब बन जाएगा। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत की लगभग 100% चिप्स आयात करता है, जिससे देश का एक बड़ा राजस्व बाहर चला जाता है और सप्लाई चेन में रुकावट आने पर घरेलू कंपनियों का प्रोडक्शन ठप हो जाता है। लेकिन साल 2035 तक अपनी आधी जरूरतें खुद पूरी करने के लक्ष्य से न केवल देश की घरेलू मांग पूरी होगी, बल्कि भारत बड़े पैमाने पर दुनिया भर के देशों को इन चिप्स का निर्यात (Export) भी करने लगेगा। यह कदम देश की जीडीपी (GDP) को बढ़ाने और राजकोषीय घाटे को कम करने में गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
लाखों युवाओं के लिए खुलेंगे नौकरियों के द्वार, टेक सेक्टर में आएगा उछाल भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकसित होने से सिर्फ कंपनियों को ही नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं को भी इसका सीधा फायदा मिलने वाला है। इस हाई-टेक इंडस्ट्री के पैर पसारने से देश में डिजाइनिंग, फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और पैकेजिंग के क्षेत्र में लाखों की संख्या में डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी। इसके साथ ही भारतीय स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों को बेहद कम कीमत पर और बिना किसी देरी के सेमीकंडक्टर मिलने लगेंगे, जिससे देश के भीतर ही सस्ते स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs) और इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स का निर्माण तेजी से हो सकेगा। कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट भारत को तकनीकी रूप से एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में सबसे मजबूत नींव साबित होने जा रहा है।