US Pakistan Secret : क्या अमेरिका की कठपुतली बन गया है पाकिस्तान? ट्रंप के एक आदेश पर शहबाज शरीफ के कदम ने खोल दी बड़ी पोल

News India Live, Digital Desk: अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में इस वक्त एक ही चर्चा सबसे तेज है क्या पाकिस्तान अपनी संप्रभुता खोकर पूरी तरह अमेरिका के इशारों पर नाचने लगा है? हालिया घटनाक्रमों और डोनाल्ड ट्रंप के साथ शहबाज शरीफ की ‘सीक्रेट’ केमिस्ट्री ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के भीतर और बाहर खलबली मचा दी है। दावों के मुताबिक, शहबाज सरकार के कुछ हालिया फैसलों के पीछे सीधे तौर पर व्हाइट हाउस का हाथ बताया जा रहा है।कैसे खुला ये ‘सीक्रेट’ और क्या है ट्रंप का वो आदेश?इस राज से पर्दा तब उठा जब पाकिस्तान सरकार ने अचानक अपनी कुछ प्रमुख विदेश नीतियों में यू-टर्न ले लिया। कूटनीतिक सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने इस्लामाबाद को कुछ कड़े निर्देश दिए थे, जिनका पालन करना शहबाज शरीफ के लिए मजबूरी बन गया। बताया जा रहा है कि अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए मिलने वाली मदद की आड़ में अमेरिका अब पाकिस्तान की रणनीतिक चालों को नियंत्रित कर रहा है। ट्रंप के ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट्स और पाकिस्तान की प्रतिक्रियाओं के बीच की टाइमिंग ने इस संदेह को पुख्ता कर दिया है।आर्थिक मजबूरी या कूटनीतिक सरेंडर?पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे खराब आर्थिक दौर से गुजर रहा है। कर्ज के बोझ तले दबी शहबाज सरकार के पास अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मदद पाने के लिए अमेरिका का समर्थन होना अनिवार्य है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर वाशिंगटन अपनी ‘शर्तों’ को मनवाने में कामयाब हो रहा है। विपक्ष का आरोप है कि शहबाज शरीफ सरकार ने देश के हितों को ताक पर रखकर खुद को अमेरिका का ‘पपेट’ (कठपुतली) बना लिया है। सोशल मीडिया पर भी यह बहस छिड़ गई है कि क्या पाकिस्तान की चाबी अब रावलपिंडी के बजाय वाशिंगटन में है।विपक्ष का हमला और जनता में आक्रोशइस खुलासे के बाद इमरान खान की पार्टी पीटीआई सहित अन्य विपक्षी दलों ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। उनका कहना है कि यह एक ‘आयातित सरकार’ है जो केवल बाहरी आदेशों पर काम करती है। जनता के बीच भी यह संदेश जा रहा है कि देश की विदेश नीति अब स्वतंत्र नहीं रही। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान इसी तरह अमेरिका के दबाव में काम करता रहा, तो उसके अपने पुराने दोस्तों और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ रिश्तों पर गहरा असर पड़ सकता है। फिलहाल, शहबाज शरीफ के हर कदम को अब ‘अमेरिकी चश्मे’ से देखा जा रहा है।