तिल और मस्सा दोनों हैं अलग! पहचान से लेकर हटाने के सुरक्षित तरीके और घरेलू उपाय

हमारे शरीर की त्वचा पर छोटे-छोटे निशान या उभार होना एक बेहद आम बात है, जिसे आम भाषा में हम सभी तिल और मस्सा कह देते हैं। अक्सर लोग यह मान बैठते हैं कि शरीर पर उगने वाले तिल और मस्से एक ही जैसी त्वचा की समस्याएं हैं, और इसी गलतफहमी के चलते कई लोग बिना सोचे-समझे घरेलू नुस्खे अपनाने लगते हैं या इन्हें खुद से हटाने की कोशिश करते हैं। लेकिन चिकित्सा विज्ञान और डर्मेटोलॉजी के जानकारों की मानें तो तिल और मस्से में जमीन-आसमान का फर्क होता है। इनकी बनावट, इनके होने के कारण, इनका शरीर पर प्रभाव और यहां तक कि इन्हें हटाने के तरीके भी एक-दूसरे से पूरी तरह अलग होते हैं। यदि समय रहते इनकी सही पहचान न की जाए या इनके इलाज में लापरवाही बरती जाए, तो यह त्वचा के लिए खतरनाक भी साबित हो सकता है। आज के इस विस्तृत लेख में हम आपको तिल और मस्से के बीच का मुख्य अंतर बताएंगे, साथ ही इनसे छुटकारा पाने के सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीकों के बारे में भी पूरी जानकारी देंगे।
तिल (Moles) क्या होते हैं और क्यों उभरते हैं?
चिकित्सीय भाषा में तिलों को 'नेवी' (Nevi) कहा जाता है। यह त्वचा पर बनने वाले छोटे, काले, भूरे या त्वचा के रंग से मिलते-जुलते पैच या उभार होते हैं। तिल तब बनते हैं जब हमारी त्वचा में मौजूद पिगमेंट बनाने वाली कोशिकाएं, जिन्हें मेलेनोसाइट्स (Melanocytes) कहा जाता है, एक समूह या क्लस्टर के रूप में फैलने के बजाय त्वचा में एक जगह पर इकट्ठा हो जाती हैं। अधिकांश तिल जन्मजात होते हैं या बचपन और किशोरावस्था के दौरान सूर्य की पराबैंगनी यानी यूवी (UV) किरणों के संपर्क में आने से विकसित होते हैं। अमूमन तिल पूरी तरह से सपाट और चपटे होते हैं, हालांकि कुछ तिल समय के साथ थोड़े उभरे हुए भी हो सकते हैं। दुनिया भर में ज्यादातर तिल पूरी तरह से कैंसर मुक्त और हानिरहित होते हैं, लेकिन यदि किसी तिल के आकार, रंग या सीमाओं में अचानक तेजी से बदलाव आने लगे या उसमें से खून आने लगे, तो यह त्वचा के कैंसर (मेलानोमा) का शुरुआती संकेत हो सकता है, जिस पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
मस्से (Warts) क्या होते हैं और यह शरीर पर क्यों फैलते हैं?
दूसरी ओर, मस्से यानी वार्ट्स (Warts) त्वचा पर होने वाले छोटे, खुरदुरे और दानेदार उभार होते हैं। तिल जहां आंतरिक पिगमेंट कोशिकाओं के कारण बनते हैं, वहीं मस्से एक वायरल संक्रमण के कारण पैदा होते हैं। मानव पैपिलोमा वायरस (HPV) जब त्वचा के किसी छोटे से कट या खरोंच के जरिए शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है, तब त्वचा की कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं और मस्से का रूप ले लेती हैं। मस्से छूत की बीमारी की तरह होते हैं, जिसका मतलब है कि यह शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में या एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकते हैं। यह आमतौर पर उभरे हुए, खुरदरे और फूलगोभी जैसे आकार के होते हैं। चेहरे, गर्दन, हाथ, उंगलियों और पैरों के तलवों पर मस्से होना बहुत आम है। हालांकि यह जानलेवा नहीं होते, लेकिन दिखने में भद्दे लगते हैं और इनमें कभी-कभी छूने पर दर्द या चुभन भी महसूस हो सकती है।
तिल और मस्से के बीच का मुख्य और स्पष्ट अंतर
