जानिए किस बर्तन में रखा खाना खाने से बिगड़ सकती है सेहत और कैंसर तक का खतरा!

हम अक्सर अपनी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए पौष्टिक भोजन, हरी सब्जियों और फलों का चुनाव करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस बर्तन में आपका खाना पकाया या रखा जा रहा है, वह भी आपकी सेहत तय करने में उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है? आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दोनों ही इस बात की पुष्टि करते हैं कि गलत धातुओं या सामग्रियों से बने बर्तनों का इस्तेमाल करने से भोजन के पोषक तत्व तो नष्ट होते ही हैं, साथ ही उनमें हानिकारक रसायन (Chemicals) भी घुल जाते हैं। ये रसायन धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
1. एल्युमीनियम के बर्तन: स्लो पॉइजन की तरह करते हैं काम
भारतीय रसोईघरों में प्रेशर कुकर से लेकर कड़ाही तक एल्युमीनियम के बर्तनों का इस्तेमाल बहुत आम है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एल्युमीनियम में खाना पकाना या लंबे समय तक रखना बेहद नुकसानदेह होता है। जब एल्युमीनियम में खट्टी या एसिडिक चीजें (जैसे टमाटर, दही, नींबू या सिरका) पकाई जाती हैं, तो यह धातु भोजन के साथ प्रतिक्रिया (React) करके उसमें घुलने लगती है। लंबे समय तक एल्युमीनियम के बर्तनों का इस्तेमाल करने से पेट की बीमारियां, अल्सर, लिवर विकार, हड्डियों का कमजोर होना और अल्जाइमर (याददाश्त कमजोर होना) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
2. खराब या छिला हुआ नॉन-स्टिक कुकवेयर: टेफ्लॉन का गंभीर खतरा
आजकल कम तेल में खाना पकाने के लिए नॉन-स्टिक बर्तनों का चलन काफी बढ़ गया है। लेकिन जब इन बर्तनों पर लगी 'टेफ्लॉन' (PFOA) की कोटिंग पुरानी हो जाती है या उसमें खरोंच (Scratch) आ जाती है, तो यह अत्यंत विषैली हो जाती है। अत्यधिक तेज आंच पर गर्म करने या छिले हुए नॉन-स्टिक बर्तन में खाना बनाने से जहरीली गैसे और केमिकल कण खाने में मिल जाते हैं। यह शरीर में जाकर थायराइड, हार्मोनल असंतुलन और यहां तक कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है।
3. प्लास्टिक के डिब्बे व बर्तन: माइक्रोप्लास्टिक और केमिकल लोचा
गर्म खाना कभी भी प्लास्टिक के बर्तनों या पॉलीथिन में नहीं रखना चाहिए। प्लास्टिक में 'बिसफेनॉल ए' (BPA) और 'फ्थेलेट्स' (Phthalates) जैसे खतरनाक केमिकल्स होते हैं। जब गर्म खाना या चाय प्लास्टिक के संपर्क में आती है, तो ये केमिकल्स पिघलकर खाने में घुल जाते हैं। प्लास्टिक के बर्तनों में नियमित खाना खाने से पुरुषों और महिलाओं में फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) पर बुरा असर पड़ता है, इम्युनिटी कमजोर होती है और बच्चों के मानसिक विकास में बाधा आती है।
4. तांबे और पीतल के बर्तन: एसिडिक भोजन के लिए खतरनाक
तांबे (Copper) और पीतल के बर्तन सेहत के लिए बहुत गुणकारी माने जाते हैं, लेकिन इनका गलत इस्तेमाल सेहत पर भारी पड़ सकता है। तांबे के बर्तन में पानी पीना तो फायदेमंद है, लेकिन तांबे या बिना कलई (Tin Coating) वाले पीतल के बर्तनों में कभी भी खट्टा खाना, दही, छाछ, अचार या नींबू का रस नहीं रखना चाहिए। खट्टे पदार्थों के संपर्क में आते ही तांबा कॉपर सल्फेट में बदल जाता है, जिससे फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning), जी मिचलाना, उल्टी और पेट में तेज दर्द की समस्या हो सकती है।
तो फिर किस बर्तन में खाना पकाना और रखना है सबसे सुरक्षित?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आयुर्वेद के अनुसार, खाना बनाने और रखने के लिए मिट्टी के बर्तन, स्टेनलेस स्टील (18/10 ग्रेड), लोहा (Cast Iron) और कांस्य (Bronze) सबसे सुरक्षित और सेहतमंद विकल्प हैं। मिट्टी के बर्तनों में भोजन पकाने से उसके 100% पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं, जबकि लोहे के बर्तनों में पकाने से शरीर को स्वाभाविक रूप से आयरन मिलता है।