डिजिटल दौर में रॉ आवाज लगती है अजीब’: सोनू निगम ने किया हैरान करने वाला स्वीकार, बोले- रिकॉर्डिंग में ऑटो-ट्यून का करते हैं इस्तेमाल

भारतीय संगीत जगत में अपनी बेमिसाल और रूहानी आवाज के लिए पहचाने जाने वाले दिग्गज गायक सोनू निगम (Sonu Nigam) ने एक ऐसा चौंकाने वाला बयान दिया है, जिसने म्यूजिक इंडस्ट्री में नई बहस छेड़ दी है। आज के इस हाई-टेक डिजिटल युग और एआई के जमाने में गानों की रिकॉर्डिंग के तौर-तरीके पूरी तरह बदल चुके हैं। इसी बदलाव पर खुलकर बात करते हुए सोनू निगम ने स्वीकार किया है कि आज के दौर में पूरी तरह से 'रॉ' (कच्ची और प्राकृतिक) आवाज लोगों को अजीब या यू कहें कि अनट्रेंड लग सकती है। यही वजह है कि आज के आधुनिक समय में गानों की रिकॉर्डिंग के दौरान ऑटो-ट्यून और डिजिटल करेक्शन का खुलकर इस्तेमाल किया जा रहा है।
आधुनिक डिजिटल युग में कैसे बदल गया संगीत का पैमाना?
एक समय था जब गाने वन-टेक में रिकॉर्ड किए जाते थे और आवाज की शुद्धता ही गायक की असली पहचान होती थी। लेकिन आज का दौर डिजिटल टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर और एआई का है। सोनू निगम ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला कि टेक्नोलॉजी ने जहां संगीत को आसान और चमकीला बनाया है, वहीं इसने गायकी के प्राकृतिक स्वरूप को भी पीछे छोड़ दिया है। आज के श्रोता हर चीज में परफेक्शन चाहते हैं, और इसी मांग को पूरा करने के लिए स्टूडियो में तकनीकी साधनों का सहारा लेना मजबूरी और जरूरत दोनों बन गया है।
'रॉ' आवाज पर सोनू निगम का बड़ा और बेबाक बयान
अपनी सुरीली गायकी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले सोनू निगम ने बिना किसी झिझक के यह मान लिया कि आज के वक्त में जब कोई बिना किसी डिजिटल ट्रीटमेंट के सिर्फ अपनी रॉ आवाज में गाता है, तो वह आम जनता को थोड़ा अटपटा लग सकता है। उन्होंने बताया कि कान अब डिजिटल रूप से तराशे हुए और परफेक्ट ट्यून्स के आदि हो चुके हैं। यही कारण है कि रिकॉर्डिंग के दौरान स्टूडियो में साउंड इंजीनियरिंग और ऑटो-ट्यून (Auto-Tune) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि ट्रैक इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के हिसाब से एकदम सटीक और पॉलिश लग सके।
संगीतप्रेमियों और कलाकारों के बीच छिड़ी नई चर्चा
सोनू निगम के इस बेबाक खुलासे के बाद से सोशल मीडिया और संगीत गलियारों में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या टेक्नोलॉजी ने गायकी के हुनर को धुंधला कर दिया है या इसे बेहतर बनाया है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि जहां एक ओर ऑटो-ट्यून सामान्य आवाजों को भी सुरीला बना देता है, वहीं दूसरी ओर यह असली और प्रशिक्षित गायकों के टैलेंट और टेक्नोलॉजी के बीच की लाइन को धुंधला कर रहा है। बहरहाल, एक दिग्गज कलाकार द्वारा इस सच्चाई को खुले तौर पर स्वीकार करना यह बताता है कि आधुनिक संगीत की दुनिया कितनी बदल चुकी है।