देश

तमिलनाडु के CM थलपति विजय के बेंगलुरु दौरे पर मचा सियासी बवाल, कावेरी और मेकेदातू डैम विवाद पर घिरी सरकार

दक्षिण भारत की राजनीति में एक बार फिर कावेरी जल विवाद ने तूल पकड़ लिया है और इस बार इसके केंद्र में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (थलपति विजय) हैं। राज्य में मेकेदातू बांध परियोजना और पानी के बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री के एक संभावित फैसले पर चौतरफा राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय कर्नाटक के नेतृत्व के साथ सीधी बातचीत करने के लिए बेंगलुरु जाने की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद से विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने उनकी सरकार पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। सत्ता संभालने के बाद थलपति विजय के सामने यह सबसे बड़ा कूटनीतिक और राजनीतिक इम्तिहान माना जा रहा है।

कर्नाटक के साथ द्विपक्षीय बातचीत पर भड़की DMK और विपक्षी दल

मुख्यमंत्री थलपति विजय के संभावित बेंगलुरु दौरे की खबर सामने आते ही मुख्य विपक्षी दल DMK ने इसे तमिलनाडु के हितों के खिलाफ करार दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस दौरे पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब कर्नाटक सरकार सुप्रीम कोर्ट और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों के बावजूद तमिलनाडु के हिस्से का पानी नहीं छोड़ रही है और मेकेदातू बांध बनाने पर अड़ी है, तो ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की द्विपक्षीय वार्ता का कोई औचित्य नहीं बनता है। स्टालिन का यह भी मानना है कि इस तरह की बातचीत से सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु का कानूनी पक्ष कमजोर हो सकता है। विवाद को बढ़ता देख DMK ने आगामी 3 अगस्त को तंजावुर में एक बड़े विरोध प्रदर्शन का ऐलान भी कर दिया है जिसकी कमान उदयनिधि स्टालिन संभालेंगे।

बैकफुट पर TVK सरकार, कानूनी रास्ते और विरोध के बीच असमंजस

विपक्ष के आक्रामक रुख और किसानों के विरोध के बाद थलपति विजय की सरकार अब कुछ हद तक विचार-मुद्रा में नजर आ रही है। बढ़ते राजनीतिक तनाव को देखते हुए तमिलनाडु के कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने स्पष्ट किया है कि सीएम विजय के कर्नाटक दौरे पर अभी तक कोई अंतिम आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार के सूत्रों का यह भी संकेत है कि राज्य अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। मुख्यमंत्री विजय लगातार वरिष्ठ अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ बैठकें कर रहे हैं ताकि बिना किसी समझौते के राज्य के किसानों और आम जनता के हितों की रक्षा की जा सके।

क्या है पूरा मेकेदातू बांध और कावेरी जल विवाद

यह पूरा विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे और नियंत्रण से जुड़ा हुआ है। कर्नाटक का कहना है कि बेंगलुरु शहर और आसपास के इलाकों में पेयजल की गंभीर समस्या को दूर करने के लिए मेकेदातू नामक स्थान पर एक नया बांध बनाया जाना बेहद जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, तमिलनाडु का कड़ा विरोध है कि यदि कर्नाटक ने यह बांध बना लिया, तो कावेरी नदी के निचले हिस्से में आने वाले पानी के प्रवाह पर पूरी तरह कर्नाटक का नियंत्रण हो जाएगा, जिससे तमिलनाडु के डेल्टा जिलों के किसानों की फसलें और आजीविका बर्बाद हो जाएगी। हालांकि हाल ही में ट्रिब्यूनल ने पानी छोड़ने के निर्देश दिए हैं, लेकिन मेकेदातू परियोजना पर छिड़ी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है।

Back to top button