तिल और मस्से को आसानी से पहचानने के लिए इनके भौतिक स्वरूप को समझना बहुत जरूरी है। सबसे पहला और बड़ा अंतर यह है कि तिल अंदरूनी पिगमेंटेशन का परिणाम हैं और वे चिकने, सपाट या हल्के उभरे हुए होते हैं, जबकि मस्से वायरल संक्रमण से पैदा होने वाले खुरदरे और रवेदार उभार होते हैं। दूसरा बड़ा अंतर यह है कि तिल एक जगह से दूसरी जगह या शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैलते हैं, जबकि एचपीवी वायरस के संपर्क में आने के कारण मस्से बहुत तेजी से शरीर के दूसरे अंगों पर भी अपनी संख्या बढ़ा लेते हैं। तीसरा अंतर यह है कि तिल अमूमन दर्द रहित होते हैं और इनमें किसी प्रकार की खुजली या संवेदनशीलता नहीं होती, जबकि कुछ प्रकार के मस्से, विशेषकर प्लांटर वार्ट्स (जो पैरों के तलवों पर होते हैं), चलने-फिरने के दौरान तेज दर्द और असहजता पैदा कर सकते हैं।
बिना डॉक्टर की सलाह के इन्हें खुद हटाने की खतरनाक भूल
कई लोग सोशल मीडिया या सुनी-सुनाई बातों में आकर तिल या मस्से को खुद से काटने, बांधने, सुई चुभाने या तरह-तरह के खतरनाक एसिड और केमिकल का इस्तेमाल करके हटाने की कोशिश करते हैं। यह तरीका आपकी त्वचा के लिए बहुत ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है। ऐसा करने से त्वचा पर गहरा और हमेशा के लिए रहने वाला दाग (Scar) पड़ सकता है, गंभीर संक्रमण (Infection) फैल सकता है, और अगर वह तिल या मस्सा किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले रहा है, तो स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। इसलिए कभी भी घर पर नुकीली चीजों से इन्हें हटाने का प्रयास न करें। यदि ये आपको परेशान कर रहे हैं, तो हमेशा किसी योग्य डर्मेटोलॉजिस्ट यानी त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम होता है।
चिकित्सा विज्ञान द्वारा तिल और मस्से हटाने के आधुनिक तरीके
आज के समय में मेडिकल साइंस और कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजी में तिल और मस्से को हटाने के लिए कई अत्याधुनिक और दर्द रहित तकनीकें उपलब्ध हैं, जो बिना किसी बड़े चीर-फाड़ के इन्हें जड़ से खत्म कर देती हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय तकनीक 'लेजर रिमूवल' (Laser Removal) है, जिसमें लेजर बीम के जरिए तिल या मस्से की कोशिकाओं को नष्ट कर दिया जाता है और इसमें दाग भी बहुत कम या ना के बराबर रहते हैं। इसके अलावा 'क्रायोथेरेपी' (Cryotherapy) का इस्तेमाल भी किया जाता है, जिसमें लिक्विड नाइट्रोजन की अत्यधिक ठंडक से मस्से को凍 (Freeze) करके सुखा दिया जाता है, जिससे वह अपने आपपपड़ी बनकर झड़ जाता है। इलेक्ट्रोकॉटररी (Electrocautery) विधि में थर्मल एनर्जी या बिजली के करंट का हल्का इस्तेमाल करके इन्हें जलाकर हटाया जाता है। छोटे मस्सों और तिलों के लिए माइनर सर्जिकल एक्सिशन (Minor Surgical Excision) यानी मामूली सर्जरी करके इन्हें टांके लगाकर सुरक्षित तरीके से हटा दिया जाता है।
त्वचा की सुरक्षा और इनसे बचाव के सरल उपाय
तिल और मस्से जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं से सुरक्षित रहने के लिए कुछ बुनियादी सावधानियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बेहद आवश्यक है। धूप में निकलते समय हमेशा अच्छी क्वालिटी के सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करें ताकि सूर्य की हानिकारक किरणें त्वचा की पिगमेंट कोशिकाओं को नुकसान न पहुंचा सकें। अपने व्यक्तिगत तौलिए, रेजर, कपड़े या साबुन किसी दूसरे के साथ साझा करने से बचें, क्योंकि एचपीवी वायरस इसी तरह आसानी से फैलता है। अपनी त्वचा को हमेशा साफ और हाइड्रेटेड रखें। अगर आपको अपने शरीर पर किसी नए तिल या मस्से के आकार, रंग या बनावट में कोई भी असामान्य परिवर्तन दिखाई दे, तो बिना देरी किए किसी अच्छे चर्म रोग विशेषज्ञ से अपनी जांच करवाएं, ताकि समय रहते सही और सुरक्षित इलाज किया जा सके।