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तमिलनाडु के सभी विधायकों की जगी किस्मत: सीएम विजय ने बांटी नई कार और 1 लाख रुपये का मासिक भत्ता

दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु की राजनीति में इस समय मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय (C Joseph Vijay) के एक मास्टरस्ट्रोक फैसले ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राज्य की सत्ता संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री विजय लगातार बड़े और चौंकाने वाले फैसले ले रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने विधानसभा के सभी विधायकों के लिए एक ऐसा तोहफा दिया है जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। तमिलनाडु सरकार ने राज्य के सभी 234 विधायकों को अपने क्षेत्रों में सुचारू रूप से काम करने और जनता की शिकायतों का तेजी से समाधान करने के लिए मुफ्त सरकारी गाड़ियां (New Cars) और हर महीने 1 लाख रुपये तक का भारी-भरकम भत्ता देने का ऐतिहासिक ऐलान किया है। मुख्यमंत्री के इस कदम के बाद से राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर थलापति विजय अचानक अपने राज्य के विधायकों पर इतने मेहरबान क्यों हो गए हैं।

विधानसभा में नियम 110 के तहत किया गया बड़ा ऐलान

तमिलनाडु विधानसभा के सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय ने नियम 110 (Rule 110) का उपयोग करते हुए इस बड़े वित्तीय पैकेज की घोषणा की। सदन में चर्चा के दौरान जब विधायकों की लॉजिस्टिक और परिवहन संबंधी समस्याओं का मुद्दा उठाया गया, तो मुख्यमंत्री ने बिना किसी देरी के तुरंत फैसला लेते हुए राज्य के सभी विधायकों को आधिकारिक वाहन मुहैया कराने की बात कही। इस विशेष योजना के तहत प्रत्येक विधायक को कार के रखरखाव, ईंधन और ड्राइवर के वेतन के लिए हर महीने 75,000 रुपये का वाहन भत्ता दिया जाएगा। इसके अलावा, कार्यालय के कामकाज और जनहित के कागजी कार्यों को संभालने के लिए एक निजी सचिव या सहायक रखने के वास्ते 25,000 रुपये प्रति माह का अतिरिक्त अनुदान भी दिया जाएगा। इस तरह हर विधायक को कुल मिलाकर प्रति माह 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी।

विधायकों पर मेहरबान होने के पीछे क्या है असली प्रशासनिक मजबूरी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु सरकार का यह फैसला केवल एक तोहफा नहीं है, बल्कि इसके पीछे जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कामकाज को पारदर्शी और तेज बनाने की एक बड़ी रणनीति छिपी है। राज्य के स्थानीय निकायों जैसे कि मेयर, डिप्टी मेयर, नगर पालिका अध्यक्षों और पंचायत प्रमुखों के पास पहले से ही आधिकारिक वाहन और यात्रा की सुविधाएं मौजूद थीं, लेकिन निर्वाचित होने के बावजूद विधायकों के पास निर्वाचन क्षेत्रों में घूमने के लिए ऐसी कोई पुख्ता और स्थायी सरकारी व्यवस्था नहीं थी। इस वजह से कई बार दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में जाकर जनता की समस्याओं को सुनना और सरकारी योजनाओं की जमीनी प्रगति की मॉनिटरिंग करना विधायकों के लिए मुश्किल हो जाता था। मुख्यमंत्री विजय ने इस अंतर को खत्म करने और विधायकों को किसी भी प्रकार की वित्तीय या तार्किक लाचारी से मुक्त करने के लिए यह साहसिक कदम उठाया है।

जनता के पैसों के इस्तेमाल और सरकारी खजाने पर पड़ने वाला असर

इस बड़े फैसले के बाद से राज्य के वित्तीय ढांचे पर भी चर्चा शुरू हो गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु के सभी 234 विधायकों को मिलने वाले इस 1 लाख रुपये प्रति माह के पैकेज और गाड़ियों की व्यवस्था से राज्य के खजाने पर सालाना करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि, सरकार का पक्ष है कि जब तक जनप्रतिनिधियों को मजबूत बुनियादी संसाधन नहीं दिए जाएंगे, तब तक वे अपने क्षेत्रों का विकास पूरी ईमानदारी और ताकत से नहीं कर पाएंगे। विपक्षी दलों और जानकारों का एक धड़ा इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहा है, लेकिन आम जनता के बीच इस बात की चर्चा है कि क्या इस तरह के भारी भत्तों से वाकई जमीनी स्तर पर विकास कार्यों में तेजी आएगी या नहीं।

स्वास्थ्य और डेयरी सेक्टर को लेकर भी किए गए कई अहम बदलाव

मुख्यमंत्री विजय ने केवल विधायकों की सुविधाओं का ही ध्यान नहीं रखा, बल्कि इस दौरान आम जनता और किसानों के हित में भी कई बड़े ऐलान किए। राज्य में कोऑपरेटिव डेयरी ब्रांड 'आंविन' (Aavin) से जुड़े 3.16 लाख से अधिक दूध उत्पादकों को राहत देते हुए दूध की खरीद कीमत को 38 रुपये से बढ़ाकर 41 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना (CMCHIS) के तहत मिलने वाली सालाना मेडिकल कवरेज की सीमा को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 25 लाख रुपये कर दिया गया है, ताकि गरीब से गरीब व्यक्ति भी मुफ्त और बेहतर इलाज पा सके। इन सभी फैसलों के जरिए मुख्यमंत्री विजय राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं।

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