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तमिलनाडु में हुई बंपर वोटिंग ने उड़ाई दिग्गजों की नींद, क्या DMK के गढ़ में सेंध लगा पाएगी BJP? समझें पूरा समीकरण

News India Live, Digital Desk: लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण में दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु की सभी 39 सीटों पर मतदान संपन्न हो गया है। सुबह से ही पोलिंग बूथों पर लगी लंबी कतारों और मतदाताओं के जबरदस्त उत्साह ने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु में हुई भारी वोटिंग ने अब सूबे की सत्ता पर काबिज DMK और मुख्य विपक्षी दल AIADMK की धड़कनें बढ़ा दी हैं। वहीं, इस बार त्रिकोणीय मुकाबले का दावा कर रही भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदें भी इस बढ़े हुए वोट प्रतिशत पर टिकी हैं।मतदाताओं के भारी टर्नआउट ने पलटा पासा?तमिलनाडु में पारंपरिक रूप से मुकाबला DMK और AIADMK के बीच ही सिमटा रहता था, लेकिन इस बार जमीन पर हवा बदली हुई नजर आ रही है। रिकॉर्ड मतदान इस बात का संकेत है कि जनता किसी बड़े बदलाव या फिर किसी लहर के पक्ष में वोट कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब भी मतदान का प्रतिशत उम्मीद से ज्यादा होता है, तो वह अक्सर सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) या फिर किसी नए विकल्प के प्रति झुकाव का नतीजा होता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या स्टालिन का ‘द्रविड़ मॉडल’ बरकरार रहेगा या फिर प्रधानमंत्री मोदी का ‘तमिल कार्ड’ कमाल कर गया है?अन्नामलाई फैक्टर और बीजेपी की ‘साइलेंट’ सेंधमारीइस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा के. अन्नामलाई की रही है। भाजपा ने जिस तरह से तमिलनाडु की संस्कृति और भाषा को अपनी रैलियों का केंद्र बनाया, उसने पहली बार राज्य में भगवा दल को एक गंभीर दावेदार के रूप में पेश किया है। यदि भारी मतदान का लाभ भाजपा को मिलता है, तो यह दक्षिण की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ होगा। कई सीटों पर कांटे की टक्कर देखी जा रही है, जहाँ कुछ हजार वोटों का अंतर ही हार-जीत तय करेगा। अन्नामलाई की आक्रामक छवि और पीएम मोदी के बार-बार किए गए दौरों ने युवाओं को पोलिंग बूथ तक खींचने में बड़ी भूमिका निभाई है।डीएमके और एआईएडीएमके के गढ़ में मची खलबलीतमिलनाडु की राजनीति में दशकों से दो ही रंगों का बोलबाला रहा है, लेकिन इस बार वोटिंग पैटर्न ने स्थानीय रणनीतिकारों को उलझा दिया है। जहां DMK अपने कल्याणकारी योजनाओं और क्षेत्रीय गौरव के दम पर जीत का दावा कर रही है, वहीं AIADMK खुद को अम्मा की विरासत का असली उत्तराधिकारी बताकर मैदान में है। हालांकि, भारी मतदान ने इन दोनों दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कहीं यह ‘साइलेंट वोटर’ किसी तीसरे रास्ते की तलाश में तो नहीं निकल पड़ा है।क्या दक्षिण का किला फतेह करेंगे पीएम मोदी?प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु पर अपना पूरा जोर लगाया है। काशी-तमिल संगमम से लेकर सेंगोल की स्थापना तक, भाजपा ने तमिल पहचान से खुद को जोड़ने की हर मुमकिन कोशिश की है। अब जब नतीजे 4 जून को आएंगे, तभी साफ हो पाएगा कि हुगली के तट से लेकर कन्याकुमारी तक पीएम मोदी का जादू कितना चला। फिलहाल, तमिलनाडु की सड़कों पर एक ही चर्चा है यह भारी वोटिंग किसके लिए ‘शुभ’ और किसके लिए ‘मुसीबत’ बनने वाली है।

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