जीवन का सच हैं भगवान चित्रगुप्त आखिर क्यों मिला उन्हें दुनिया के हर कर्म का रिकॉर्ड रखने का सबसे मुश्किल काम?

News India Live, Digital Desk: हम सब बचपन से एक बात सुनते आए हैं”अच्छा करोगे तो स्वर्ग मिलेगा और बुरा करोगे तो नर्क।” लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अरबों-खरबों लोगों की इस दुनिया में किसका ‘पुण्य’ कितना है और किसका ‘पाप’ कितना, इसका हिसाब आखिर रखता कौन है? यह कोई आसान काम तो है नहीं। इसी गुत्थी को सुलझाने के लिए जन्म हुआभगवान चित्रगुप्त का।आज की कहानी इसी बारे में है कि कैसे ब्रह्मा जी की एक विशेष रचना ने पूरी सृष्टि के न्याय के तरीके को ही बदल दिया।जब यमराज हो गए थे परेशानपौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने जब यमराज को मृत्यु का देवता बनाया, तो उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी भी दी—इंसान के कर्मों के आधार पर उसे सजा देना। शुरुआत में तो सब ठीक रहा, लेकिन धीरे-धीरे जीवों की संख्या बढ़ने लगी। यमराज उलझन में पड़ गए कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ। इतने सारे लोगों के पाप-पुण्य की याददाश्त के भरोसे गिनती करना नामुमकिन होने लगा।यमराज ब्रह्मा जी के पास पहुँचे और अपनी परेशानी बताई। उन्होंने कहा, “हे पितामह! मुझे एक ऐसे सहायक की जरूरत है जो बुद्धिमान हो, जिसकी याददाश्त अचूक हो और जो बिना किसी पक्षपात के सबका हिसाब रख सके।”हजारों साल की तपस्या और चित्रगुप्त का जन्मयमराज की समस्या सुनकर ब्रह्मा जी गहरी समाधि (तपस्या) में चले गए। कहा जाता है कि हजारों सालों की एकाग्रता के बाद, ब्रह्मा जी की’काया’ (शरीर) से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुए। उनके एक हाथ में कलम थी और दूसरे में दवात (स्याही)।क्योंकि ये ब्रह्मा जी की ‘काया’ से उत्पन्न हुए थे, इसलिए इनका नाम’कायस्थ’ पड़ा और गुप्त रूप से सबके मन की बात जान लेने की क्षमता के कारण इन्हें’चित्रगुप्त’ कहा गया।चित्रगुप्त को ही ये काम क्यों मिला?ब्रह्मा जी ने उन्हें आदेश दिया कि उनका काम हर जीवित प्राणी की गतिविधियों पर नजर रखना है। इंसान ही नहीं, पशु-पक्षी और हर जीव क्या सोचता है और क्या करता है, उसका पूरा रिकॉर्ड चित्रगुप्त की किताब में दर्ज होने लगा। जिसे हम ‘अग्रसंदेश’ या लोक-भाषा में ‘भाग्य की किताब’ भी कहते हैं।भगवान चित्रगुप्त को यह जिम्मेदारी देने की सबसे बड़ी वजह उनकीएकाग्रता और निष्पक्षता थी। वे किसी के डर या दबाव में आए बिना न्याय करते हैं। चित्रगुप्त ने यमराज के काम को इतना आसान बना दिया कि अब किसी के शरीर छोड़ते ही उसके कर्मों का पूरा ‘कच्चा-चिट्ठा’ यमराज के सामने होता था।हमारे जीवन के लिए इसका मतलबअक्सर लोग सोचते हैं कि अकेले में की गई गलती को कोई नहीं जान पाएगा। लेकिन भगवान चित्रगुप्त की यह कथा हमें याद दिलाती है कि हमारी हर सोच और हर काम का एक गवाह (Witness) हमेशा मौजूद है।दिवाली के ठीक बाद भाई दूज के दिन कायस्थ समुदाय और सनातनी धर्म के लोग कलम-दवात की पूजा करते हैं, जो भगवान चित्रगुप्त के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह सिर्फ एक पूजा नहीं है, बल्कि खुद से वादा है कि हम सही रास्ते पर चलेंगे और अपनी ‘किताब’ को अच्छे कर्मों से भरेंगे।आपको यह पौराणिक कहानी कैसी लगी? क्या आप भी मानते हैं कि हमारी हर हरकत कहीं न कहीं दर्ज हो रही है? हमें कमेंट में जरूर बताएं।