धर्म

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर केवल सोना ही नहीं, मां अष्टलक्ष्मी की पूजा से बरसेगा अपार वैभव,जानें शुभ मुहूर्त

News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का दिन अबूझ मुहूर्त और अनंत फल देने वाला माना गया है। साल 2026 में यह महापर्व 19 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन सोना-चांदी खरीदने की परंपरा तो सदियों पुरानी है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह दिन ‘अष्टलक्ष्मी’ की साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर माता लक्ष्मी के आठ विशिष्ट स्वरूपों की पूजा करने से न केवल धन, बल्कि संतान, विजय, विद्या और आरोग्य का भी वरदान मिलता है।अक्षय तृतीया 2026: पूजा के लिए ‘अबूझ’ और ‘अभिजीत’ मुहूर्तअक्षय तृतीया का पूरा दिन मांगलिक कार्यों के लिए शुभ होता है, इसलिए इसे ‘अबूझ मुहूर्त’ कहा जाता है। हालांकि, विशिष्ट फल की प्राप्ति के लिए आप इन मुहूर्तों में पूजा कर सकते हैं:अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक (सर्वश्रेष्ठ समय)।ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:29 बजे से सुबह 05:17 बजे तक।अमृत काल: तड़के प्रातः 02:26 बजे से प्रातः 03:51 बजे तक।विशेष योग: इस दिन आयुष्मान योग (रात 08:01 बजे तक) और उसके बाद सौभाग्य योग का निर्माण हो रहा है, जो निवेश और व्यापार के लिए अति उत्तम है।अष्टलक्ष्मी के 8 स्वरूप: किस रूप से क्या मिलता है आशीर्वाद?अक्षय तृतीया पर अष्टलक्ष्मी की आराधना करने से जीवन के आठों आयामों में पूर्णता आती है:आदिलक्ष्मी: यह माता का प्रथम स्वरूप है, जो जीवन में धर्म और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती हैं।धन लक्ष्मी: 6 भुजाओं वाली माता का यह रूप दरिद्रता दूर कर आर्थिक संपन्नता प्रदान करता है।धान्य लक्ष्मी: इनकी कृपा से घर में अन्न के भंडार कभी खाली नहीं होते और सुख-शांति बनी रहती है।गजलक्ष्मी: राजसुख, राजनीति में सफलता और कृषि में उन्नति के लिए माता गजलक्ष्मी की पूजा की जाती है।संतान लक्ष्मी: गुणवान और सुखी संतान की प्राप्ति के लिए माता के इस पावन स्वरूप की साधना उत्तम है।वीर लक्ष्मी: यह स्वरूप भक्त में साहस, आत्मविश्वास भरता है और अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है।विजय लक्ष्मी: कोर्ट-कचहरी के मामलों और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए माता विजय लक्ष्मी की शरण लेनी चाहिए।विद्या लक्ष्मी: बुद्धि, विवेक और कला के क्षेत्र में यश-कीर्ति की प्राप्ति के लिए इनकी उपासना की जाती है।अक्षय तृतीया पर कैसे करें मां लक्ष्मी का पूजन? (Puja Vidhi)माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए 19 अप्रैल को इस विधि से पूजन करें:तैयारी: सुबह जल्दी स्नान कर लाल या पीले वस्त्र धारण करें। मंदिर की सफाई कर गंगाजल छिड़कें।स्थापना: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां अष्टलक्ष्मी की तस्वीर और साथ में ‘श्रीयंत्र’ या ‘कुबेर यंत्र’ स्थापित करें।अर्पण: माता को कमल या लाल गुलाब अर्पित करें। हल्दी की गांठ, सिंदूर, कुमकुम और 5 या 11 पीली कौड़ियां चढ़ाएं।दीप और भोग: शुद्ध घी के 8 दीपक जलाएं और माता को दूध की खीर, मखाने या बताशे का भोग लगाएं।सिद्ध मंत्र: पूजा के दौरान इस महामंत्र का 11 या 21 बार जाप करें:”ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः”समापन: श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें और आरती के बाद प्रसाद वितरण करें।ज्योतिषीय महत्वरविवार के दिन अक्षय तृतीया होने के कारण सूर्य देव और माता लक्ष्मी का एक साथ आशीर्वाद मिलेगा। इस दिन पीली वस्तुओं (सोना, पीतल, चने की दाल) का दान और खरीदारी करना आपके भाग्य को उदय कर सकता है।

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