विदेश

थाड और पैट्रियट मिसाइलें चट कर गया ईरान, ट्रंप का गोदाम खाली; अमेरिका में हथियारों की भारी कंगाली

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रक्षा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव और ईरान के साथ जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका की सैन्य साजो-सामान से जुड़ी पोल खुलती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के खिलाफ रक्षा करने और उसके हमलों को नाकाम करने में अमेरिकी सेना ने अपने आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम 'थाड' (THAAD) और 'पैट्रियट' (Patriot) मिसाइलों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया है, जिसके चलते अमेरिकी रक्षा भंडारों में इन खतरनाक मिसाइलों का भारी अकाल पड़ गया है और ट्रंप प्रशासन के सामने हथियारों की जबरदस्त कंगाली खड़ी हो गई है।

जानकारों का कहना है कि ईरान और उसके समर्थित मिलिशिया गुटों द्वारा दागे गए ड्रोनों और बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों को अपने सबसे महंगे और अत्याधुनिक डिफेंस इंटरसेप्टर्स का लगातार इस्तेमाल करना पड़ा है। एक के बाद एक लगातार होने वाले इन हमलों से निपटने की प्रक्रिया में अमेरिकी रक्षा गोदामों में रखी करोड़ों डॉलर की ये मिसाइलें तेजी से खत्म हो गई हैं। स्थिति यह हो गई है कि रक्षा उत्पादन की धीमी रफ्तार के मुकाबले खपत कई गुना ज्यादा बढ़ चुकी है, जिससे पेंटागन की नींद उड़ी हुई है।

इस हथियारों की किल्लत का सबसे बड़ा असर अमेरिकी वैश्विक सैन्य रणनीति पर पड़ता दिख रहा है। पेंटागन के रणनीतिकारों के सामने अब यह गंभीर संकट खड़ा हो गया है कि यदि आने वाले दिनों में दुनिया के किसी अन्य हिस्से में कोई नया भू-राजनीतिक विवाद या युद्ध छिड़ जाता है, तो अमेरिकी सेना अपनी रक्षा कैसे करेगी। अमेरिका के रक्षा कारखाने और हथियार निर्माता कंपनियां दिन-रात प्रोडक्शन बढ़ाने में जुटी हैं, लेकिन जिस तेजी से युद्ध के मैदान में मिसाइलें खर्च हो रही हैं, उस हिसाब से नए हथियारों की आपूर्ति करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

पश्चिम एशिया के इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ सैनिकों और बंदूकों का खेल नहीं, बल्कि अत्यधिक खर्चीले और तकनीकी एयर डिफेंस सिस्टम्स की जंग बन चुका है। ईरान के रणनीतिक दबाव ने अमेरिका के अजेय माने जाने वाले रक्षा भंडारों को खाली करने पर मजबूर कर दिया है। आने वाले समय में अमेरिकी प्रशासन के लिए अपने डिफेंस रिजर्व को दोबारा भरना और हथियारों की इस बड़ी कंगाली से निपटना सबसे बड़ी प्राथमिकता रहने वाली है, जिसका असर अमेरिकी रक्षा बजट और विदेश नीतियों पर भी साफ दिखाई देगा।

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